मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। तेल की कीमतें 8 प्रतिशत से दस प्रतिशत तक बढ सकती है। ईरान ने फरवरी के बीच में ही स्ट्रेट के कुछ हिस्सों को कुछ समय के लिए बंद कर दिया था, क्योंकि उसने कहा था कि यह एक मिलिट्री ड्रिल थी। अब इजराइल , अमेरिका और ईरान के बीच युद्द के चलते ये लंबे समय तक बंद रह सकते हैं।
रविवार को ही दिखने लगा असर
रविवार को जब मार्केट में ट्रेडिंग शुरू हुई तो तेल की कीमतें तेज़ी से बढ़ीं, क्योंकि ईरान पर U.S. और इज़राइल के हमलों और खाड़ी के आसपास इज़राइल और U.S. मिलिट्री ठिकानों पर जवाबी हमलों से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन में रुकावट आई।
इस बीच शेयर मार्केट में ट्रेडर्स अनुमान लगा रहे है कि ईरान और मिडिल ईस्ट में दूसरी जगहों से तेल की सप्लाई धीमी भी हो सकती है या रुक भी सकती है। पूरे इलाके में हमले, जिसमें फ़ारस की खाड़ी के पतले मुहाने, होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले दो जहाज़ भी शामिल हैं, देशों की बाकी दुनिया को तेल एक्सपोर्ट करने की क्षमता को रोक सकते हैं। एनर्जी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इससे कच्चे तेल और गैसोलीन की कीमतें बढ़ सकती हैं।
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट, जो अमेरिका में बनने वाला हल्का, मीठा कच्चा तेल है, रविवार रात लगभग $72 प्रति बैरल पर बिक रहा था, जो शुक्रवार को इसके लगभग $67 के ट्रेडिंग प्राइस से लगभग 8% ज़्यादा था।
रिस्टैड एनर्जी के अनुसार, हर दिन लगभग 15 मिलियन बैरल कच्चा तेल — जो दुनिया के तेल का लगभग 20% है — होर्मुज जलडमरूमध्य से भेजा जाता है, जिससे यह दुनिया का सबसे अहम तेल चोकपॉइंट बन जाता है। जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले टैंकर, जो उत्तर में ईरान से घिरा है, सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, UAE और ईरान से तेल और गैस ले जाते हैं।
फारस की खाडी पर जहाजों पर किया हमला
पूरे इलाके में हमले, जिसमें फारस की खाड़ी के पतले मुहाने, होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने वाले दो जहाज़ों पर हमले भी शामिल हैं, देशों की बाकी दुनिया को तेल एक्सपोर्ट करने की क्षमता को रोक सकते हैं। एनर्जी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इससे कच्चे तेल और गैसोलीन की कीमतें बढ़ने की संभावना है।
इससे पहले ज्यादा तेल उत्पादन पर बढोरती की थी योजना
इस बीच OPEC ऑयल कार्टेल का हिस्सा आठ देशों ने रविवार को घोषणा की कि वे कच्चे तेल का प्रोडक्शन बढ़ाएंगे। युद्ध शुरू होने से पहले प्लान की गई एक मीटिंग में, पेट्रोलियम एक्सपोर्ट करने वाले देशों के संगठन ने कहा कि वह अप्रैल में प्रोडक्शन में हर दिन 206,000 बैरल की बढ़ोतरी करेगा, जो एनालिस्ट्स की उम्मीद से ज़्यादा था। प्रोडक्शन बढ़ाने वाले देशों में सऊदी अरब, रूस, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कज़ाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान शामिल हैं।
आंक़ों के मुताबिक “दुनिया भर में तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है, अगर ऐसे में खाड़ी से तेल की आपूर्ति कम होती है, तो ज़्यादा प्रोडक्शन से तुरंत सीमित राहत मिलेगी। इसलिए ज्यादा प्रोडेक्शन पर जोर दिया जा रहा है।
ईरान हर दिन लगभग 1.6 मिलियन बैरल तेल एक्सपोर्ट करता है, वो भी ज़्यादातर चीन को, अगर ईरान का एक्सपोर्ट रुकता है तो चीन को सप्लाई के लिए कहीं और देखना पड़ सकता है। ऐसे में चीनी मार्केट के लिए तेल की आपूर्ति करना होगी और यह भी एक और वजह है जिससे एनर्जी की कीमतें बढ़ सकती हैं।





