फ्लश से गद्दों तक नोटों का जाल: यूपी के रिटायर्ड अफसर की 100 करोड़ की संपत्ति का खुलासा
कानपुर/नोएडा: उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें वाणिज्य कर विभाग के रिटायर्ड एडिशनल कमिश्नर केशव लाल पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगा है। विजिलेंस विभाग की जांच में उनके पास 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति होने का खुलासा हुआ है, जिसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।
- विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई, रिटायर्ड अधिकारी पर भ्रष्टाचार का केस
- छापे में फ्लश, गद्दों और अलमारियों से मिले करोड़ों रुपये
- पांच शहरों में फैली 100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति
- आय से कई गुना ज्यादा खर्च ने खोली पोल
- जबरन रिटायरमेंट के बाद अब कानूनी शिकंजा कसा
यह कार्रवाई कानपुर विजिलेंस यूनिट द्वारा की गई है, जिसने लंबी जांच के बाद यह पाया कि केशव लाल ने अपने सेवा काल के दौरान वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की। जांच में सामने आया कि उनकी घोषित आय और वास्तविक खर्च में भारी अंतर है, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
फ्लश और गद्दों में छिपे नोटों ने खोली पोल
इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2017 में हुई थी, जब आयकर विभाग ने नोएडा के सेक्टर-34 स्थित उनके घर पर छापेमारी की थी। इस दौरान जो नजारा सामने आया, उसने अधिकारियों को भी चौंका दिया। घर के हर कोने से नोटों की गड्डियां बरामद हुईं—चाहे वह पूजा घर हो, अलमारी हो, बिस्तर के गद्दे हों या फिर बाथरूम का फ्लश।
छापे में करीब 10 करोड़ रुपये नकद और लगभग 3 करोड़ रुपये के जेवरात बरामद किए गए थे। उस समय केशव लाल इन पैसों का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, जिसके बाद उनके खिलाफ जांच शुरू हुई।
पांच शहरों में फैली अकूत संपत्ति
विजिलेंस की जांच में यह भी सामने आया कि केशव लाल ने उत्तर प्रदेश के कई शहरों में बेनामी संपत्ति खड़ी कर रखी है। लखनऊ में उनके दो आलीशान मकान हैं, जबकि कानपुर, प्रयागराज, गाजियाबाद और नोएडा में भी महंगे प्लॉट और मकान होने के प्रमाण मिले हैं।
इन सभी संपत्तियों के दस्तावेज मिलने के बाद अधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला कि यह संपत्ति उनकी वैध आय से अर्जित नहीं की जा सकती थी। इसलिए इन्हें भ्रष्टाचार की कमाई माना जा रहा है।
आय से कई गुना ज्यादा खर्च
जांच रिपोर्ट के अनुसार, केशव लाल की कुल वैध आय उनके पूरे करियर में लगभग 1.34 करोड़ रुपये थी। इसके विपरीत, उनके द्वारा किया गया कुल खर्च और निवेश 18.27 करोड़ रुपये से अधिक पाया गया। यानी उन्होंने अपनी आय से करीब 17.26 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च किए।
यह बड़ा अंतर ही उनके खिलाफ सबसे मजबूत सबूत बना। इसी आधार पर सरकार ने पहले ही वर्ष 2017 में उन्हें जबरन रिटायर कर दिया था।
अब कसा कानूनी शिकंजा
अगस्त 2023 से चल रही विस्तृत जांच के बाद जब उनकी कुल संपत्ति 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई, तो शासन से अनुमति लेकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है और संभावना है कि उनकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा उदाहरण बन सकता है। विजिलेंस विभाग की इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि आय से अधिक संपत्ति रखने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
कुल मिलाकर, फ्लश से लेकर गद्दों तक छिपाए गए नोटों का यह मामला न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह भ्रष्टाचार की जड़ें सिस्टम में गहरी हो सकती हैं। अब सभी की नजरें इस केस की आगे की कार्रवाई और सजा पर टिकी हैं।





