उत्तर प्रदेश में कुपोषण पर ‘डिजिटल’ प्रहार
योगी आदित्यनाथ सरकार की ‘हॉट कुक्ड मील’ योजना से लाखों बच्चों को मिल रहा गरम भोजन
विकसित प्रदेश की मजबूत नींव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि “स्वस्थ बचपन ही विकसित उत्तर प्रदेश की बुनियाद है।” बाल्यावस्था में पोषण की कमी न केवल शारीरिक विकास को प्रभावित करती है, बल्कि मानसिक और शैक्षिक प्रगति में भी बाधा बनती है। इसी सोच के साथ ‘हॉट कुक्ड मील’ योजना को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल किया गया। योजना के क्रियान्वयन के बाद प्रदेश के कई जिलों से बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार और वजन वृद्धि के सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। इससे स्पष्ट है कि सरकार की यह पहल जमीनी स्तर पर असर दिखा रही है।
300 दिन पोषण की पक्की गारंटी
योजना के अंतर्गत वर्ष में 300 दिन पूरक पोषण सुनिश्चित किया गया है। हर महीने 25 दिन बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताजा गर्म भोजन परोसा जाता है। प्रति लाभार्थी प्रतिदिन 4.50 रुपये की दर से बजट निर्धारित किया गया है, जिससे भोजन की गुणवत्ता और नियमितता बनी रहे। सरकार ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल मॉनिटरिंग से जोड़ा है। लाभार्थियों की उपस्थिति, भोजन वितरण और पोषण की स्थिति का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज किया जाता है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई संभव हो सकी है।
अयोध्या से हुई शुरुआत, पूरे प्रदेश में विस्तार
इस महत्वाकांक्षी योजना का औपचारिक शुभारंभ अगस्त 2022 में धर्मनगरी अयोध्या से किया गया था। शुरुआती चरण में कुछ जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे लागू किया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तर प्रदेश में विस्तारित कर दिया गया। आज प्रदेश के सभी जिलों में आंगनबाड़ी केंद्रों पर यह व्यवस्था प्रभावी रूप से संचालित हो रही है। इससे न केवल बच्चों को पोषण मिल रहा है, बल्कि अभिभावकों का भरोसा भी आंगनबाड़ी व्यवस्था पर मजबूत हुआ है।
नामांकन और उपस्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि
‘हॉट कुक्ड मील’ योजना का सबसे बड़ा प्रभाव आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के नामांकन और उपस्थिति में देखने को मिला है। पहले जहां कई अभिभावक बच्चों को नियमित रूप से केंद्र भेजने में रुचि नहीं लेते थे, वहीं अब गरम और पौष्टिक भोजन मिलने की वजह से उपस्थिति में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित भोजन से बच्चों की एकाग्रता और सीखने की क्षमता भी बेहतर होती है, जिससे उनकी प्रारंभिक शिक्षा की नींव मजबूत होती है।
डिजिटल निगरानी से जवाबदेही सुनिश्चित
उत्तर प्रदेश सरकार ने योजना के प्रभावी संचालन के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लिया है। पोषण ट्रैकिंग, लाभार्थियों की पहचान और फंड उपयोग की जानकारी को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है, बल्कि वास्तविक जरूरतमंद बच्चों तक लाभ पहुंचाने में भी आसानी हुई है। डिजिटल मॉनिटरिंग की वजह से जिला स्तर पर अधिकारियों को नियमित रिपोर्ट मिलती है, जिससे सुधार की संभावनाओं पर तुरंत काम किया जा सकता है।
महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा
इस योजना के संचालन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। भोजन तैयार करने और वितरण की प्रक्रिया में स्थानीय महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, जिससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं। इस प्रकार यह योजना केवल बच्चों के पोषण तक सीमित नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है।
स्वस्थ बचपन से विकसित उत्तर प्रदेश की ओर
‘हॉट कुक्ड मील’ योजना ने यह साबित किया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शी तरीके से किया जाए, तो सामाजिक बदलाव संभव है। 36 लाख से अधिक बच्चों तक प्रतिदिन गरम भोजन पहुंचाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। उत्तर प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ यह डिजिटल और जमीनी प्रहार भविष्य की पीढ़ी को स्वस्थ, सशक्त और सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। स्वस्थ बचपन ही विकसित प्रदेश की मजबूत नींव है, और योगी सरकार की यह पहल उसी लक्ष्य की ओर बढ़ता हुआ एक निर्णायक कदम साबित हो रही है।





