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विवादों में रहने वाले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जानें इस मुस्लिम विधायक से क्यों हुए प्रसन्न

DigitalDesk by DigitalDesk
February 20, 2026
in धर्म, भोपाल, मध्य प्रदेश, मुख्य समाचार, राजनीति, शहर और राज्य, संपादक की पसंद
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Shankaracharya Avimukteshwaranand Saraswati
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मध्यप्रदेश की सियासत में उस समय नई चर्चा शुरू हो गई जब कांग्रेस के अल्पसंख्यक विधायक आतिफ अकील ने विधानसभा में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का अशासकीय संकल्प पेश किया। इस पहल को धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से बड़ा कदम माना जा रहा है। खास बात यह रही कि इस प्रस्ताव को जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का खुला समर्थन मिल गया, जिससे यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है। विधानसभा में लाए गए इस संकल्प में केवल गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग ही नहीं, बल्कि गोमाता के निधन के बाद सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात भी शामिल है। विधायक आतिफ अकील ने इसे सामाजिक समरसता और भारतीय परंपरा से जुड़ा विषय बताते हुए सभी दलों के विधायकों से समर्थन की अपील की है।

आतिफ अकील के संकल्प पर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का समर्थन

विधानसभा में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग
भोपाल की राजनीति में हलचल
मुस्लिम विधायक आतिफ अकील से खुश हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती.
शंकराचार्य का स्पष्ट संदेश
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस संकल्प का समर्थन करते हुए कहा कि यह विषय आस्था और संस्कृति से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वयं को हिंदू कहने वाले विधायकों को इस दिशा में पहल करनी चाहिए थी, लेकिन यह सराहनीय है कि यह पहल एक अल्पसंख्यक विधायक ने की है। उन्होंने कहा, “सभी विधायकों को इस संकल्प को पारित कराने के लिए आगे आना चाहिए। यदि यह संकल्प पास नहीं होता है तो यह हिंदुओं के लिए कलंक समान होगा। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि कई बार जिनसे अपेक्षा होती है, वे आगे नहीं आते, और जिनसे आशा नहीं होती, वे हृदय के निकट खड़े दिखाई देते हैं। उनके इस वक्तव्य को आतिफ अकील की पहल की प्रशंसा के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं

इस मुद्दे पर सियासी गलियारों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां एक ओर कुछ विधायक इस प्रस्ताव को सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ा बताते हुए समर्थन देने की बात कर रहे हैं, वहीं कुछ का मानना है कि राष्ट्रीय पशु घोषित करने का विषय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि, अशासकीय संकल्प के माध्यम से राज्य विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया जाना अपने आप में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि गाय संरक्षण का मुद्दा अभी भी राजनीति और समाज दोनों में प्रभावी है।

सामाजिक समरसता का संदेश

आतिफ अकील द्वारा इस तरह का प्रस्ताव लाना सामाजिक समरसता के संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। एक अल्पसंख्यक समुदाय के विधायक द्वारा गोमाता से जुड़ा संकल्प पेश करना राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर सामूहिक सहमति बनाई जा सकती है।  विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकल्प पारित होता है तो यह प्रतीकात्मक रूप से बड़ा निर्णय होगा। हालांकि राष्ट्रीय पशु घोषित करने का अधिकार संसद के पास है, लेकिन राज्य विधानसभा का प्रस्ताव इस दिशा में राजनीतिक दबाव बना सकता है।
अब नजरें विधानसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं कि इस संकल्प पर चर्चा कब होती है और कितने विधायक इसका समर्थन करते हैं। यदि व्यापक समर्थन मिलता है तो यह प्रदेश की राजनीति में एक नई मिसाल बन सकता है। फिलहाल, भोपाल की राजनीति में यह मुद्दा गर्माया हुआ है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यह विषय केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा में इस संकल्प को कितना समर्थन मिलता है और क्या यह प्रस्ताव पारित हो पाता है या नहीं। इतना तय है कि इस पहल ने मध्यप्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।
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Tags: #Shankaracharya Avimukteshwaranand Saraswati
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