कानपुर के बिठूर क्षेत्र से सामने आए दिल दहला देने वाले मामले में योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। ब्रह्मनगर स्थित राजा नर्सिंग होम में NICU के अंदर वार्मर मशीन में आग लगने से नवजात बच्ची की जलकर मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद नर्सिंग होम का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है, अस्पताल को सील कर दिया गया है और डॉक्टरों के खिलाफ FIR भी दर्ज कर ली गई है।
कानपुर NICU हादसा: नवजात की मौत पर योगी सरकार सख्त
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अवैध NICU पर प्रशासनिक कार्रवाई
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वार्मर मशीन बनी मौत
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नर्सिंग होम सील, FIR
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सुरक्षा मानकों की अनदेखी
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दोषियों पर कड़ी कार्रवाई
यह दर्दनाक हादसा उस समय हुआ जब नवजात बच्ची को NICU में वार्मर मशीन में रखा गया था। अचानक मशीन में आग लग गई और देखते ही देखते आग ने बच्ची को अपनी चपेट में ले लिया। अस्पताल स्टाफ आग पर समय रहते काबू नहीं पा सका, जिससे नवजात की मौके पर ही मौत हो गई। यह बच्ची अपने माता-पिता की पहली संतान थी, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
घटना के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल जांच के आदेश दिए। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी की अगुवाई में जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले थे। रिपोर्ट के अनुसार राजा नर्सिंग होम का सामान्य पंजीकरण तो था, लेकिन NICU यूनिट संचालित करने की अनुमति कभी नहीं ली गई थी। इसके बावजूद अस्पताल में अवैध रूप से NICU चलाई जा रही थी, जो सीधे तौर पर कानून और मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ है।
समाप्त हो चुकी थी अग्निशमन यंत्रों की वैधता अवधि
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि NICU में लगी वार्मर मशीन और अन्य उपकरणों का नियमित तकनीकी परीक्षण नहीं कराया गया था। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि अस्पताल में मौजूद अग्निशमन यंत्रों की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी। यानी आग लगने की स्थिति में अस्पताल के पास प्रभावी सुरक्षा इंतजाम नहीं थे। यह लापरवाही ही नवजात की मौत का बड़ा कारण मानी जा रही है।
इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर ही अवैध NICU यूनिट को सील कर दिया। इसके साथ ही राजा नर्सिंग होम (पंजीकरण संख्या RMEE2122829) का पंजीकरण भी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया। अस्पताल को पूरी तरह बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं। नर्सिंग होम प्रबंधन को तीन कार्य दिवसों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का नोटिस भी दिया गया है। चेतावनी दी गई है कि आदेशों की अवहेलना करने पर और भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
लापरवाही और अवैध संचालन ने ली मासूम बच्ची की जान
इस मामले में आपराधिक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। पीड़ित परिजनों की तहरीर के आधार पर बिठूर थाने में अस्पताल से जुड़े डॉक्टरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। घटना के बाद पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही और अवैध संचालन ने उनकी मासूम बच्ची की जान ले ली। परिवार ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा दर्द न झेलना पड़े।
यह मामला निजी नर्सिंग होम्स में चल रही लचर व्यवस्था और नियमों की खुलेआम अनदेखी को उजागर करता है। बिना अनुमति NICU संचालन, एक्सपायर्ड अग्निशमन उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी जैसी समस्याएं मरीजों की जान के लिए बड़ा खतरा बन चुकी हैं। स्वास्थ्य विभाग अब राजा नर्सिंग होम की अन्य फाइलें भी खंगाल रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पहले भी नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। स्थिति को देखते हुए अस्पताल परिसर में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। स्वास्थ्य विभाग की टीम अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है, जिसमें तकनीकी खामियों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ एक नर्सिंग होम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिले के अन्य निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स की भी सघन जांच की जाएगी।
योगी सरकार की इस त्वरित कार्रवाई को एक कड़ा संदेश माना जा रहा है कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। यह हादसा भले ही एक परिवार की निजी त्रासदी हो, लेकिन इसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि मासूम की मौत के जिम्मेदारों को कितना सख्त दंड मिलता है।





