UP विधानसभा का शीतकालीन सत्र:योगी सरकार आज पेश करेगी 30 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र मैं लगातार पक्ष और पक्ष के बीच हंगामा जारी है इस बीच आज 22 दिसंबर को, सत्र के दौरान योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य विधानसभा में 30 हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश करने जा रही है। यह बजट ऐसे समय में आ रहा है, जब प्रदेश की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों ही अहम मोड़ पर हैं। शीतकालीन सत्र के दौरान पेश होने वाला यह अनुपूरक बजट न सिर्फ विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने का जरिया माना जा रहा है, बल्कि इसे आने वाले चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। इसी को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर से 24 दिसंबर तक चलेगा। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता में तैयार कार्यक्रम के अनुसार, इस सत्र में कुल पांच कार्य दिवस होंगे। 22 दिसंबर को सरकार अनुपूरक बजट पेश करेगी, जबकि 24 दिसंबर को इसे पारित किए जाने की संभावना है।
विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त धन की तैयारी
सरकार का कहना है कि यह अनुपूरक बजट मुख्य रूप से अधूरे विकास कार्यों को पूरा करने और नई परियोजनाओं को गति देने के लिए लाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस बजट में विभिन्न विभागों के लिए हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग रखी जा सकती है। बीते वर्षों की तरह इस बार भी सिंचाई, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पुलिस आधुनिकीकरण जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलने की संभावना है।
सरकार का फोकस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर भी रहने वाला है। गंगा एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और औद्योगिक गलियारों के लिए अतिरिक्त फंड का प्रावधान किया जा सकता है। सरकार का दावा है कि ये परियोजनाएं प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी’ की दिशा में आगे ले जाने में अहम भूमिका निभाएंगी।
चुनावी संकेतों की भी चर्चा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस अनुपूरक बजट में 2026 के पंचायत चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीतिक झलक भी दिखाई दे सकती है। विकास योजनाओं और बुनियादी ढांचे पर जोर देकर सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। इसी वजह से विपक्ष इसे चुनावी बजट करार दे रहा है।
विपक्ष के तेवर सख्त
शीतकालीन सत्र से पहले ही विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली, जो विधानसभा में नजर भी आई। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार विकास के नाम पर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स का ढिंढोरा पीट रही है, जबकि महंगाई, बेरोजगारी, किसान आय और आवारा पशुओं जैसी बुनियादी समस्याओं पर ठोस काम नहीं किया जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि अनुपूरक बजट के जरिए सरकार इन जनमुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि अगर सरकार वाकई जनहित में काम करना चाहती है, तो उसे रोजगार सृजन, किसानों की आय बढ़ाने और महंगाई पर नियंत्रण के लिए ठोस प्रावधान करने चाहिए। इन्हीं मुद्दों को लेकर विपक्ष सत्र के दौरान सरकार को घेरने की तैयारी में है।
सत्ता पक्ष का पलटवार
वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि अनुपूरक बजट पूरी तरह से विकास केंद्रित है। बीजेपी नेताओं का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हुआ है और इसी का नतीजा है कि उत्तर प्रदेश आज निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है। सरकार का तर्क है कि एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और औद्योगिक कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं लंबे समय में रोजगार के अवसर भी पैदा करेंगी।
बीजेपी का कहना है कि विपक्ष हर बड़े फैसले को सियासत से जोड़कर देखता है, जबकि सरकार प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में काम कर रही है। सत्ता पक्ष के मुताबिक, अनुपूरक बजट प्रदेश की आर्थिक मजबूती और विकास की रफ्तार को और तेज करेगा।
कुल मिलाकर, आज 22 दिसंबर को पेश होने वाला यह 30 हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट सिर्फ एक वित्तीय दस्तावेज नहीं है, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने वाला अहम कदम माना जा रहा है। सरकार इसे विकास और ‘वन ट्रिलियन इकोनॉमी’ की ओर बढ़ने का रोडमैप बता रही है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी गणित और जनसमस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दे रहा है।
अब सबकी निगाहें 22 दिसंबर पर टिकी हैं, जब विधानसभा में यह साफ हो जाएगा कि अनुपूरक बजट विकास का नया रास्ता खोलेगा या सियासी टकराव को और तेज करेगा।





