अंतर सिंह आर्य के अथक प्रयासों से हुआ विशेष पिछड़ी जनजातियों का उद्धार…NCST अध्यक्ष के रुप में दो साल पूरे
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग NCST के वर्तमान में अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य हैं। बीजेपी में कई अहम जिम्मेदारियों को संभालने के बाद उन्होंने इस संवैधानिक पद की जिम्मेदारी संभाली है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समुदाय के अधिकारों की रक्षा करना साथ ही उनके विकास और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
13 मार्च 2024 का अंतर सिंह आर्य ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की जिम्मेदारी संभाली थी।
- आर्य 13 मार्च 2024 को बने थे अध्यक्ष
- अजजा आयोग राष्ट्रीय अध्यक्ष बने
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की थी नियुक्ति
- दो साल पूरा होने पर आर्य का संदेश
- जनजातीय समाज सशक्त होगा
- उज्ज्वल और मजबूत होगा भारत का भविष्य
- भारत का भविष्य और अधिक होगा उज्जवल
- वरिष्ठ आदिवासी नेता हैं अंतर सिंह आर्य
- मध्यप्रदेश सरकार में रह चुके हैं कैबिनेट
अंतर सिंह आर्य के अथक प्रयासों से विशेष पिछड़ी जनजातियों का उद्धार हुआ है। दो साल पूरे होने पर अंतरयिंह आर्य ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी किया। जिसमें उन्होंने लिखा कि 13 मार्च को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष के रूप में उनकी दो वर्ष की सेवा पूर्ण हुई। यह समय उनके लिए केवल एक पद की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के सम्मान, अधिकारों की रक्षा और उनके समग्र विकास के लिए समर्पित एक महत्वपूर्ण सेवा यात्रा रहा है। इन दो वर्षों में देश के विभिन्न जनजातीय क्षेत्रों का भ्रमण कर समाज के लोगों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला। उनकी पीड़ा, मस्याओं और अपेक्षाओं को निकट से समझते हुए उनकी शिकायतों के समाधान, संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण और उनके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास किए गए।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का संकल्प है कि जनजातीय समाज को न्याय, सुरक्षा, सम्मान और विकास के समान अवसर प्राप्त हों। इसी भावना के साथ आयोग निरंतर कार्य कर रहा है और आगे भी पूरी प्रतिबद्धता, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करता रहेगा। आर्य लिखते हैं यह दो वर्ष सेवा, विश्वास और समाज के साथ सशक्त संवाद की एक महत्वपूर्ण यात्रा रहे हैं। इस दौरान मिले सभी साथियों, सहयोगियों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों तथा जनजातीय समाज के स्नेह, विश्वास और सहयोग के लिए वे हृदय से आभारी हैं।
“जनजातीय समाज का सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा केवल दायित्व नहीं, बल्कि एक समावेशी और सशक्त भारत के निर्माण की आधारशिला है। “जब जनजातीय समाज सशक्त होगा, तभी भारत का भविष्य और अधिक उज्ज्वल और मजबूत होगा।





