बेमौसम बारिश ने बढ़ाई किसानों की मुसीबत, मुआवजे का भरोसा
मध्य प्रदेश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। फरवरी में तीसरी बार बदले मौसम ने रबी की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई जिलों में तेज आंधी और ओलों के साथ हुई बारिश ने खेतों में खड़ी गेहूं, चना, सरसों, प्याज और अफीम की फसलों को बर्बाद कर दिया। अचानक बदले मौसम ने जहां आमजन को गर्मी से राहत दी, वहीं किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा दीं।
राज्य के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने प्रभावित किसानों को भरोसा दिलाया है कि सरकार इस संकट की घड़ी में उनके साथ है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत सर्वे कर फसलों के नुकसान का आकलन किया जाए। विभागीय टीमें खेतों का दौरा कर रही हैं ताकि वास्तविक क्षति का आंकड़ा सामने लाया जा सके और किसानों को उचित मुआवजा दिलाया जा सके।
कई जिलों में बरसे बादल
मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों में मध्य प्रदेश के 25 जिलों में बारिश दर्ज की गई। इनमें भोपाल, इंदौर, उज्जैन, धार, श्योपुर, शिवपुरी, आगर-मालवा, राजगढ़, खरगोन, मुरैना, सीहोर, दतिया, ग्वालियर, गुना, रतलाम, बड़वानी, मंदसौर, शाजापुर, देवास, विदिशा, अशोकनगर, टीकमगढ़, निवाड़ी और छतरपुर शामिल हैं। श्योपुर के नालछा क्षेत्र में करीब एक इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई। आंधी की रफ्तार कई स्थानों पर 60 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक रही। भोपाल, सीहोर और आगर में 37 किमी प्रतिघंटा की गति से हवाएं चलीं, जबकि शाजापुर, गुना और राजगढ़ में भी तेज आंधी दर्ज की गई।
खेतों में बिछ गई फसल
तेज हवा और ओलों के कारण कई जगह खेतों में खड़ी फसलें आड़ी हो गईं। गेहूं की बालियां झुक गईं, चने की फसल जमीन से चिपक गई और सरसों की फलियां टूट गईं। मंदसौर और नीमच में अफीम और धनिया की फसल को भी नुकसान की खबरें हैं। सीहोर जिले में रबी की फसलें पककर तैयार थीं। कई किसानों ने कटाई शुरू कर दी थी, जबकि कुछ खेतों में फसल कटने की तैयारी थी। ऐसे में अचानक हुई बारिश ने महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। किसान अब सरकार से शीघ्र मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
फरवरी में तीसरी बार बदला मौसम
फरवरी माह में यह तीसरी बार है जब प्रदेश में ओले और बारिश का दौर चला है। मौसम विभाग के अनुसार एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में अस्थिरता बनी हुई है। खजुराहो प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजगढ़ में पारा 10 डिग्री और पचमढ़ी में 10.2 डिग्री तक पहुंच गया। तापमान में गिरावट ने ठंड का असर बढ़ा दिया है।
किसान बोले—“अब सरकार ही सहारा”
मंदसौर और सीहोर के किसानों का कहना है कि ओलावृष्टि से गेहूं, टमाटर, धनिया, चना और अफीम की फसल को गंभीर नुकसान हुआ है। कई खेतों में पानी भर गया है, जिससे दानों की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। किसान संगठनों ने मांग की है कि नुकसान का आंकलन तेजी से कर मुआवजा राशि सीधे किसानों के खातों में डाली जाए।
सरकार का आश्वासन
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सर्वे रिपोर्ट आने के बाद प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत दी जाएगी। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि पारदर्शी तरीके से सर्वे कर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए। सरकार का कहना है कि किसानों को किसी भी स्थिति में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और राहत कार्यों में तेजी लाई जाएगी। बेमौसम बारिश ने जहां मौसम का मिजाज ठंडा किया, वहीं किसानों के लिए यह आफत बनकर आई है। अब सबकी निगाहें सरकार की राहत नीति और मुआवजा प्रक्रिया पर टिकी हैं।
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