युद्ध की आंच में जला बाजार, खुलते ही सेंसेक्स 1600 अंक टूटा
indian stock market crash: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता का असर आखिरकार भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को वही हुआ, जिसका डर निवेशकों को पहले से सता रहा था। बाजार खुलते ही भारी बिकवाली शुरू हो गई और कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स 1600 अंक से ज्यादा लुढ़क गया। वहीं निफ्टी भी करीब 450 अंक टूटकर नीचे आ गया, जिससे निवेशकों के बीच हड़कंप मच गया।
- मिडिल ईस्ट तनाव से बाजार में घबराहट
- सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज
- लार्जकैप शेयरों में बिकवाली का दबाव
- एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेत
- कच्चे तेल की कीमतों का असर
दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात ने वैश्विक बाजारों में पहले ही नकारात्मक माहौल बना दिया था। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए तेल की कीमतों में वृद्धि सीधे महंगाई और आर्थिक दबाव को बढ़ाती है, जिसका असर शेयर बाजार पर तुरंत दिखने लगता है।
सोमवार सुबह जब बाजार खुला तो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,532 के मुकाबले करीब 800 अंक की गिरावट के साथ 73,700 के आसपास खुला। लेकिन यह गिरावट यहीं नहीं रुकी। शुरुआती मिनटों में ही बिकवाली इतनी तेज हुई कि सेंसेक्स 72,977 तक फिसल गया, यानी कुल मिलाकर 1600 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 भी दबाव में नजर आया। यह अपने पिछले बंद 23,114 के मुकाबले गिरकर 22,824 पर खुला और कुछ ही देर में 22,600 के आसपास पहुंच गया। निफ्टी में करीब 480 अंकों की गिरावट ने यह साफ कर दिया कि बाजार में घबराहट किस हद तक बढ़ चुकी है।
बाजार में आई इस भारी गिरावट का सबसे बड़ा संकेत यह रहा कि बीएसई के सभी 30 लार्जकैप शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे। निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए बड़े पैमाने पर बिकवाली की, जिससे दिग्गज कंपनियों के शेयर भी नहीं बच सके। टाटा स्टील में करीब 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एसबीआई, बजाज फाइनेंस और एचडीएफसी बैंक जैसे मजबूत शेयर भी 2 से 3 फीसदी तक टूट गए। इंडिगो, टाइटन, बीईएल और अडानी पोर्ट्स जैसे शेयरों में भी गिरावट ने बाजार के कमजोर सेंटीमेंट को और उजागर कर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक दबाव का नतीजा है। एशियाई बाजारों में पहले से ही कमजोरी देखी जा रही थी। जापान का निक्केई इंडेक्स 4 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग भी करीब 3 प्रतिशत टूट गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी तो 5 प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क गया, जो निवेशकों के डर को दर्शाता है।
यूरोपीय बाजारों में भी नकारात्मक रुख देखने को मिला। जर्मनी का DAX, फ्रांस का CAC और ब्रिटेन का FTSE-100 सभी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। ऐसे में भारतीय बाजार पर दबाव बनना तय माना जा रहा था।
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। तेल की कीमतें बढ़ने से भारत का आयात बिल बढ़ेगा, जिससे रुपये पर दबाव पड़ेगा और महंगाई बढ़ने की आशंका भी है। यही कारण है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालने लगे हैं, जिससे बाजार में गिरावट और तेज हो रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट का संकट कम नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है और जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचने को कहा गया है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ इसे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी मान रहे हैं। उनका कहना है कि मजबूत कंपनियों के शेयर इस गिरावट में सस्ते मिल रहे हैं, जो भविष्य में अच्छा रिटर्न दे सकते हैं। लेकिन इसके लिए धैर्य और सही रणनीति जरूरी होगी।
कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी बाजारों की कमजोरी ने मिलकर भारतीय शेयर बाजार को झटका दिया है। आने वाले दिनों में बाजार का रुख काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा।





