फैज-ए-इलाही मस्जिद विवाद: बुलडोजर एक्शन से लेकर तुर्कमान गेट हिंसा तक, पूरी कहानी परत-दर-परत
दिल्ली के ऐतिहासिक तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद को लेकर उठा विवाद बीते कुछ दिनों में कानून-व्यवस्था, न्यायिक प्रक्रिया और सामाजिक संतुलन से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई हिंसा ने न सिर्फ राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाओं का भी तूफान खड़ा कर दिया। आइए पूरे घटनाक्रम को क्रमवार और विस्तार से समझते हैं।
विवाद की शुरुआत: हाईकोर्ट का आदेश
इस पूरे मामले की शुरुआत 12 नवंबर 2025 को हुई, जब दिल्ली हाईकोर्ट की एक बेंच ने एक अहम आदेश पारित किया। कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) और लोक निर्माण विभाग (PWD) को निर्देश दिया कि तुर्कमान गेट के पास रामलीला मैदान क्षेत्र में मौजूद अवैध अतिक्रमण हटाए जाएं। कोर्ट के अनुसार, करीब 38,940 वर्ग फीट इलाके में अतिक्रमण था। इसमें सड़क का हिस्सा, फुटपाथ, एक बारात घर, पार्किंग क्षेत्र और एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर शामिल थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि ये सभी निर्माण सार्वजनिक भूमि पर हैं और इन्हें हटाने के लिए प्रशासन को तीन महीने का समय दिया गया।
MCD की प्रक्रिया और सुनवाई
कोर्ट के आदेश के बाद MCD ने दावा किया कि उसने जल्दबाजी नहीं की। प्रशासन ने प्रभावित पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया। 24 नवंबर और 16 दिसंबर 2025 को व्यक्तिगत सुनवाई (Personal Hearing) रखी गई, जिसमें
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सैयद फैज-ए-इलाही मस्जिद की मैनेजमेंट कमेटी
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दिल्ली वक्फ बोर्ड
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DDA
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L&DO
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राजस्व विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद MCD ने 22 दिसंबर 2025 को अतिक्रमण हटाने का अंतिम फैसला लिया।
बुलडोजर एक्शन की शुरुआत
कोर्ट के आदेश के तहत 7 जनवरी 2026 की आधी रात से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। MCD इस अभियान में 17 बुलडोज़र लेकर उतरी। प्रशासन का दावा था कि कार्रवाई सिर्फ अवैध निर्माण पर हो रही है और मस्जिद के ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।
हिंसा कैसे भड़की?
हालात तब बिगड़ गए जब 6-7 जनवरी की देर रात इलाके में अचानक भारी भीड़ जमा हो गई। करीब 2000 से ज्यादा लोग मौके पर पहुंच गए। पहले नारेबाजी हुई और फिर देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई। भीड़ ने पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसमें कम से कम 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए। घायल पुलिसकर्मियों में
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हेड कांस्टेबल जय सिंह
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कांस्टेबल विक्रम
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कांस्टेबल रवींद्र
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कांस्टेबल संदीप
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एक SHO
शामिल हैं। कांस्टेबल विक्रम के सिर में गंभीर चोट आई।
आंसू गैस का इस्तेमाल
जब हालात काबू से बाहर हो गए, तो पुलिस और अर्धसैनिक बलों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। यह पहली बार था जब राजधानी दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में—करीब 4 से 5 दर्जन आंसू गैस के गोले—इस्तेमाल किए गए। इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आई और इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया।
मस्जिद पक्ष की कानूनी लड़ाई
इधर, फैज-ए-इलाही मस्जिद की मैनेजमेंट कमेटी ने MCD के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। कोर्ट ने इस पर
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MCD
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DDA
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शहरी विकास मंत्रालय
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L&DO
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दिल्ली वक्फ बोर्ड
को नोटिस जारी करते हुए चार हफ्तों में हलफनामा दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल 2026 को होगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस पूरे विवाद पर सियासत भी तेज हो गई।
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AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि पूरी जमीन वक्फ संपत्ति है और वक्फ को इस मामले में पार्टी नहीं बनाया गया। उन्होंने दिल्ली वक्फ बोर्ड और मैनेजमेंट कमेटी से सुप्रीम कोर्ट जाने और स्टेटस-क्वो का आदेश लेने की अपील की।
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कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि मस्जिद सुरक्षित है और कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यह सामाजिक संवेदनशीलता का मामला था, इसलिए कार्रवाई से पहले संवाद होना चाहिए था।
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केरल के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए आपातकाल के दौर की याद दिलाने वाला कदम करार दिया।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
दिल्ली पुलिस ने चांदनी महल थाना में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह FIR दंगा, सरकारी कर्मचारी पर हमला और सरकारी काम में बाधा डालने जैसी गंभीर धाराओं में दर्ज हुई है।
सेंट्रल दिल्ली के पुलिस आयुक्त मधुर वर्मा के अनुसार,
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5 को गिरफ्तार किया गया
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कुल 10 लोगों को हिरासत में लिया गया
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30 पत्थरबाजों की पहचान हो चुकी है
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करीब 50 संदिग्धों पर जांच चल रही है
मामले की गंभीरता को देखते हुए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया है। अलग-अलग टीमें पत्थरबाजों की पहचान और सोशल मीडिया पर फैले भड़काऊ कंटेंट की जांच कर रही हैं। फैज-ए-इलाही मस्जिद और तुर्कमान गेट का विवाद सिर्फ अतिक्रमण हटाने का मामला नहीं रह गया है। यह अब कानून, आस्था, प्रशासन और सामाजिक संवाद के संतुलन की परीक्षा बन चुका है। आने वाली सुनवाई और जांच से ही तय होगा कि इस संवेदनशील मुद्दे का स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान कैसे निकलता है।





