महिलाओं को आर्थिक ताकत देने की ओर बड़ा कदम
मध्य प्रदेश सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लेने जा रही है। राज्य में मनरेगा भुगतान प्रणाली में अब ऐसा बदलाव प्रस्तावित है, जिससे मजदूरी सीधे महिला सदस्यों के खातों में भेजी जाएगी। अभी तक परिवार के मुखिया के नाम पर ही पूरी मजदूरी ट्रांसफर होती थी, चाहे काम महिला करे या पुरुष। लेकिन आने वाले समय में यह व्यवस्था बदल दी जाएगी, ताकि महिलाओं को सरकारी योजनाओं से मिलने वाले लाभ का सीधा फायदा मिल सके।
मां का बगिया’ योजना बनेगी मॉडल, देश में MP नंबर 1
सरकार इस बदलाव को ‘मां का बगिया’ योजना के मॉडल के तहत लागू करने की तैयारी कर रही है। यह मॉडल अपनाने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बनने की कगार पर है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महिला मजदूरों को उनकी मेहनत का प्रत्यक्ष लाभ मिले और आर्थिक फैसलों में उनकी भागीदारी बढ़े। इसके साथ ही राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण मिशन को और मजबूत बनाना चाहती है।
तकनीकी अड़चनें सामने आईं, कारण चौंकाने वाला
मनरेगा भुगतान को महिलाओं के बैंक खातों में भेजने के फैसले के बाद सरकार ने तकनीकी जांच करवाई। इस जांच में हैरान करने वाली जानकारी सामने आई — प्रदेश के करीब 31,500 समूहों में 1% से भी कम महिलाओं के नाम जॉब कार्ड पर ‘मुखिया’ के रूप में दर्ज थे। चूंकि भुगतान जॉब कार्ड के हेड के खाते में जाता है, इसलिए महिलाओं को पैसा भेजना व्यावहारिक रूप से संभव ही नहीं था। यह बड़ी तकनीकी बाधा सुधार के रास्ते में खड़ी थी।
जॉब कार्ड अपडेट होंगे, महिलाओं को मिलेगी प्राथमिकता
सरकार अब मनरेगा जॉब कार्ड में बदलाव करने जा रही है, जिसमें परिवार की महिला सदस्य को मुखिया के रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जैसे ही जॉब कार्ड संशोधित होंगे, भुगतान सीधे महिला के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इस सुधार के बाद महिला मजदूरों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, घरेलू निर्णयों में उनका योगदान बढ़ेगा और ग्रामीण परिवारों की संरचना में सकारात्मक बदलाव आएगा।





