जल गंगा संवर्धन अभियान 2026: सूखे कुओं को मिलेगा नया जीवन, किसानों को सिंचाई के लिए भरपूर पानी
सागर जिले में 5800 से अधिक जल संरचनाओं पर काम, बारिश की हर बूंद को सहेजने की पहल
अभियान का तीसरा चरण जारी
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल संरक्षण को लेकर बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। 19 मार्च से “जल गंगा संवर्धन अभियान 2026” का तीसरा चरण शुरू हो चुका है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पुरानी जल संरचनाओं को पुनर्जीवित करना और वर्षा जल का अधिकतम संचयन करना है, ताकि प्रदेश में जल संकट की समस्या को कम किया जा सके।
हर बूंद को बचाने पर जोर
अभियान के तहत कूप रिचार्ज पिट, खेत तालाब, अमृत सरोवर, नए तालाब निर्माण और कंटूर ट्रेंच जैसे कई कार्य किए जा रहे हैं। इसके अलावा तालाबों, बावड़ियों और नदियों की सफाई के साथ रेन वाटर हार्वेस्टिंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इस व्यापक अभियान में प्रदेश के 18 विभाग मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे जल संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप दिया जा सके।
सागर जिले में बड़े पैमाने पर कार्य
अभियान के अंतर्गत सागर जिले में 5800 से अधिक जल संरचनाओं पर काम किया जा रहा है। इनमें कूप रिचार्ज पिट, खेत तालाब, अमृत सरोवर और कंटूर ट्रेंच जैसे कार्य प्रमुख हैं। यह पहल जिले के जल संसाधनों को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
सूखे कुओं को मिलेगा नया जीवन
इन कार्यों के पूरा होने के बाद सागर जिले में सूख चुके कुओं को फिर से जीवित किया जा सकेगा। कूप रिचार्ज पिट के माध्यम से भूमिगत जल स्तर बढ़ेगा, जिससे कुओं में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए राहत मिलेगी।
किसानों को होगा सीधा लाभ
अमृत सरोवर, खेत तालाब और अन्य जल संरचनाओं में वर्षा जल के संग्रहण से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। इसके साथ ही उद्यानिकी और मछली पालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि की संभावना है।
जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
“जल गंगा संवर्धन अभियान 2026” न केवल जल संकट को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा। इस अभियान से प्रदेश में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और आने वाले समय में जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा।





