पुतिन के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में डिनर…राहुल-खड़गे को न्योता नहीं, शशि थरूर जरुर हुए आमंत्रण पर शामिल
भारत और रूस के बीच संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दो दिवसीय भारत दौरा शुक्रवार की रात समाप्त हो गया। इस यात्रा के समापन से पहले राष्ट्रपति भवन में उनके सम्मान में भव्य डिनर का आयोजन किया गया। लेकिन इस डिनर को लेकर राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा छिड़ गई है—कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को इस डिनर में आमंत्रित नहीं किया गया था, जबकि कांग्रेस सांसद शशि थरूर को इसमें शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा गया था।
यह फैसला इसलिए भी चर्चाओं में है क्योंकि विदेश नीति से लेकर संसदीय मर्यादाओं तक, डिनर आमंत्रण में की गई इस चयन प्रक्रिया पर राजनीतिक विश्लेषक और विपक्ष के नेता सवाल उठा रहे हैं।
डिनर का आयोजन, पुतिन हुए रवाना
रूस के राष्ट्रपति पुतिन भारत-रूस शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए गुरुवार को भारत पहुंचे थे। उनकी यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, आर्थिक भागीदारी, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। शुक्रवार रात वे अपने देश लौट गए। इससे पहले राष्ट्रपति भवन में भारत की ओर से औपचारिक स्टेट डिनर का आयोजन किया गया, जिसमें राजनीति, उद्योग, कूटनीति और संस्कृति से जुड़ी चुनिंदा हस्तियों को आमंत्रित किया गया था।
इस सूची में कांग्रेस सांसद शशि थरूर का नाम होना तो सामान्य माना गया, क्योंकि वह विदेश मामलों की स्थायी समिति के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय मामलों में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। लेकिन इसी सूची में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम न होना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
राहुल गांधी और खड़गे को क्यों नहीं बुलाया गया?
सूत्रों के अनुसार, न कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे और न ही लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को इस डिनर की गेस्ट लिस्ट में शामिल किया गया। जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर को विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में बुलाया गया।
इस कदम को विपक्ष की ओर से ‘चयनित निमंत्रण’ की राजनीति कहा जा रहा है, खासकर तब जब पिछली सरकारों में विपक्षी नेताओं की मौजूदगी को सम्मानजनक और जरूरी माना जाता रहा है।
राहुल गांधी के आरोप और सरकारी प्रतिक्रिया
डिनर निमंत्रण विवाद से एक दिन पहले ही राहुल गांधी ने कहा था कि भारत आने वाले विदेशी राजनेताओं और राष्ट्राध्यक्षों से आमतौर पर ‘लीडर ऑफ ऑपोज़िशन’ की मुलाकात परंपरा का हिस्सा रही है। उन्होंने दावा किया कि वाजपेयी और मनमोहन सिंह सरकारों में यह प्रोटोकॉल पूरी तरह पालन किया जाता था, लेकिन अब केंद्र सरकार विदेशी मेहमानों को उनसे मिलने से रोकती है।
उन्होंने कहा—
“आजकल विदेशी मेहमान या जब मैं विदेश जाता हूं तो केंद्र सरकार उन्हें लीडर ऑफ ऑपोज़िशन से न मिलने की सलाह देती है.”
हालांकि, सरकारी सूत्रों ने राहुल गांधी के आरोपों को बेबुनियाद ठहराते हुए स्पष्ट किया कि 9 जून 2024 को नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद से राहुल गांधी चार राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात कर चुके हैं, जिनमें बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना भी शामिल हैं। सरकार ने कहा कि यह निर्णय विदेश मंत्रालय नहीं बल्कि आने वाला विदेशी डेलिगेशन करता है कि वह किसी गैर-सरकारी व्यक्ति या विपक्ष के नेता से मिलना चाहता है या नहीं।
स्टेट डिनर में क्या है खास?
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति भवन में आयोजित पुतिन के सम्मान में डिनर की तैयारियां कई दिनों से चल रही थीं। इस डिनर में राजनीति, बिजनेस, कला, खेल और संस्कृति से जुड़ी हस्तियों को आमंत्रित किया गया था।
मेन्यू भारत-रूस मैत्री का प्रतीक बनकर उभरा। एक ओर कश्मीर का प्रसिद्ध वाजवान परोसा गया, तो दूसरी ओर रूस का लोकप्रिय पारंपरिक सूप ‘बोर्शे’ भी मेन्यू में शामिल रहा। दोनों देशों के व्यंजनों को समान महत्व दिया गया ताकि यह डिनर केवल राजनयिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक संबंधों का भी प्रतीक बने।
क्यों बुलाया गया शशि थरूर को?
शशि थरूर अंतरराष्ट्रीय संबंधों में लंबे अनुभव वाले नेता हैं। संयुक्त राष्ट्र में वर्षों की सेवा, विदेश नीति पर उनकी समझ और भारत-रूस संबंधों से जुड़ी चर्चाओं में उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें डिनर के लिए बुलाना कूटनीतिक दृष्टि से स्वाभाविक माना जा रहा है।
जहां तक राहुल गांधी और खड़गे की अनुपस्थिति की बात है, इस पर सरकारी स्तर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि गेस्ट लिस्ट को ‘तकनीकी, प्रोटोकॉल आधारित और सीमित’ रखा गया है।
विवाद का राजनीतिक असर
यह मुद्दा केवल डिनर निमंत्रण का नहीं बल्कि सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ती दूरी का भी प्रतीक माना जा रहा है। राहुल गांधी के आरोपों और शशि थरूर को विशेष रूप से बुलाए जाने के फैसले ने कांग्रेस के भीतर भी हलचल पैदा की है।
कई राजनीतिक विश्लेषक इसे विपक्ष को लेकर सरकार की सख्त रणनीति का हिस्सा मानते हैं, जबकि कुछ इसे पूरी तरह कूटनीतिक और प्रोटोकॉल आधारित निर्णय बताते हैं।
राष्ट्रपति भवन में पुतिन के सम्मान में आयोजित डिनर ने जितना ध्यान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की वजह से आकर्षित किया, उतना ही राजनीतिक माहौल भी इससे प्रभावित हुआ। राहुल गांधी और खड़गे को निमंत्रण न भेजे जाने और शशि थरूर को बुलाए जाने ने इस आयोजन को राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बना दिया है। भारत-रूस संबंधों की मजबूती और नई साझेदारी के बीच यह घटना भारतीय राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म देती दिख रही है—क्या यह केवल प्रोटोकॉल का मामला है या राजनीतिक संदेश?





