बाइक पर सवार कलेक्टर: साचरखूंटा पहुंचीं IAS लीना मंडावी, पहली बार गांव तक पहुंचा प्रशासन
दूरस्थ वनांचल में प्रशासन की ऐतिहासिक दस्तक
बाइक पर सवार महिला आईएएस…छत्तीसगढ़ के इस छोटे से गांव बाइक से पहुंचीं कलेक्टर लीना मंडावी
छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिला के सुदूर वनांचल क्षेत्र में स्थित साचरखूंटा गांव ने एक ऐतिहासिक दिन देखा, जब जिला कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी खुद बाइक से दुर्गम रास्तों को पार कर गांव पहुंचीं। यह पहला मौका था जब किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने इस गांव में कदम रखा। चारों ओर घने जंगलों से घिरे इस क्षेत्र में प्रशासन की सीधी पहुंच ने ग्रामीणों में उत्साह और भरोसा दोनों जगाया।
‘ग्राम जोहार अभियान’ के तहत जनचौपाल का आयोजन
साचरखूंटा में ‘ग्राम जोहार अभियान’ के अंतर्गत जनचौपाल का आयोजन किया गया। कलेक्टर मंडावी करीब 4 किलोमीटर तक बाइक से कठिन रास्तों को पार करते हुए गांव पहुंचीं। आम के पेड़ की छांव में आयोजित इस जनचौपाल में विशेष पिछड़ी जनजाति पंडो समुदाय के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। यह आयोजन ग्रामीणों और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना।
ग्रामीणों की समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश
जनचौपाल में कलेक्टर ने ग्रामीणों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और संबंधित अधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ तभी मिल सकता है जब लोगों को उनकी सही जानकारी हो। कलेक्टर ने गांव में सड़क निर्माण और प्राथमिक शाला खोलने का आश्वासन दिया, जिससे गांव के विकास को नई दिशा मिल सके।
शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता पर जोर
कलेक्टर मंडावी ने बच्चों की नियमित स्कूल और आंगनबाड़ी उपस्थिति सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूक रहने का संदेश दिया। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए कि गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। यह पहल गांव के समग्र विकास के लिए अहम मानी जा रही है।
ग्रामीणों ने सौंपे आवेदन, योजनाओं की दी गई जानकारी
जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों ने पहुंच मार्ग, वन अधिकार पत्र और अन्य समस्याओं को लेकर आवेदन सौंपे। कलेक्टर ने इन पर शीघ्र कार्रवाई का भरोसा दिलाया। साथ ही डबरी, कुआं निर्माण और अन्य हितग्राही योजनाओं के लिए अधिक आवेदन करने को प्रेरित किया गया। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने कृषि, पशुपालन, फसल बीमा, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और आंगनबाड़ी सेवाओं की विस्तृत जानकारी भी दी।
पहली बार गांव पहुंचा प्रशासन, बढ़ा भरोसा
साचरखूंटा गांव में इससे पहले अनुविभागीय अधिकारी स्तर का कोई अधिकारी भी नहीं पहुंचा था। जिला गठन के बाद यह पहला अवसर है जब कलेक्टर स्वयं यहां पहुंचीं। खासकर एक महिला अधिकारी का इस दुर्गम क्षेत्र में पहुंचना ग्रामीणों के लिए विश्वास और प्रेरणा का प्रतीक बन गया।
पंडो जनजाति को अधिकार दिलाने की उठी मांग
इस क्षेत्र में रहने वाली पंडो जनजाति विशेष पिछड़ी जनजाति के अंतर्गत आती है, लेकिन उन्हें योजनाओं का पूर्ण लाभ नहीं मिल पा रहा। स्थानीय लोगों ने मांग की कि इस समुदाय को उनके अधिकारों का पूरा लाभ दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। कलेक्टर की इस पहल से उम्मीद जगी है कि अब प्रशासन इन मुद्दों पर गंभीरता से काम करेगा।





