अमेरिका में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘गोल्ड कार्ड वीजा’ योजना को लेकर अब नई बहस छिड़ गई है। डोनाल्ड ट्रंप की इस महत्वाकांक्षी स्कीम को लॉन्च हुए चार महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन अब तक सिर्फ एक ही आवेदक को मंजूरी मिल पाई है। यह जानकारी अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक ने एक संसदीय बैठक के दौरान साझा की, जिसके बाद योजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।
बड़ी निवेश राशि के बावजूद योजना में धीमी प्रगति ने खड़े किए कई सवाल
इस वीजा योजना के तहत कोई भी विदेशी नागरिक कम से कम 10 लाख डॉलर यानी करीब 9.4 करोड़ रुपये का निवेश करके अमेरिका में रहने और काम करने की अनुमति हासिल कर सकता है। शुरुआत में इसे पुराने EB-5 Visa Program के विकल्प के रूप में पेश किया गया था। हालांकि, शुरुआत में इसकी कीमत 50 लाख डॉलर तक बताई गई थी, जिससे यह योजना और अधिक चर्चा में आ गई थी। बावजूद इसके, इतने समय में सिर्फ एक स्वीकृति मिलना इस स्कीम की धीमी प्रक्रिया को उजागर करता है।
सरकार का दावा—सैकड़ों आवेदन जांच के दायरे में, प्रक्रिया बेहद सख्त
वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक ने स्पष्ट किया कि सैकड़ों विदेशी निवेशकों ने इस योजना के तहत आवेदन किया है, लेकिन प्रत्येक आवेदन की गहन जांच की जा रही है। सरकार का कहना है कि सुरक्षा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए कोई भी निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिया जा रहा है। इस योजना में आवेदन शुल्क के अलावा 15,000 डॉलर की अतिरिक्त फीस भी शामिल है, और मंजूरी मिलने के बाद यह वीजा अमेरिकी नागरिकता का रास्ता भी खोल सकता है।
वेबसाइट लॉन्च से लेकर ‘प्लेटिनम कार्ड’ योजना तक सरकार की बड़ी तैयारी
अमेरिकी सरकार ने इस स्कीम के प्रचार-प्रसार के लिए एक विशेष वेबसाइट भी शुरू की है, जिसमें देश के प्रमुख प्रतीकों जैसे स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और बाल्ड ईगल को दर्शाया गया है। इसके अलावा भविष्य में 50 लाख डॉलर का ‘ट्रंप प्लेटिनम कार्ड’ लाने की योजना भी सामने आई है, जिसके तहत विदेशी नागरिकों को 270 दिनों तक अमेरिका में रहने और विदेशी आय पर टैक्स से राहत देने का प्रस्ताव है।
बड़े आर्थिक लक्ष्य के बावजूद भारी कर्ज और घाटे के बीच योजना की उपयोगिता पर बहस तेज
इस योजना के जरिए अमेरिकी सरकार ने लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर तक की कमाई का अनुमान लगाया है, जो देश के बजट संतुलन में अहम भूमिका निभा सकती है। फिलहाल अमेरिका पर करीब 31.3 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है और इस साल लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर का बजट घाटा रहने की संभावना जताई गई है। ऐसे में इस स्कीम को आर्थिक राहत के एक बड़े साधन के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन शुरुआती आंकड़े इसके असर पर सवाल खड़े कर रहे हैं।





