देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक बेहद अहम टिप्पणी करते हुए साफ कर दिया कि किसी भी समुदाय को धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र के आधार पर नीचा दिखाना सीधे तौर पर संविधान का उल्लंघन है। अदालत ने विशेष रूप से संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं और मंत्रियों को चेताया कि उनके शब्दों का समाज पर गहरा असर पड़ता है, इसलिए उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी और संयम के साथ बोलना चाहिए।
संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए अदालत की दो टूक चेतावनी
न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां ने अपने अलग फैसले में कहा कि चाहे सरकार हो या कोई निजी व्यक्ति, किसी भी माध्यम—भाषण, मीम, कार्टून, कला या फिल्म—के जरिए किसी समुदाय को बदनाम करना संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों के बीच भाईचारे और सम्मान की भावना की रक्षा करता है।
‘घूसखोर पंडित’ विवाद के बहाने दोहराए गए संवैधानिक सिद्धांत
यह टिप्पणी हिंदी फिल्म घूसखोर पंडित से जुड़े विवाद की सुनवाई के दौरान सामने आई। यह फिल्म Netflix पर रिलीज होने वाली थी और इसके शीर्षक को लेकर सोशल मीडिया पर यह आरोप लगे कि इससे एक विशेष समुदाय की छवि खराब होती है। बाद में फिल्म निर्माताओं ने अदालत को बताया कि वे फिल्म का नाम बदलने को तैयार हैं, जिसके बाद मामला समाप्त कर दिया गया।
फिल्म विवाद से आगे बढ़कर अदालत ने समाज को दिया बड़ा संदेश
फैसले में न्यायमूर्ति भुइयां ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सिर्फ एक फिल्म तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में किसी भी तरह की गलतफहमी से बचने के लिए संवैधानिक मूल्यों को दोहराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं कि किसी समूह की गरिमा को ठेस पहुंचाई जाए।
हेट स्पीच मामलों की पृष्ठभूमि में टिप्पणी का खास महत्व
अदालत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हाल ही में हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ कथित नफरत भरे बयानों को लेकर दायर याचिकाएं खारिज की गई थीं। कोर्ट ने उस मामले में पुलिस केस और SIT जांच की मांग स्वीकार नहीं की थी, लेकिन अब यह स्पष्ट कर दिया कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बेहद जरूरी है।
फिल्म से जुड़ी जानकारी भी आई सामने
इस फिल्म का निर्देशन नीरज पांडे ने किया है और इसमें अभिनेता मनोज बाजपेयी प्रमुख भूमिका में नजर आने वाले हैं। विवाद के बावजूद कोर्ट ने यह साफ किया कि रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन होना चाहिए।





