100 की रफ्तार, 2 घंटे में 210 किमी का सफर; खुलने जा रहा एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर
दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे अब उद्घाटन के बेहद करीब है। करीब 210 किलोमीटर लंबे इस 6 लेन (भविष्य में 8 लेन) एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे के जनवरी 2026 की शुरुआत में पूरी तरह चालू होने की संभावना जताई जा रही है। इसके खुलते ही दिल्ली से देहरादून का सफर महज 2 से 2.5 घंटे में पूरा किया जा सकेगा, जबकि अभी इस दूरी को तय करने में 6 से 7 घंटे तक लग जाते हैं।
- दिल्ली-देहरादून सफर होगा सुपरफास्ट
- दो घंटे में तय दूरी
- एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर
- 210 किलोमीटर लंबा मेगा एक्सप्रेसवे
- तीन राज्यों को जोड़ता प्रोजेक्ट
- जनवरी 2026 में उद्घाटन संभव
- 100 की रफ्तार से यात्रा
- राजाजी पार्क के ऊपर कॉरिडोर
- 13000 करोड़ की बड़ी परियोजना
- विकास और पर्यावरण का संतुलन
यह एक्सप्रेसवे न सिर्फ सफर को तेज और सुरक्षित बनाएगा, बल्कि इसके जरिए एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर भी देश को मिलने जा रहा है। राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर तैयार किया गया करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत है, जहां से गुजरते हुए वाहन चालक प्राकृतिक वादियों और वन्यजीवों की झलक भी देख सकेंगे।
कब खुलेगा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे?
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का पहला चरण अक्टूबर 2025 में ही पूरा हो चुका है। इसका पहला हिस्सा करीब 32 किलोमीटर लंबा है, जो दिल्ली के अक्षरधाम से उत्तर प्रदेश के बागपत को जोड़ता है। इस सेक्शन के चालू होने से दिल्ली से बागपत का सफर अब महज 25 मिनट में पूरा हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक, निर्माण कार्य लगभग अंतिम चरण में है और जनवरी 2026 के लगते ही पूरे एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर इसे यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।
210 किमी लंबा, तीन राज्यों को जोड़ने वाला मेगा प्रोजेक्ट
दिल्ली से उत्तराखंड जाने वाले यात्रियों के लिए यह एक्सप्रेसवे किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है। यह मार्ग एक केंद्र शासित प्रदेश (दिल्ली) और दो राज्यों (उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड) को आपस में जोड़ता है। करीब 210 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति 100 किमी प्रति घंटा तक होगी, जिससे लंबी दूरी बेहद कम समय में तय की जा सकेगी।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद जहां दिल्ली से मेरठ की दूरी 45 मिनट में सिमट गई, वहीं अब दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे उत्तराखंड की राजधानी को भी राजधानी दिल्ली से बेहद करीब ले आएगा। इसके शुरू होने से दिल्ली-मेरठ मार्ग पर यातायात का दबाव भी काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।
लागत और कनेक्टिविटी
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की कुल लागत करीब 13,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस परियोजना के जरिए दिल्ली, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर जैसे अहम शहर सीधे तौर पर जुड़ेंगे। अनुमान है कि इसके खुलने के बाद इस मार्ग पर रोजाना 20 से 30 हजार वाहन फर्राटा भरते नजर आएंगे।
हालांकि, पहले इस परियोजना को 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इसकी अंतिम डेडलाइन पूरी होने वाली है और जनवरी 2026 में इसके पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है।
सफर का समय होगा आधे से भी कम
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के पूरी तरह शुरू होने के बाद यात्रा का समय नाटकीय रूप से घट जाएगा। अभी जहां दिल्ली से देहरादून पहुंचने में 6 से 7 घंटे लगते हैं, वहीं यह दूरी महज 2 से 2.5 घंटे में पूरी की जा सकेगी। अक्षरधाम से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) तक का एक हिस्सा पहले ही परीक्षण के लिए खोला जा चुका है।
इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से उत्तर प्रदेश के कई गांव सीधे तौर पर प्रभावित और लाभान्वित होंगे। बागपत जिले के कथा, पाली, कश्माबाद उर्फ दुभ्दा, मुकरमपुर, अचरजखेड़ा, लोहदा, हिलवारी और अलवालपुर गांव इस मार्ग में शामिल हैं।
मुजफ्फरनगर में बिराल, कमरूद्दीन नगर, फुगना और राजपुर छाजपुर, जबकि शामली जिले के कासमपुर, खानपुर, खियावाड़ी और केडी गांव इस एक्सप्रेसवे से जुड़ेंगे। सहारनपुर में बडुली नया गांव, हलगोया मुश्तकम, नैन्सोब मुश्तकम, जैनपुर मुश्तकम और रसूलपुर खेरी अहतमाल गांव इसके दायरे में आते हैं।
एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी पहचान इसका एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर होना है। राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर बनाए गए 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर से गुजरते हुए वाहन चालक जंगली जानवरों और दुर्लभ पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में देख सकेंगे। यह कॉरिडोर न सिर्फ यात्रियों के लिए रोमांचक अनुभव होगा, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।
कॉरिडोर की प्रमुख खासियतें
इस एक्सप्रेसवे पर 110 से अधिक अंडरपास, 5 रेलवे ओवरब्रिज, 4 बड़े पुल और कई सुरंगें बनाई गई हैं। वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए विशेष रूप से एलिवेटेड सड़क मार्ग तैयार किया गया है। जानकारी के अनुसार, नेशनल हाईवे-44 के बाद यह दूसरा ऐसा राजमार्ग है, जहां वन्यजीव संरक्षण को इतनी प्राथमिकता दी गई है। कुल मिलाकर, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे न सिर्फ उत्तर भारत की सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देगा, बल्कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन का एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश करेगा।





