महाराष्ट्र निकाय चुनाच 2026: उद्धव और राज के बीच गठबंधन…नगर निकाय चुनावों से पहले बड़ी राजनीतिक पहल
महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तहत शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) बुधवार को नगर निकाय चुनावों के लिए अपने औपचारिक गठबंधन की घोषणा करने जा रहे हैं। इस बात की जानकारी मामले से जुड़े लोगों ने दी है। यह गठबंधन 15 जनवरी 2026 को होने वाले नगर निगम और नगर परिषद चुनावों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। जिनमें राज्य के कुल 29 नगर निगम शामिल हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) भी शामिल है, जिसे महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा सत्ता केंद्र माना जाता है।
इस गठबंधन की घोषणा से पहले दोनों दलों के बीच पिछले कुछ हफ्तों से लगातार लंबी बैठकें चल रही थीं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य सीटों के बंटवारे को लेकर सहमति बनाना था। सूत्रों के अनुसार, मनसे प्रमुख राज ठाकरे चाहते थे कि गठबंधन की औपचारिक घोषणा से पहले सीट शेयरिंग को अंतिम रूप दे दिया जाए, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न खड़ा हो। इसी कारण गठबंधन की घोषणा में कुछ देरी हुई।
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शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस संभावित गठबंधन का संकेत दिया। उन्होंने 27 जुलाई की एक पुरानी तस्वीर साझा की, जिसमें उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर उस समय की है जब राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे के बांद्रा स्थित आवास पर जाकर उन्हें जन्मदिन की बधाई दी थी। तस्वीर के साथ संजय राउत ने सिर्फ इतना लिखा—“कल 12 बजे।” इस पोस्ट को दोनों ठाकरे बंधुओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की ओर इशारा माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि मुंबई के कई इलाकों में सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद थे। खासतौर पर दादर, माहिम, बोरीवली, विक्रोली, भांडुप और सेवड़ी जैसे क्षेत्रों में किस पार्टी का उम्मीदवार होगा, इसे लेकर चर्चा लंबी चली। हालांकि अब इन मुद्दों पर सहमति बनने की बात कही जा रही है। गठबंधन का मुख्य फोकस भले ही मुंबई हो, लेकिन यह साथ मिलकर ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, नासिक और अन्य प्रमुख शहरों में भी नगर निकाय चुनाव लड़ सकता है। कुल मिलाकर 15 जनवरी को महाराष्ट्र के 29 शहरों में मतदान होना है।
यह राजनीतिक मेलजोल ऐसे समय में हो रहा है जब 2024 के विधानसभा चुनावों में दोनों दलों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। शिवसेना (यूबीटी) को जहां केवल 20 सीटों पर जीत मिली, वहीं मनसे का खाता भी नहीं खुल सका। इस कमजोर प्रदर्शन के बाद ही दोनों ठाकरे परिवारों के बीच फिर से नजदीकी बढ़ने की कोशिशें शुरू हुईं।
इन प्रयासों का सार्वजनिक संकेत 5 जुलाई को देखने को मिला, जब उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे लगभग दो दशकों बाद पहली बार एक ही मंच पर नजर आए। यह रैली वर्ली में आयोजित की गई थी, जहां महायुति सरकार द्वारा प्राथमिक स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने के आदेश को वापस लेने के फैसले का जश्न मनाया गया। इस मुद्दे पर दोनों दलों ने एकजुट होकर विरोध किया था। इसके बाद 27 जुलाई को राज ठाकरे का उद्धव ठाकरे से जन्मदिन पर मिलना भी राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बना।
गौरतलब है कि राज ठाकरे ने वर्ष 2005 में अविभाजित शिवसेना से अलग होकर मनसे की स्थापना की थी। उस समय नेतृत्व और उत्तराधिकार को लेकर उद्धव ठाकरे से मतभेद सामने आए थे। इसके बाद दोनों के रिश्ते समय के साथ और अधिक कटु होते चले गए। लेकिन बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और चुनावी जरूरतों ने दोनों नेताओं को अपने पुराने मतभेद भुलाकर एक साथ आने के लिए मजबूर किया। शिवसेना (यूबीटी) के नेता अनिल परब ने बताया कि गठबंधन की घोषणा बुधवार को इसलिए तय की गई है क्योंकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को उम्मीद है कि मंगलवार शाम तक शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के साथ भी उसका समझौता अंतिम रूप ले लेगा। हालांकि कांग्रेस ने इस गठबंधन में शामिल होने से इनकार कर दिया है। कांग्रेस का कहना है कि मनसे के अतीत में हुए प्रवासी विरोधी आंदोलनों के कारण वह इस गठबंधन का हिस्सा नहीं बन सकती।
शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं के अनुसार, बीएमसी की लगभग 40 सीटें ऐसी हैं जहां फिलहाल किसी भी पार्टी ने उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। इन सीटों पर किस पार्टी का उम्मीदवार उतरेगा, इसका फैसला आपसी सहमति से किया जाएगा। इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने इस प्रस्तावित गठबंधन पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन ने कहा कि यह गठबंधन जनता के विश्वास से नहीं, बल्कि हार के डर से पैदा हुआ है। उन्होंने इसे विचारों का नहीं, बल्कि मजबूरी का गठबंधन बताया। बन के अनुसार, जिन नेताओं ने कल तक एक-दूसरे पर व्यक्तिगत, वैचारिक और राजनीतिक हमले किए, वे आज अचानक भाईचारे का प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मुंबई की जनता इस “राजनीतिक नाटक” को नकार देगी।
कुल मिलाकर, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का यह गठबंधन महाराष्ट्र की नगर निकाय राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। खासतौर पर मुंबई महानगरपालिका के चुनाव में इसका असर निर्णायक साबित हो सकता है।





