“किसान की बेटी से असिस्टेंट कमांडेंट तक
पूजा सिंह ने साबित किया मेहनत और मुफ्त कोचिंग का जादू”
जौनपुर की पूजा सिंह ने वह कर दिखाया, जिसे कई लोग केवल सपनों में ही देखते हैं। किसान परिवार से आने वाली पूजा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना’ के तहत मुफ्त कोचिंग का लाभ उठाकर UPSC CAPF परीक्षा पहले प्रयास में उत्तीर्ण कर असिस्टेंट कमांडेंट का पद हासिल किया। उनकी सफलता न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गई है, जो आर्थिक और संसाधनों की कमी के बावजूद उच्च लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं।
-
किसान की बेटी बनी कमांडेंट
-
योगी योजना ने सपने संवारे
-
मुफ्त कोचिंग से मिली सफलता
-
पहले प्रयास में फतह हासिल
-
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी
संघर्ष से सफलता तक: दिल्ली से जौनपुर तक का सफर
पूजा सिंह का जीवन संघर्ष और चुनौतियों से भरा रहा। उनके पिता खेती के माध्यम से परिवार का पालन-पोषण करते हैं। पूजा ने अपनी 12वीं की पढ़ाई दिल्ली से पूरी की, लेकिन महंगाई और परिवार की सीमित आय ने उच्च शिक्षा की राह कठिन बना दी। आर्थिक दबाव के कारण उन्हें दिल्ली छोड़कर जौनपुर लौटना पड़ा, जहाँ उन्होंने टीडी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उनकी कहानी यह साबित करती है कि आर्थिक कठिनाइयाँ कभी भी प्रतिभा को दबा नहीं सकतीं, यदि साथ में मार्गदर्शन और सही अवसर मिले।
‘अभ्युदय योजना’ बनी सपनों की संजीवनी
स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पूजा के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी महंगी कोचिंग फीस। यदि वह किसी निजी संस्थान में जातीं, तो 1 से 1.5 लाख रुपये खर्च करने पड़ते, जो उनके परिवार के लिए असंभव था। मई 2024 में पूजा ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के लिए आवेदन किया। जून 2024 में उन्हें मुफ्त कोचिंग से जोड़ दिया गया। अनुभवी शिक्षकों के मार्गदर्शन में पूजा ने अपनी तैयारी शुरू की।
उनकी तैयारी की रणनीति बेहद सटीक थी:
-
कॉलेज के बाद प्रतिदिन डेढ़ घंटे की नियमित कक्षाएँ
-
सटीक नोट्स और नियमित रिवीजन
-
कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान और शिक्षकों से मार्गदर्शन
पूजा के लिए यह तैयारी सिर्फ़ किताबों तक सीमित नहीं थी। उन्होंने अपने दिनचर्या, मानसिक शक्ति और समय का बेहतरीन प्रबंधन करके कठिन लक्ष्य को हासिल किया।
पहले प्रयास में सफलता: संकल्प और संसाधनों का मेल
पूजा ने अपनी सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच और योजना को दिया। उन्होंने कहा, “अभ्युदय योजना ने न केवल मेरा आर्थिक बोझ हल किया, बल्कि मुझे यह विश्वास दिलाया कि मैं भी UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास कर सकती हूँ।” उनकी पहली कोशिश में ही सफलता यह साबित कर गई कि सही मार्गदर्शन, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। गाँव की गलियों से निकली यह प्रतिभा अब देश की सुरक्षा की कमान संभालेगी।
हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा
मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना आज उत्तर प्रदेश के मेधावी छात्रों के लिए वरदान साबित हो रही है। यह योजना UPSC, PCS, NEET, JEE और CAPF जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को मुफ्त कोचिंग, अध्ययन सामग्री और मार्गदर्शन प्रदान करती है। पूजा सिंह की उपलब्धि यह दिखाती है कि संसाधनों की कमी किसी के सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती। यह कहानी सरकार की नीति और योजना के सफल क्रियान्वयन की भी मिसाल है, जिसमें गरीब और मेधावी छात्र दोनों ही लाभान्वित हो रहे हैं।
गाँव की गलियों से राजधानी तक का संदेश
जौनपुर की गलियों से निकलकर दिल्ली और फिर UPSC परीक्षा के मंच तक पहुंचना पूजा सिंह के साहस और मेहनत की कहानी है। यह संदेश देता है कि यदि सही मार्गदर्शन, सरकारी योजनाएँ और व्यक्तिगत संकल्प साथ हों, तो कोई भी युवा अपनी मंजिल तक पहुँच सकता है। उनकी उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गौरव का विषय है, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाओं की सफलता को भी प्रदर्शित करती है। यह प्रेरणा है उन लाखों छात्रों के लिए, जो सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं।
सपना, मेहनत और अवसर का संगम
पूजा सिंह की कहानी यह बताती है कि कठिनाइयाँ कभी भी रोक नहीं सकतीं, यदि संकल्प मजबूत हो और मार्गदर्शन सही हो। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना जैसे प्रयास युवाओं के जीवन में बदलाव लाने में सक्षम हैं। एक किसान की बेटी से असिस्टेंट कमांडेंट बनने तक का यह सफर साबित करता है कि सपने केवल देखने के लिए नहीं, उन्हें पूरा करने के लिए भी होते हैं। पूजा सिंह ने यह संदेश दिया कि संघर्ष और मेहनत, जब सही अवसर और मार्गदर्शन के साथ जुड़ती है, तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।




