कृषक कल्याण वर्ष में अनूठी पहल: नागलवाड़ी में होगी पहली कृषि केबिनेट
अन्नदाताओं के लिए जमीनी स्तर पर निर्णय
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि सरकार का संकल्प प्रदेश के किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और उनकी आय दोगुनी करना है। इसी उद्देश्य से कृषि केबिनेट सीधे गांव में आयोजित की जा रही है, ताकि निर्णय जमीनी हकीकत को ध्यान में रखकर लिए जा सकें। नागलवाड़ी से ही सरकार कृषि, सिंचाई, फसल बीमा, समर्थन मूल्य और जनजातीय क्षेत्रों में कृषि आधारित रोजगार को बढ़ावा देने से जुड़े अहम फैसले करेगी।
निमाड़ क्षेत्र के लिए निर्णायक कदम
करीब छह हजार की आबादी वाला नागलवाड़ी गांव जनजातीय बहुल क्षेत्र में स्थित है। यहां आयोजित होने वाली कृषि केबिनेट को केवल बड़वानी जिले ही नहीं, बल्कि पूरे निमाड़ क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि जनजातीय अंचलों में कृषि और वन आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त कर क्षेत्रीय असमानता को कम किया जा सकता है।
आस्था और परंपरा से जुड़ाव
नागलवाड़ी स्थित लगभग 800 वर्ष पुराने भिलट देव मंदिर का जनजातीय समाज में विशेष महत्व है। कृषि केबिनेट के बाद मुख्यमंत्री और पूरा मंत्रिमंडल मंदिर में दर्शन करेगा। यह कार्यक्रम न केवल प्रशासनिक, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किसानों और प्रबुद्धजनों से संवाद
कृषि केबिनेट के उपरांत मुख्यमंत्री किसानों और क्षेत्र के प्रबुद्धजनों से सीधा संवाद करेंगे। इस संवाद में प्रदेश सरकार की कृषि योजनाओं, समर्थन नीतियों और जनजातीय कल्याण कार्यक्रमों की जानकारी साझा की जाएगी। साथ ही किसानों से सुझाव लेकर भविष्य की योजनाओं को और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम स्थल पर कृषि आधारित विकास और जनजातीय उत्थान से संबंधित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें आधुनिक खेती तकनीक, जैविक कृषि, ड्रिप सिंचाई और मूल्य संवर्धन से जुड़े मॉडल प्रदर्शित किए जाएंगे।
भगोरिया हाट में सहभागिता
मंत्रि-परिषद के सदस्य जुलवानिया में आयोजित पारंपरिक भगोरिया हाट में भी शामिल होंगे। भगोरिया जनजातीय समाज का महत्वपूर्ण उत्सव है, जिसमें पारंपरिक नृत्य, वेशभूषा और लोक-संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। सरकार का यह कदम जनजातीय समाज के साथ आत्मीय जुड़ाव का संदेश देता है।
ग्रामीण विकास की नई दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि गांव में आयोजित यह कृषि केबिनेट प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। इससे न केवल किसानों को सीधे निर्णय प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा, बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और प्रभावशीलता भी बढ़ेगी। कुल मिलाकर, नागलवाड़ी में होने जा रही कृषि केबिनेट किसान कल्याण वर्ष का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है। इससे सरकार के उस संकल्प को बल मिलेगा, जिसमें प्रदेश के अन्नदाताओं को सशक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के नागलवाड़ी गांव में सतपुड़ा की पहाड़ियों पर स्थित 800 वर्ष प्राचीन भिलट देव शिखरधाम आस्था और परंपरा का अनूठा संगम है। यह पवित्र स्थल मुख्य गांव से लगभग 4 किलोमीटर दूर पहाड़ी शिखर पर स्थित है। हर वर्ष नागपंचमी के अवसर पर यहां सात दिवसीय भव्य मेला (जात्रा) आयोजित होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
स्थान और ऐतिहासिक महत्व
नागलवाड़ी, बड़वानी जिले का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। दुर्गम पहाड़ी रास्तों से होकर श्रद्धालु मंदिर तक पहुंचते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह धाम लगभग 800 साल पुराना है और आदिवासी परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। भिलट देव को नागों का रक्षक और न्यायाधीश माना जाता है। इसी कारण इस स्थान को “नागों की अदालत” भी कहा जाता है।
नागपंचमी पर सात दिवसीय मेला
नागपंचमी के अवसर पर यहां विशेष सात दिवसीय मेला लगता है। इस दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मेले के दौरान पहाड़ी मार्ग पर भक्तों की लंबी कतारें दिखाई देती हैं। वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।
यहां आने वाले श्रद्धालु मानते हैं कि भिलट देव सर्पदंश से रक्षा करते हैं और नाग देवता के प्रकोप से मुक्ति दिलाते हैं।
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मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त दूध, नारियल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं।
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सर्पदंश से पीड़ित लोग यहां आकर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
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कई परिवार पीढ़ियों से यहां मन्नत मांगने और पूरी होने पर धन्यवाद अर्पित करने आते हैं।
स्थानीय आदिवासी समुदाय के लिए यह स्थल सांस्कृतिक पहचान का भी केंद्र है।
आध्यात्म और प्रकृति का संगम
सतपुड़ा की हरियाली और ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित यह धाम प्राकृतिक सौंदर्य से भी भरपूर है। सुबह और शाम के समय यहां का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है। नागपंचमी के दौरान मंदिर परिसर में दीपों और ध्वजों से सजी सजावट श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक अनुभव कराती है। भिलट देव शिखरधाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और प्रकृति का अद्भुत संगम है। नागपंचमी पर यहां लगने वाला मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करता है। “नागों की अदालत” के रूप में प्रसिद्ध यह धाम आज भी हजारों लोगों की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है, जहां भक्त सर्प भय से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति की कामना लेकर पहुंचते हैं। (प्रकाश कुमार पाण्डेय)




