संसद के बजट सत्र के दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने बैंकों में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की अनिवार्यता और उस पर लगने वाले जुर्माने को लेकर जोरदार मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था गरीब और कम आय वाले खाताधारकों के लिए अन्यायपूर्ण है और इसे खत्म किया जाना चाहिए। चड्ढा ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में बैंकों ने इस मद में भारी रकम वसूली है।
संसद में उठाया गया मुद्दा: न्यूनतम बैलेंस नियम को लेकर व्यापक बहस की जरूरत पर जोर दिया गया
राघव चड्ढा ने मंगलवार को बजट सत्र के दौरान कहा कि बैंकों द्वारा न्यूनतम बैलेंस न रखने पर वसूला जाने वाला शुल्क आम लोगों के लिए बोझ बन चुका है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बैंकिंग प्रणाली को अधिक समावेशी बनाने के लिए इस नियम की समीक्षा की जाए। उनके मुताबिक, बैंकिंग सेवाओं का उद्देश्य लोगों को जोड़ना होना चाहिए, न कि उन्हें आर्थिक रूप से दंडित करना।
सरकारी आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि तीन साल में 19,000 करोड़ रुपये वसूले गए
चड्ढा ने कहा कि सरकार के आधिकारिक जवाब के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के दौरान बैंकों ने न्यूनतम बैलेंस न रखने पर कुल करीब 19,000 करोड़ रुपये की वसूली की। उन्होंने इसे गंभीर विषय बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी राशि का बोझ सीधे छोटे खाताधारकों पर पड़ा है, जो अक्सर सीमित आय में गुजारा करते हैं।
कम आय वाले खाताधारकों पर असर को उदाहरण के जरिए समझाया गया
उन्होंने बताया कि गरीब व्यक्ति महीनों बचत कर कुछ रकम जमा करता है, लेकिन आपात स्थिति में जब पैसे निकालता है तो न्यूनतम बैलेंस टूटने पर बैंक उससे बार-बार शुल्क काटते हैं। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि हर महीने 100 रुपये के हिसाब से छह महीने में 600 रुपये कट जाते हैं, जो गरीब परिवार के लिए बड़ी रकम होती है।
ग्रामीण बैंकिंग में अधिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए शुल्क ढांचे पर सवाल उठाए गए
चड्ढा ने ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई ग्रामीण शाखाओं में न्यूनतम बैलेंस 1,000 से 3,000 रुपये तक रखना पड़ता है और बैलेंस कम होने पर 50 से 600 रुपये तक का शुल्क लिया जाता है, जिस पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी लगता है। उन्होंने इसे वित्तीय समावेशन के उद्देश्य के विपरीत बताया।
वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए जुर्माना खत्म करने की अपील दोहराई गई
अंत में उन्होंने कहा कि अगर सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक लोग बैंकिंग प्रणाली से जुड़ें, तो बचत को प्रोत्साहन देना होगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि किसानों के कर्ज की तरह न्यूनतम बैलेंस पर लगने वाले जुर्माने को भी समाप्त किया जाए, ताकि गरीब वर्ग को राहत मिल सके और वे आर्थिक मुख्यधारा में शामिल हो सकें।




