सूखा पड़ सकता है मानसून 2026: किन राज्यों में कम बरसेंगे बादल, कहां होगी झमाझम बारिश?
मौसम विभाग का बड़ा अलर्ट—इस साल औसत से 8% कम बारिश
गर्मी के बढ़ते असर के बीच देशवासियों को जिस मॉनसून का इंतजार रहता है, उस पर इस बार चिंता के बादल मंडरा रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, 2026 में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। अनुमान है कि इस साल कुल बारिश औसत से करीब 8% कम रहेगी।
कितनी होगी कुल बारिश?
IMD के मुताबिक जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश (LPA) इस साल करीब 92% रह सकती है।
सामान्य तौर पर भारत में औसत मॉनसूनी बारिश लगभग 87 सेमी मानी जाती है, लेकिन इस बार यह आंकड़ा इससे नीचे रह सकता है। इसका सीधा असर खेती, जलस्तर और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
इन राज्यों में सूखे जैसे हालात की आशंका
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश कम हो सकती है।
- पंजाब, हरियाणा, राजस्थान
- उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर
- मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र
इन इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है, जिससे कृषि और जल संकट की स्थिति बन सकती है।
यहां बरसेंगे मेघ, मिलेगी राहत
कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश की उम्मीद भी जताई गई है:
- पूर्वोत्तर भारत—असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश
- दक्षिण भारत—केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्से
इन क्षेत्रों में सामान्य या उससे अधिक बारिश हो सकती है, जिससे वहां जल और कृषि की स्थिति बेहतर रह सकती है।
कमजोर मानसून की वजह क्या है?
मौसम विभाग ने इसके पीछे प्रशांत महासागर में हो रहे बदलावों को जिम्मेदार बताया है।
ला नीना की स्थिति अब तटस्थ हो रही है, जबकि अल नीनो जैसी परिस्थितियां बनने की संभावना है।
आमतौर पर अल नीनो का असर भारतीय मानसून पर नकारात्मक पड़ता है, जिससे बारिश कम हो जाती है।
क्या होगा असर?
कमजोर मानसून का असर कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है:
- खेती और फसल उत्पादन पर असर
- जलाशयों और भूजल स्तर में गिरावट
- बिजली उत्पादन और पेयजल संकट की संभावना
सतर्क रहने का समय
मॉनसून 2026 का यह पूर्वानुमान संकेत देता है कि देश को पानी और कृषि प्रबंधन के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है। हालांकि मौसम की सटीक स्थिति समय के साथ बदल सकती है, लेकिन अभी के संकेत यही बताते हैं कि इस साल “बरसात कम और चिंता ज्यादा” वाली स्थिति बन सकती है।





