किसानों की समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध सरकार, गेहूं पर 40 रुपये बोनस का ऐलान
मध्यप्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कहा है कि वर्ष 2026 को कृषि कल्याण वर्ष के रूप में आगे बढ़ाते हुए सरकार किसानों की समृद्धि के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इसी दिशा में राज्य सरकार ने गेहूं और उड़द उत्पादक किसानों के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में Bharatiya Kisan Sangh के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस बैठक में कृषि, राजस्व, सहकारिता, जल संसाधन और उद्यानिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ किसानों से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
गेहूं किसानों को मिलेगा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी Minimum Support Price पर किसानों को 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा।
इस निर्णय के बाद राज्य के किसानों को गेहूं की खरीदी पर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने संकल्प पत्र में वर्ष 2028 तक गेहूं की खरीदी 2700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने का लक्ष्य रखा है और आने वाले वर्षों में इस लक्ष्य को हासिल किया जाएगा।
उड़द खरीदी पर भी 600 रुपये बोनस
सरकार ने दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उड़द की खरीदी पर भी बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उड़द की खरीदी पर किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि वे दलहन फसलों की खेती को बढ़ावा दें, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ भी मिलेगा और राज्य में दलहन उत्पादन भी बढ़ेगा। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
गेहूं उपार्जन पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ी
बैठक के दौरान किसानों द्वारा गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन में आ रही समस्याओं का मुद्दा भी उठाया गया। इस पर मुख्यमंत्री ने त्वरित निर्णय लेते हुए गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाने की घोषणा की।
अब किसान 7 मार्च के बजाय 10 मार्च तक अपना पंजीयन करा सकेंगे। इससे उन किसानों को राहत मिलेगी जो तकनीकी या अन्य कारणों से समय पर पंजीयन नहीं कर पाए थे।
सिंचाई के लिए दिन में मिलेगी बिजली
मुख्यमंत्री ने किसानों की एक और बड़ी समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए दिन के समय बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।
अक्सर किसानों को रात के समय खेतों में जाकर सिंचाई करनी पड़ती है, जिससे दुर्घटनाओं और अन्य जोखिमों का खतरा बना रहता है। दिन में बिजली मिलने से किसानों को राहत मिलेगी और वे सुरक्षित तरीके से सिंचाई कर सकेंगे।
किसानों की समस्याओं पर हुई विस्तृत चर्चा
बैठक में किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। इनमें भूमि अधिग्रहण पर मुआवजा राशि बढ़ाने, जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान के मुआवजे, मंडी अधिनियम के प्रावधानों और फसल गिरदावरी जैसे विषय शामिल रहे। इसके अलावा अविवादित नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसी प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के सुझाव भी सामने आए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर किसानों के हित में आवश्यक कदम उठाए जाएं।
मध्यप्रदेश बना देश का फूड बास्केट
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के प्रमुख कृषि राज्यों में से एक है और इसे देश का “फूड बास्केट” कहा जाता है। राज्य में गेहूं, दलहन, तिलहन और सब्जियों का उत्पादन बड़ी मात्रा में होता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को आधुनिक तकनीक, सिंचाई सुविधाएं और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, ताकि किसान आर्थिक रूप से और मजबूत बन सकें।
किसान हितैषी नीतियों पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और उनके सुझावों को भी गंभीरता से लिया जाता है। भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सुझावों पर भी सरकार विचार करेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में भी किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए इसी तरह के किसान हितैषी फैसले लिए जाते रहेंगे।





