भारत के तेजी से विस्तार कर रहे अंतरिक्ष इकोसिस्टम को साइबर खतरों से सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया गया है। इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) और सैटकॉम इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SIA-India) ने मिलकर देश के पूरे स्पेस सेक्टर के लिए व्यापक साइबर सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन गाइडलाइंस को नई दिल्ली में 24 से 26 फरवरी के बीच आयोजित DefSat Conference & Expo 2026 के दौरान सार्वजनिक किया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर आपदा प्रबंधन तक, स्पेस सिस्टम की भूमिका को देखते हुए उठाया गया कदम
नई गाइडलाइंस इस बात को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं कि आज सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम केवल संचार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, नेविगेशन, ब्रॉडकास्टिंग और डिजिटल कनेक्टिविटी की रीढ़ बन चुके हैं। इसी वजह से यह फ्रेमवर्क सैटेलाइट ऑपरेटर्स, ग्राउंड स्टेशन कंट्रोलर्स, उपकरण निर्माता, प्राइवेट स्पेस कंपनियां और सरकारी एजेंसियों—सभी को कवर करता है।
सिर्फ सैटेलाइट नहीं, पूरी सप्लाई चेन और ग्राउंड इन्फ्रास्ट्रक्चर रहेगा सुरक्षित
CERT-In के महानिदेशक डॉ. संजय बहल ने कहा कि यह दस्तावेज “डिफेंस इन डेप्थ, ब्रेथ और हाइट” के सिद्धांत पर आधारित है। उनका कहना था कि उद्देश्य केवल अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स को सुरक्षित करना नहीं है, बल्कि उनसे जुड़े ग्राउंड नेटवर्क, सप्लाई चेन और कम्युनिकेशन सिस्टम को भी साइबर हमलों से बचाना है, क्योंकि आज के साइबर अटैक पहले से कहीं ज्यादा जटिल और संगठित हो चुके हैं।
पब्लिक-प्राइवेट साझेदारी का मजबूत मॉडल, इंडस्ट्री की भूमिका अहम
SIA-India के अध्यक्ष डॉ. सुब्बा राव पवुलुरी ने इस पहल को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का बेहतरीन उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस गाइडलाइन में इंडस्ट्री के व्यावहारिक अनुभव और CERT-In की तकनीकी विशेषज्ञता का संतुलित मेल है, जिससे उभरते डिजिटल खतरों के खिलाफ भारत की तैयारी और मजबूत होगी।
स्पष्ट जिम्मेदारियां, लचीला ढांचा और समय-समय पर अपडेट की व्यवस्था
यह एडवाइजरी फ्रेमवर्क साइबर सुरक्षा के मूल सिद्धांतों, बेस्ट प्रैक्टिसेज और सभी हितधारकों की स्पष्ट जिम्मेदारियों को परिभाषित करता है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह बदलती तकनीकों और नए खतरों के अनुसार खुद को अपडेट करता रहे। इसके लिए इंडस्ट्री के साथ नियमित परामर्श की व्यवस्था भी की गई है।
ऑपरेशन सिंदूर के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता, साइबर सुरक्षा बनी मिशन की बुनियाद
SIA-India के महानिदेशक अनिल प्रकाश ने बताया कि हाल के वर्षों में भारत के क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर साइबर हमलों में तेज़ उछाल देखा गया है। उनके अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ही 15 लाख से ज्यादा साइबर अटैक प्रयास दर्ज किए गए, जबकि सरकारी नेटवर्क पर हमले करीब सात गुना बढ़ गए। उन्होंने साफ कहा कि अब अंतरिक्ष क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को “आफ्टरथॉट” नहीं, बल्कि मिशन एश्योरेंस का मूल स्तंभ बनाना होगा।
‘Secure-by-Design’ अपनाने पर जोर, नवाचार के साथ सुरक्षा अनिवार्य
नई गाइडलाइंस में स्पेस कंपनियों से अपील की गई है कि वे Secure-by-Design आर्किटेक्चर को अपनाएं, ताकि सुरक्षा को शुरुआत से ही सिस्टम का हिस्सा बनाया जा सके। साथ ही, इनोवेशन को राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकताओं के साथ जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया है। पूरी गाइडलाइंस CERT-In की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।





