MP में 3 महिला IAS पहली बार बनीं कलेक्टर, करियर से जन्म तक दिखे 4 गजब संयोग
मध्य प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने हाल ही में 26 आईएएस अधिकारियों के तबादले करते हुए 14 जिलों में कलेक्टर बदले हैं। इस व्यापक फेरबदल को प्रशासनिक सर्जरी के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि इस सूची में बड़ी संख्या में महिला अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है, जिससे प्रदेश में महिला नेतृत्व को बढ़ावा मिलने का संकेत भी साफ है।
महिला नेतृत्व को बढ़ावा
इस तबादला सूची की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जिन 14 जिलों में नए कलेक्टर नियुक्त किए गए हैं, उनमें 9 जिलों की कमान महिला आईएएस अधिकारियों को सौंपी गई है। यह मध्य प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पहले से कलेक्टर रह चुकी प्रतिभा पाल और नेहा मीना जैसी अफसरों के साथ-साथ नई चेहरों को भी मौका दिया गया है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है।
पहली बार कलेक्टर बनीं 3 महिला IAS
इस फेरबदल में तीन महिला आईएएस अधिकारियों को पहली बार जिला कलेक्टर बनने का मौका मिला है। इनमें राखी सहाय, शीला दाहिमा और बिदिशा मुखर्जी शामिल हैं। इन तीनों अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर प्रशासनिक हलकों में खास चर्चा है, क्योंकि इनके करियर और निजी जीवन में कई समानताएं देखने को मिली हैं।
राखी सहाय: प्रशासनिक अनुभव के साथ नई जिम्मेदारी
2015 बैच की आईएएस अधिकारी राखी सहाय को उमरिया जिले का कलेक्टर बनाया गया है। इससे पहले वे मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग में सचिव के पद पर कार्यरत थीं। अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर डिग्री रखने वाली राखी सहाय राज्य प्रशासनिक सेवा से प्रमोट होकर आईएएस बनी हैं। उन्होंने वित्त निगम में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं, जिससे उनके अनुभव का लाभ जिले को मिलने की उम्मीद है।
शीला दाहिमा: इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से प्रशासन तक
श्योपुर जिले की नई कलेक्टर शीला दाहिमा भी 2015 बैच की अधिकारी हैं। वे सहकारिता विभाग में उप सचिव के पद से यहां पहुंची हैं। इंजीनियरिंग में स्नातक करने वाली शीला दाहिमा भी राज्य सेवा से प्रमोशन पाकर आईएएस बनी हैं। उनका तकनीकी और प्रशासनिक अनुभव श्योपुर जिले के विकास कार्यों में अहम भूमिका निभा सकता है।
बिदिशा मुखर्जी: नई जिम्मेदारी, नई उम्मीदें
मैहर जिले की कलेक्टर बनीं बिदिशा मुखर्जी भी 2015 बैच की अधिकारी हैं। वे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में उप सचिव के पद पर कार्यरत थीं। विज्ञान पृष्ठभूमि से आने वाली बिदिशा मुखर्जी को भी पहली बार कलेक्टर बनने का अवसर मिला है। उनके सामने जिले के विकास और प्रशासनिक सुधार की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
चार गजब संयोग: तीनों अफसरों की कहानी में समानता
इन तीनों महिला अधिकारियों की जिंदगी में चार ऐसे खास संयोग सामने आए हैं, जो इस नियुक्ति को और भी दिलचस्प बनाते हैं। पहला, तीनों ही अधिकारी राज्य प्रशासनिक सेवा से प्रमोट होकर आईएएस बनी हैं। दूसरा, तीनों को एक ही साल यानी 2015 बैच में आईएएस का दर्जा मिला। तीसरा, तीनों को एक साथ पहली बार जिला कलेक्टर बनने का मौका मिला है।
और चौथा, सबसे चौंकाने वाला संयोग यह है कि तीनों का जन्म वर्ष 1975 है।
प्रशासन में बदलाव का संदेश
इस बड़े फेरबदल को सिर्फ तबादलों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे प्रशासनिक सोच में बदलाव के रूप में भी देखा जा रहा है। महिला अधिकारियों को बड़ी संख्या में जिम्मेदारी देना सरकार के उस प्रयास को दर्शाता है, जिसमें प्रशासन को अधिक संवेदनशील, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है।
आगे की चुनौती और उम्मीदें
अब सबसे बड़ी चुनौती इन नए कलेक्टरों के सामने अपने-अपने जिलों में विकास कार्यों को गति देने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की होगी। खासतौर पर पहली बार कलेक्टर बनी इन तीनों महिला अधिकारियों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि ये अधिकारी अपने अनुभव और नई सोच के साथ किस तरह जिलों की तस्वीर बदलती हैं और प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा देती हैं।





