INS विक्रांत पर होगी राफेल-M की तैनाती, 2029 में आएगी पहली खेप
समंदर में भारतीय नौसेना की ताकत कई गुना बढ़ना तय
भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक बढ़त कायम रखने के लिए भारतीय नौसेना लगातार तकनीकी और युद्धक क्षमता को बढ़ा रही है। इसी दिशा में एक बड़ा कदम है—राफेल मरीन (Rafale-M) की भारतीय नौसेना में एंट्री। फ्रांस के साथ हुई ऐतिहासिक डील अब समुद्र में भारत की शक्ति को नए स्तर पर ले जाने वाली है। आने वाले वर्षों में INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य से उड़ान भरते राफेल-M न केवल नौसेना की रीढ़ मजबूत करेंगे, बल्कि हिंद महासागर में किसी भी संभावित खतरे के लिए निर्णायक जवाब साबित होंगे।
फ्रांस डिलीवर करेगा 2029 में पहली खेप
नेवी प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि भारतीय नौसेना को राफेल मरीन की पहली खेप वर्ष 2029 में मिलेगी, जिसमें चार राफेल-M विमान शामिल होंगे। यह खेप उस डील का हिस्सा है, जिसे भारत ने वर्ष 2024 में फ्रांस के साथ फाइनल किया था। कुल 26 राफेल मरीन खरीदने का अनुबंध भारतीय विमानवाहक पोतों के लिए लंबे समय से लंबित आवश्यकताओं को पूरा करेगा। एडमिरल त्रिपाठी के अनुसार यह टाइमलाइन भारत व डसॉल्ट एविएशन के बीच तय उत्पादन, कस्टमाइज़ेशन और नेवी की जरूरतों के मुताबिक इंटीग्रेशन प्लान को दर्शाती है। पहली खेप आने के बाद अन्य विमानों की डिलीवरी चरणबद्ध तरीके से होती रहेगी।
INS विक्रांत और विक्रमादित्य को मिलेगी नई जान
राफेल-M को आने वाले वर्षों में INS विक्रांत तथा INS विक्रमादित्य पर तैनात MiG-29K बेड़े के साथ इंटीग्रेट किया जाएगा। इससे भारतीय नौसेना को पहला ऐसा शक्तिशाली लड़ाकू विमान मिलेगा, जो एयरफोर्स और नेवी—दोनों शाखाओं में एक साथ रीढ़ की भूमिका निभाएगा। MiG-29K की जगह लेने के लिए नेवी काफी समय से एक अत्याधुनिक, मल्टीरोल और कैरियर-ऑपरेशनल फाइटर की तलाश में थी। राफेल-M की एंट्री इस खालीपन को पूरी तरह खत्म कर देगी। फ्रांस—भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार बनने की ओर रूस के बाद भारत का सबसे बड़ा रक्षा सहयोगी अब फ्रांस बन चुका है। पिछले एक दशक में भारत ने— राफेल (IAF) स्कॉर्पीन पनडुब्बियां राफेल-M और संभावित राफेल-F4/F5 जैसे कई मेगा डिफेंस प्रोजेक्ट्स फ्रांस के साथ साइन किए हैं। यदि यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले समय में भारतीय सैन्य बेड़े में सबसे अधिक आधुनिक हथियार फ्रांस से होंगे।
कड़ी प्रतिद्वंद्विता के बाद चुना गया राफेल-M
भारतीय नौसेना ने राफेल-M को अमेरिकी Boeing F/A-18 सुपर हॉर्नेट के साथ प्रतियोगिता में परखा था। ट्रायल्स गोवा के शोर-बेस्ड टेस्ट फैसिलिटी में हुए, जहां STOBAR सिस्टम (Short Take-Off But Arrested Recovery) पर दोनों विमान परखे गए।
राफेल-M ने STOBAR सिस्टम पर उड़ान के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन किया। शॉर्ट रनवे से टेकऑफ क्षमताओं में बढ़त दिखाई। वाटर, सॉल्ट और सी एयर प्रेशर जैसी नौसैनिक परिस्थितियों में बेहतर परिणाम दिए। इन्हीं कारणों से इसे भारतीय नौसेना के लिए सबसे उपयुक्त पाया गया।
समुद्र से हवा तक… राफेल-M का दमदार पैकेज
राफेल-M केवल एक लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि एक पूर्ण युद्धक सिस्टम है। इसके साथ मिलने वाले हथियार और तकनीकी पैकेज भारतीय नौसेना को समुद्र में एक नई आक्रामक क्षमता देगा। राफेल-M के प्रमुख फीचर्स एडवांस्ड एवियोनिक्स। एंटी-शिप मिसाइल क्षमता। समुद्री हमले की विशेष तकनीक। उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम। लॉन्ग-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलें। हाई-ऑफ-स्टेशन मल्टीरोल क्षमता। इसके आने से नौसेना की कैरियर एविएशन क्षमता विश्व की प्रमुख नौसेनाओं के बराबर पहुंच जाएगी।
INS विक्रांत पर तैनाती—क्यों है ऐतिहासिक?
INS विक्रांत भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत है। राफेल-M की तैनाती से भारत की स्वदेशी कैरियर शक्ति बढ़ेगी। हिंद महासागर में शक्ति संतुलन भारत की ओर झुकेगा। चीन के aircraft carriers और naval groups पर सीधी रणनीतिक बढ़त मिलेगी। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, राफेल-M के आने से भारतीय नौसेना को गहरे समुद्र में लंबी दूरी तक दुश्मन को जवाब देने की क्षमता मिलेगी।
नेवी चीफ का संकेत—2029 से बदलेगी तस्वीर
एडमिरल त्रिपाठी ने साफ कहा है कि “पहले चार राफेल-M भारतीय नौसेना के भविष्य के स्ट्राइक ग्रुप की नींव रखेंगे। इसका मतलब है कि 2029 से भारत की नौसेना एक नए युग में प्रवेश करेगी। इन विमानों के साथ पायलट ट्रेनिंग,सिमुलेटर,मेंटेनेंस पैकेज और नए हथियार सिस्टम भी भारत को मिलेंगे।
समंदर में उबाल आना तय
राफेल-M की तैनाती से भारतीय नौसेना न केवल भविष्य के युद्धों के लिए तैयार होगी, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त को मज़बूत बनाए रखेगी। INS विक्रांत और विक्रमादित्य जैसे कैरियर प्लेटफॉर्म अब दुनिया के बेहतरीन फाइटर सिस्टम्स से लैस होंगे। 2029 में पहली खेप आने के बाद भारतीय नौसेना की शक्ति में वह उछाल आएगा, जिसकी गूंज पूरे इंडो-पैसिफिक में सुनाई देगी।





