MP पुलिस भर्ती में तीन बार होगी अभ्यर्थियों की E-KYC…फर्जीवाड़ा रोकने सरकार का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश में पुलिस भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। 23 फरवरी से 13 मार्च के बीच होने वाली 7500 आरक्षक (कांस्टेबल) पदों की भर्ती में इस बार अभ्यर्थियों की तीन चरणों में ई-केवाईसी (आधार आधारित इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन) की जाएगी। सरकार का उद्देश्य पिछले भर्ती चक्र में सामने आए फर्जीवाड़े को पूरी तरह रोकना है, जिसमें आधार कार्ड में हेरफेर और लिखित परीक्षा में साल्वर बैठाने जैसे गंभीर मामले उजागर हुए थे।
ऑनलाइन परीक्षा के साथ तीन बार ई-केवाईसी
पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया के हर महत्वपूर्ण चरण के बाद अभ्यर्थियों की आधार आधारित ई-केवाईसी की जाएगी। इसमें फोटो, फिंगरप्रिंट और अन्य बायोमेट्रिक विवरण का मिलान किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में वही अभ्यर्थी उपस्थित हो, जिसने आवेदन किया है और लिखित परीक्षा दी है।
इस बार की व्यवस्था के तहत—
- लिखित परीक्षा के समय ई-केवाईसी,
- लिखित परीक्षा परिणाम के बाद शारीरिक परीक्षा से पूर्व सत्यापन,
- शारीरिक परीक्षा और अंतिम चयन से पहले अंतिम ई-केवाईसी की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि तीन स्तरीय सत्यापन से पहचान की अदला-बदली या साल्वर गैंग की भूमिका लगभग असंभव हो जाएगी।
पिछली भर्ती में सामने आया था बड़ा घोटाला
दरअसल, 30 अक्टूबर से 15 दिसंबर 2025 के बीच प्रदेशभर में आरक्षक भर्ती की ऑनलाइन लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। 25 जनवरी को घोषित परिणाम में लगभग 53 हजार अभ्यर्थी सफल घोषित हुए। इन्हें शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र जारी किए गए हैं। लेकिन पिछली भर्ती प्रक्रिया में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए थे। जांच में सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों ने आधार कार्ड में फर्जीवाड़ा कर अपने स्थान पर दूसरे व्यक्ति—जिसे ‘साल्वर’ कहा जाता है—को लिखित परीक्षा में बैठाया। इसके लिए परीक्षा से ठीक पहले आधार कार्ड में फोटो और फिंगरप्रिंट अपडेट कराए गए। लिखित परीक्षा में सफल होने के बाद शारीरिक परीक्षा के समय फिर आधार विवरण बदलकर मूल अभ्यर्थी को उपस्थित कराया गया। इस तरह दो अलग-अलग व्यक्तियों ने एक ही अभ्यर्थी की पहचान का उपयोग कर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित किया।
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सबसे ज्यादा मामले
जांच एजेंसियों के अनुसार सबसे अधिक संदिग्ध और फर्जी अभ्यर्थी ग्वालियर और चंबल अंचल से पाए गए। फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद ग्वालियर में चार और शिवपुरी में तीन एफआईआर दर्ज की गईं। हालांकि पुलिस अब तक इस संगठित गैंग की जड़ तक पूरी तरह नहीं पहुंच सकी है। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क में कुछ तकनीकी जानकार और दस्तावेज अपडेट कराने वाले एजेंट भी शामिल थे, जो परीक्षा से पहले आधार विवरण में बदलाव कराने में मदद करते थे। इस संगठित तरीके से की गई धोखाधड़ी ने पूरी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए थे।
इस बार क्यों है सख्ती?
राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय का मानना है कि पुलिस जैसी संवेदनशील सेवा में किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जी भर्ती कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसलिए इस बार तकनीकी निगरानी और बायोमेट्रिक सत्यापन को अधिक मजबूत किया गया है। ई-केवाईसी के दौरान आधार डेटाबेस से सीधा मिलान होगा और प्रत्येक चरण पर डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक मशीनों की संख्या बढ़ाई गई है और निगरानी के लिए विशेष तकनीकी टीमों की तैनाती की जाएगी।
शारीरिक परीक्षा गर्मी से पहले
चयनित 53 हजार अभ्यर्थियों की शारीरिक दक्षता परीक्षा 23 फरवरी से 13 मार्च के बीच आयोजित की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा को गर्मी शुरू होने से पहले संपन्न कराने की योजना है ताकि अभ्यर्थियों को असुविधा न हो। शारीरिक परीक्षा के दौरान भी बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य रहेगा। दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद और अन्य निर्धारित मानकों की वीडियोग्राफी कराई जाएगी ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।
पारदर्शिता पर सरकार का जोर
गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार सरकार की प्राथमिकता है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष हो। पिछले घटनाक्रम से मिली सीख के आधार पर इस बार बहुस्तरीय निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और कड़ी जांच व्यवस्था लागू की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि तीन बार ई-केवाईसी जैसी व्यवस्था भविष्य में अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी मॉडल बन सकती है। इससे न केवल फर्जीवाड़ा रुकेगा, बल्कि ईमानदार अभ्यर्थियों का भरोसा भी मजबूत होगा।
मध्य प्रदेश में 7500 आरक्षक पदों की भर्ती प्रक्रिया इस बार सख्त निगरानी के बीच आयोजित की जाएगी। तीन चरणों में ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन से पहचान में हेरफेर की संभावना लगभग समाप्त करने की कोशिश की गई है। सरकार का दावा है कि इस कदम से भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ेगी और योग्य अभ्यर्थियों को निष्पक्ष अवसर मिलेगा। अब देखना होगा कि नई तकनीकी व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है, लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट है कि पुलिस भर्ती में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने इस बार कोई कसर नहीं छोड़ी है।




