SIR पर विपक्ष की मोर्चाबंदी
संसद में तनातनी, शीतकालीन सत्र में सियासी घमासान तेज
संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही संसद का माहौल गरम है। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष आर-पार की लड़ाई के मूड में है। एक तरफ विपक्ष SIR को “चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप” और “मतदाता अधिकारों पर हमला” बता रहा है, वहीं सरकार इसे एक नियमित प्रक्रिया बताते हुए कह रही है कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए संसद में चर्चा संभव नहीं।
संसद में दूसरे दिन भी हंगामा
संसद LIVE अपडेट्स के अनुसार मंगलवार को भी सदन की कार्यवाही SIR विवाद के चलते बाधित रही। विपक्ष लगातार नारेबाज़ी करता रहा। “SIR वापस लो”, “मताधिकार मत छीना जाए”, “SIR की समीक्षा हो। हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही सुबह शुरू होते ही बाधित हुई और आखिरकार दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। राज्यसभा में भी स्थिति अलग नहीं रही। विपक्ष ने सरकार से SIR पर त्वरित बयान और चर्चा की मांग उठाई।
विपक्ष की मांग—खड़गे बोले “SIR की तत्काल समीक्षा जरूरी”
विपक्ष का नेतृत्व करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा “मतदाता सूचियों में इस तरह का गहन पुनरीक्षण कई राज्यों में अशांति और संदेह उत्पन्न कर रहा है। SIR की समीक्षा तुरंत होनी चाहिए। संसद इस पर चर्चा करे और प्रक्रिया पारदर्शी हो। विपक्ष का आरोप है कि SIR के नाम पर कई क्षेत्रों में नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे चुनावी निष्पक्षता प्रभावित होगी। खड़गे ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक मामला नहीं बल्कि लोकतंत्र की आत्मा से जुड़ा मुद्दा है।
सरकार की दलील—“संसद में चर्चा नहीं हो सकती, मामला कोर्ट में है
केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय तथा सरकार की तरफ से दलील दी गई कि SIR पूरी तरह चुनाव आयोग का विषय है। चुनाव आयोग एक स्वायत्त और संवैधानिक संस्था है। मामले पर कई राज्यों में याचिकाएँ दायर हैं, इसलिए यह विचाराधीन मामला है। संसद किसी संवैधानिक संस्था के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। सरकार का कहना है कि विपक्ष अनावश्यक रूप से SIR को राजनीतिक रंग दे रहा है, जबकि गहन पुनरीक्षण एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है।
संसद परिसर में विपक्ष का विरोध, नारेबाज़ी तेज
सत्र के दूसरे दिन सुबह संसद की कार्यवाही से पहले ही विपक्षी सांसद मकर द्वार पर इकट्ठा हुए। हाथों में तख्तियां, नारों में ग़ुस्सा—पूरी फिज़ा विरोध से भरी नजर आई।
मुख्य विपक्षी नेताओं में सोनिया गांधी,प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, टी.आर. बालू (DMK),RJD, SP, CPI(M), CPI और अन्य सांसद शामिल थे। यह दिलचस्प रहा कि TMC इस विरोध में शामिल नहीं हुई, जबकि पश्चिम बंगाल सरकार सबसे अधिक जोरदार तरीके से SIR का विरोध कर रही है।
विपक्षी नेताओं ने एक स्वर में नारा लगाया
“SIR वापस लो! मतदाता सूची से खिलवाड़ बंद करो!”
पहले दिन भी SIR ने ठप कराई थी संसद की कार्यवाही
संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार को शुरू होते ही हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्ष ने SIR पर तत्काल चर्चा की मांग रखी और सरकार ने इसे “कोर्ट का मामला” बताते हुए अस्वीकार कर दिया। दोनों सदनों की कार्य मंत्रणा समिति और इससे पहले सर्वदलीय बैठक में भी विपक्ष ने SIR का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया था।
SIR क्या है और विवाद क्यों?
SIR यानी Special Intensive Revision—मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण। चुनाव आयोग इसे समय-समय पर लागू करता है ताकि नए मतदाता जोड़े जाएँ। मृत/डुप्लीकेट/स्थानांतरित मतदाता हटाए जाएँ। बूथवार डेटा अपडेट हो लेकिन विपक्ष का आरोप है कई राज्यों में नाम हटाए जा रहे हैं।
राज्य सरकारों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई
प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी
चुनाव से पहले मतदाता आधार को प्रभावित करने की कोशिश
वहीं सरकार और चुनाव आयोग दोनों का कहना है कि “SIR एक नियमित प्रक्रिया है, हर राज्य में समान नियम लागू होते हैं। सोनिया-प्रियंका भी उतरीं सड़क पर, बड़ा राजनीतिक संदेश। सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी का इस विरोध में हिस्सा लेना यह संकेत देता है कि कांग्रेस SIR को अपना मुख्य राजनीतिक मुद्दा बनाना चाहती है।
दिल्ली में सर्द मौसम के बीच सुबह-सुबह विपक्ष का यह प्रदर्शन सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
DMK, RJD, CPI(M), CPI, SP और अन्य दलों का भी समर्थन रहा। यह विपक्ष की एकजुटता का संकेत है, हालांकि TMC की अनुपस्थिति पर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है।
शीतकालीन सत्र में टकराव जारी रहने के आसार
पहले दिन से शुरू हुआ राजनीतिक घमासान दूसरे दिन और भी तेज हो गया।
संसद के भीतर और बाहर SIR को लेकर जारी विवाद यह संकेत देता है कि शीतकालीन सत्र में विपक्ष लगातार दबाव बनाने की कोशिश करेगा। सरकार मामले को चुनाव आयोग और कोर्ट से जुड़ा बताते हुए चर्चा टाल सकती है। आगामी दिनों में दोनों सदनों में गतिरोध जारी रहने की संभावना है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया, मताधिकार और चुनावी पारदर्शिता जैसे बड़े मुद्दों के कारण SIR पर टकराव शीतकालीन सत्र को पूरी तरह प्रभावित कर सकता है।





