बस्ती का ‘राम जी पेड़ा’: मुस्लिम महिलाओं के हाथों से बनी मिठास, देश-विदेश में बढ़ी मांग
परंपरा, रोज़गार और सांझी संस्कृति का अनोखा संगम
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिला में इन दिनों एक खास मिठाई “राम जी पेड़ा” चर्चा का केंद्र बनी हुई है। इस पेड़े की खास बात सिर्फ इसका स्वाद नहीं, बल्कि इसे बनाने वाली महिलाएं और इसकी परंपरागत विधि है। खासकर मुस्लिम महिलाओं के हाथों से तैयार यह पेड़ा देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक अपनी पहचान बना चुका है।
यह पेड़ा पूरी तरह देसी अंदाज में तैयार किया जाता है। बड़े-बड़े बर्तनों में लकड़ी के चूल्हों पर शुद्ध दूध, देशी घी और गुड़ का इस्तेमाल कर इसे पकाया जाता है। इसी पारंपरिक विधि के कारण इसमें एक खास सोंधी खुशबू आती है, जो इसके स्वाद को और भी खास बना देती है। गुड़ से बनने के कारण इसे आम तौर पर “शुगर-फ्री” विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे इसकी मांग खासकर विदेशों में तेजी से बढ़ी है।
रोज़गार का जरिया बना ‘राम जी पेड़ा’
इस पहल के पीछे स्थानीय युवा उद्यमी मनीष मिश्रा की अहम भूमिका रही है। उन्होंने गांव की गरीब और बेरोजगार महिलाओं को पहले पेड़ा बनाने की ट्रेनिंग दी, फिर उन्हें कच्चा माल उपलब्ध कराकर काम शुरू कराया। धीरे-धीरे यह छोटा प्रयास एक बड़े अभियान में बदल गया।
आज करीब 500 महिलाएं इस काम से जुड़ चुकी हैं और हर महीने हजारों रुपये की आमदनी कर रही हैं। इससे न सिर्फ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ा कदम साबित हुआ है। इस काम में हिंदू और मुस्लिम महिलाएं साथ मिलकर काम कर रही हैं, जो सामाजिक सौहार्द का भी एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है।
अयोध्या से विदेश तक का सफर
“राम जी पेड़ा” की सबसे खास परंपरा यह है कि तैयार होने के बाद इसे पहले अयोध्या भेजा जाता है, जहां भगवान राम को इसका भोग लगाया जाता है। इसके बाद ही इसे बाजार में बिक्री के लिए भेजा जाता है। जानकारी के मुताबिक, अब इस पेड़े की सप्लाई भारत के अलावा रूस और यूरोप जैसे देशों तक पहुंच रही है। जैसे ही ऑर्डर मिलता है, महिलाएं काम में जुट जाती हैं और महज दो दिनों में कई किलो पेड़े तैयार कर लेती हैं। फिर इन्हें पारंपरिक तरीके से मटकों में पैक कर भेजा जाता है।
स्वाद के साथ स्वच्छता का भी ध्यान
इस पेड़े को बनाने में सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि स्वच्छता और हाइजीन का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। देसी चूल्हे पर पकने के बावजूद साफ-सफाई के मानकों का पालन किया जाता है, जिससे इसकी गुणवत्ता बनी रहती है।
मिठास में छुपी एकता और आत्मनिर्भरता की कहानी
बस्ती का “राम जी पेड़ा” सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि एक ऐसी कहानी है जिसमें परंपरा, रोजगार और सामाजिक एकता का संगम देखने को मिलता है। मुस्लिम महिलाओं द्वारा भगवान राम के नाम से पेड़ा बनाना और उसका देश-विदेश में प्रसिद्ध होना, भारत की गंगा-जमुनी तहजीब का जीवंत उदाहरण है। यह पहल दिखाती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर छोटे गांवों से भी बड़ी सफलताएं निकल सकती हैं—जो न सिर्फ स्थानीय लोगों की जिंदगी बदलती हैं, बल्कि देश की पहचान को भी वैश्विक स्तर पर मजबूत करती हैं।





