नासिक IT कंपनी विवाद: शोषण, धर्मांतरण आरोप और सियासी संग्राम
कॉर्पोरेट कैंपस में सनसनीखेज मामला
महाराष्ट्र के नासिक से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने कॉर्पोरेट सेक्टर से लेकर सियासी गलियारों तक हलचल मचा दी है। एक मल्टीनेशनल IT कंपनी में काम करने वाली महिला कर्मचारियों ने यौन शोषण, जबरन धर्मांतरण के दबाव और धार्मिक आस्था के अपमान जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने इस मामले में 6 टीम लीडर और एक HR मैनेजर सहित कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया है।
चार साल से दबा था मामला
पीड़ित महिला कर्मचारियों का आरोप है कि यह सब पिछले चार वर्षों से चल रहा था। उन्होंने कई बार कंपनी के HR विभाग से शिकायत की, लेकिन हर बार उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया। आरोप है कि उल्टा उन्हें चुप रहने के लिए दबाव और धमकियां दी जाती थीं।
व्यवहार और पहनावे से खुली परतें
मामला तब उजागर हुआ जब कुछ महिला कर्मचारियों के व्यवहार और पहनावे में अचानक बदलाव देखने को मिला। उन्होंने अपने पारंपरिक तौर-तरीके छोड़ दिए, रमजान के दौरान रोजा रखने लगीं और अपनी सामाजिक गतिविधियों से दूरी बना ली। सहकर्मियों को यह बदलाव असामान्य लगा, जिसके बाद धीरे-धीरे सच्चाई सामने आने लगी।
धर्मांतरण और जबरन धार्मिक गतिविधियों के आरोप
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, करीब 8 महिलाओं और एक पुरुष कर्मचारी को धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया गया। आरोप है कि उन्हें जबरन नमाज पढ़ने और गोमांस खाने के लिए मजबूर किया गया। इतना ही नहीं, उनके धार्मिक प्रतीकों का अपमान भी किया गया। पीड़ितों का कहना है कि यह सब मानसिक और सामाजिक दबाव बनाकर कराया जा रहा था।
लालच और दबाव का जाल
जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने पद का दुरुपयोग करते थे। नौकरी और प्रमोशन का लालच देकर महिला कर्मचारियों को अपने जाल में फंसाया जाता था। “वीकेंड ट्रिप” के नाम पर उन्हें रिसॉर्ट या वाटर पार्क ले जाया जाता, जहां उनके साथ कथित तौर पर गलत व्यवहार किया जाता और दबाव बनाया जाता।
अंडरकवर ऑपरेशन से जुटे सबूत
पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष रणनीति अपनाई। महिला पुलिसकर्मियों को भेष बदलकर कंपनी में काम करने के लिए भेजा गया। उन्होंने आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी और सबूत जुटाए। करीब 40 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई, जिसमें कथित छेड़छाड़ और अश्लील हरकतों के दृश्य सामने आए हैं।
गिरफ्तार आरोपी और जांच
गिरफ्तार आरोपियों में आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाह रुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तार और दानिश शेख जैसे टीम लीडर्स शामिल हैं। इसके अलावा HR मैनेजर अश्विनी छनानी को भी हिरासत में लिया गया है। सभी पर पीड़ितों को धमकाने और मामले को दबाने के आरोप हैं। राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT (विशेष जांच दल) का गठन किया है।
कैंपस में हंगामा, सियासत तेज
शुक्रवार को इस मामले ने उस वक्त तूल पकड़ लिया जब हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने कंपनी कैंपस में घुसकर जमकर हंगामा किया। इसके बाद मामला पूरी तरह सियासी रंग में आ गया। बीजेपी ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कंपनी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और सख्त कार्रवाई की मांग की।
सरकार का बयान और सख्ती के संकेत
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री गिरीश महाजन ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल एक कंपनी का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरी और प्रमोशन का लालच देकर लड़कियों को बहकाया जा रहा था।
पीड़ितों की आपबीती
एक पीड़ित लड़की ने बताया कि उसने कंपनी में अच्छे माहौल की उम्मीद से नौकरी जॉइन की थी, लेकिन वहां काम से ज्यादा उसके धर्म और निजी जीवन में दखल दिया जाता था। शुरुआत में डर और सामाजिक दबाव के कारण वह चुप रही, लेकिन बाद में अन्य पीड़ितों के साथ मिलकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
बड़ा सवाल: कॉर्पोरेट में सुरक्षा कितनी मजबूत?
यह मामला कई बड़े सवाल खड़े करता है—क्या कॉर्पोरेट कंपनियों में कर्मचारियों की सुरक्षा और अधिकारों की पर्याप्त व्यवस्था है? क्या HR सिस्टम वास्तव में निष्पक्ष है या कहीं न कहीं दबाव में काम करता है? नासिक की इस IT कंपनी का मामला सिर्फ एक आपराधिक केस नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट गवर्नेंस, महिला सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। पुलिस जांच जारी है और SIT की रिपोर्ट का इंतजार है। अब देखना होगा कि इस पूरे मामले में सच्चाई क्या सामने आती है और दोषियों के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई होती है।





