उत्तर प्रदेश के छह शहरों में वॉटर मेट्रो शुरू करने की तैयारी: प्राथमिकता पर गोंमती नदी
उत्तर प्रदेश में जल आधारित परिवहन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य के जल मार्ग प्राधिकरण (Uttar Pradesh Inland Waterways Authority) की पहली बैठक में छह प्रमुख शहरों में वॉटर मेट्रो सेवाओं के प्रारंभ और विस्तार का रोडमैप तैयार करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रमुख नदियों पर जल परिवहन सेवाओं के लिए विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन तैयार करने हेतु एक सलाहकार नियुक्त किया जाएगा। इसमें गोंमती नदी को प्राथमिकता वाले मार्ग के रूप में चिन्हित किया गया है, लेकिन इसके लिए नदी की पर्याप्त सफाई और गहराई आवश्यक होगी।
कौन से शहर होंगे शामिल
बैठक में लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या, आगरा और मथुरा में वॉटर मेट्रो सेवाओं को लागू करने की सिफारिश की गई। यह सेवा न केवल शहरों में स्थानीय यात्रा के लिए उपयोगी होगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देगी। उत्तर प्रदेश में परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दया शंकर सिंह ने कहा, “अधिकारियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रमुख नदियों पर जल आधारित परिवहन सेवाओं और पर्यटन गतिविधियों की शुरुआत के लिए सलाहकार नियुक्त किया जाएगा। साथ ही कुछ शहरों में वॉटर मेट्रो शुरू करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।” उन्होंने यह भी कहा कि जल परिवहन न केवल यात्रियों के लिए सुविधाजनक होगा, बल्कि राज्य में माल ढुलाई की लागत को भी काफी कम करेगा।
जल परिवहन की संभावनाएं और महत्व
उत्तर प्रदेश जल मार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष सुनील पालीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछले दशक में जलमार्ग विकास को उच्च प्राथमिकता दी है। राज्य में 11 दर्जन से अधिक सूचित जलमार्ग हैं, जो भारत के कुल 111 जलमार्गों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सचिव टी. के. रामाचंद्रन ने कहा कि एक मालवाहक जहाज 50-60 ट्रकों का भार वहन कर सकता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि लॉजिस्टिक्स लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी और सड़क पर दबाव भी कम होगा।
वरिष्ठ डिविजनल रेलवे प्रबंधक राजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि भारत मल्टीमॉडल कार्गो सिस्टम विकसित कर रहा है, जिसमें जल, सड़क और रेल परिवहन का एकीकरण होगा। इससे वाराणसी–कोलकाता जैसे मार्गों पर माल ढुलाई की लागत कम होगी। इसके साथ ही कानपुर और उन्नाव में उद्योगों को भी कम लागत में माल पहुँचाने में मदद मिलेगी।
वॉटर मेट्रो: स्थानीय और पर्यटन दोनों के लिए लाभकारी
इस योजना से न केवल रोज़मर्रा के यात्रियों को सुविधा होगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। लखनऊ, वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहरों में नदी के किनारे स्थित प्रमुख पर्यटन स्थलों को वॉटर मेट्रो द्वारा जोड़ना पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।
उत्तर प्रदेश जल मार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना से शहरों में यातायात जाम कम होगा और सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम भी घटेगा। साथ ही पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी यह पहल महत्वपूर्ण है, क्योंकि जल मार्ग पर माल ढुलाई से सड़क पर वाहन कम चलेंगे और प्रदूषण घटेगा।
अगले कदम
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जल्द ही सलाहकार नियुक्त किया जाएगा जो नदियों की स्थिति का अध्ययन करेंगे। यह अध्ययन नदी की गहराई, सफाई, जल स्तर और वर्षा के अनुसार जल परिवहन की संभावनाओं को आंकने में मदद करेगा। इसके बाद वॉटर मेट्रो की प्रारंभिक परियोजनाओं को लागू करने की योजना बनाई जाएगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना के सफल होने पर उत्तर प्रदेश देश में जल परिवहन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बन सकता है। यह न केवल यात्रियों के लिए सुविधा प्रदान करेगा, बल्कि उद्योगों और व्यापारियों के लिए लागत में कमी लाकर आर्थिक विकास में भी योगदान देगा।
उद्योग और आर्थिक लाभ
जल परिवहन परियोजना का सीधा लाभ उद्योगों को होगा। विशेषकर कानपुर और उन्नाव जैसे औद्योगिक केंद्रों में कार्गो परिवहन की लागत में कमी आएगी। यह परियोजना स्थानीय व्यवसायों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देगी। साथ ही, पर्यटन और जल पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। गोंमती, यमुना और अन्य प्रमुख नदियों के किनारे नई पर्यटन गतिविधियों का विकास होगा, जिससे रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
उत्तर प्रदेश में जल मार्ग और वॉटर मेट्रो परियोजनाओं की योजना राज्य के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है। यह परियोजना न केवल पर्यावरण और यातायात के लिए लाभकारी होगी, बल्कि आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। जल आधारित परिवहन से न केवल शहरों में यातायात सुगम होगा, बल्कि उद्योग, पर्यटन और स्थानीय व्यवसायों के लिए भी लाभ सुनिश्चित होगा। यह पहल उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया में कुशल और स्मार्ट परिवहन वाले राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।





