बिहार विधानसभा चुनाव : दूसरे चरण का रण…122 सीटों पर मतदान जारी..जानें पिछली बार यहां कौन था किस पर भारी
बिहार विधानसभा चुनाव अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। मंगलवार को हो रहे दूसरे और अंतिम चरण के मतदान में राज्य की 122 विधानसभा सीटों पर जनता अपनी शाम पांच बजे तक पसंद का फैसला कर देगी। इस चरण में कुल 1302 उम्मीदवारों की किस्मत 3 करोड़ 70 लाख से अधिक मतदाताओं के हाथों में है। यह चरण न केवल नेताओं बल्कि पूरे बिहार के सियासी भविष्य का फैसला करने वाला माना जा रहा है।
- बिहार में दूसरे चरण का रण जारी
- बिहार में सियासी संग्राम तेज
- दूसरे चरण में 122 सीटें
- दांव पर 1302 उम्मीदवारों की किस्मत
- एनडीए-महागठबंधन की अग्निपरीक्षा शुरू
- सीमांचल से मिथिलांचल तक जंग
- प्रशांत किशोर बने तीसरा फैक्टर
- ओवैसी की एंट्री से मुकाबला तगड़ा
- दिग्गज नेताओं की साख दांव पर
- कांग्रेस-आरजेडी की करो-मरो स्थिति
- बीजेपी-जेडीयू को सीट बचाने की चुनौती
20 जिलों की 122 सीटों पर मतदान जारी
दूसरे चरण का चुनाव बिहार के 20 जिलों की 122 सीटों पर हो रहा है। इनमें मिथिलांचल, सीमांचल, शाहाबाद-मगध और चंपारण बेल्ट के इलाके शामिल हैं। इन सीटों में 101 सामान्य, 19 अनुसूचित जाति (SC) और 2 अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही चरण तय करेगा कि सत्ता की चाबी किसके हाथ में जाएगी — एनडीए या महागठबंधन।
2020 के मुकाबले एनडीए की मुश्किलें बढ़ीं
पिछले विधानसभा चुनाव (2020) में इन 122 सीटों में से महागठबंधन को 66, एनडीए को 49, एआईएमआईएम को 5, और बसपा को 1 सीट मिली थी। इस बार चुनौती ज्यादा है, क्योंकि एनडीए को अपनी सीटें बचानी हैं, जबकि महागठबंधन सत्ता में वापसी के लिए पूरा जोर लगा रहा है। एनडीए की ओर से बीजेपी 53 सीटों, जेडीयू 44 सीटों, जीतनराम मांझी की हम 6 सीटों, आरएलएम 4 सीटों, और एलजेपी (रामविलास) 15 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
वहीं, महागठबंधन की ओर से आरजेडी 71 सीटों, कांग्रेस 37 सीटों, वीआईपी 7, सीपीआई(एमएल) 7, सीपीआई 4, और सीपीएम 1 सीट पर मैदान में है।
सीमांचल में सबसे दिलचस्प मुकाबला
सीमांचल इलाका, यानी कटिहार, किशनगंज, अररिया और पूर्णिया— कुल 24 विधानसभा सीटें— इस चरण में सियासी हलचल का केंद्र है। यह क्षेत्र मुस्लिम बहुल इलाका है, जहां परंपरागत रूप से महागठबंधन मजबूत रहा है। 2020 में इन 24 सीटों में से महागठबंधन को 12, एनडीए को 6, और ओवैसी की एआईएमआईएम को 5 सीटें मिली थीं। इस बार ओवैसी की पार्टी ने फिर से आक्रामक रणनीति अपनाई है, जिससे महागठबंधन और एनडीए दोनों के लिए समीकरण जटिल हो गए हैं।
शाहाबाद-मगध बेल्ट: एनडीए और आरजेडी आमने-सामने
शाहाबाद-मगध क्षेत्र की 46 सीटें इस बार दोनों गठबंधनों के लिए ‘फाइनल टेस्ट’ साबित हो सकती हैं। यहां औरंगाबाद, गया, बक्सर, सासाराम, जहानाबाद, अरवल जैसे ज़िले आते हैं, जहां जातीय समीकरण अहम भूमिका निभाते हैं। 2020 में इन 46 सीटों में से 23-23 सीटें एनडीए और महागठबंधन के बीच बटी थीं। यह इलाका यादव, राजपूत, भूमिहार, कुर्मी और दलित वोटरों की मिश्रित आबादी वाला है, इसलिए मुकाबला बेहद दिलचस्प है।
मिथिलांचल और चंपारण बेल्ट: एनडीए के लिए निर्णायक इलाका
दूसरे चरण में चंपारण बेल्ट की 21 सीटें और मिथिलांचल क्षेत्र की 15 सीटें (मधुबनी, सुपौल आदि) शामिल हैं। इन दोनों इलाकों की कुल 36 सीटों पर 2020 में एनडीए का दबदबा रहा था। अबकी बार महागठबंधन स्थानीय विकास, बेरोज़गारी और शिक्षा जैसे मुद्दों को केंद्र में लाकर मुकाबले को और कड़ा करने की कोशिश में है। वहीं प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी इन इलाकों में तीसरे मोर्चे के रूप में उभरने की कोशिश कर रही है, जो एनडीए और महागठबंधन दोनों के वोट बैंक में सेंध लगा सकती है।
दांव पर बड़े नेताओं की साख
इस चरण में कई दिग्गज नेताओं की साख और सियासी भविष्य दोनों दांव पर लगे हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री रेणु देवी (बेतिया) और तारकिशोर प्रसाद (कटिहार) बीजेपी से मैदान में हैं। नीतीश सरकार के कई मंत्री जैसे लेशी सिंह (धमदाहा), शीला मंडल (फुलपरास), जयंत राज (अमरपुर) और ज़मा खान (चैनपुर) भी चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं बाहुबली आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद, बीमा भारती (आरजेडी), उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता कुशवाहा, और एआईएमआईएम प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान भी मैदान में हैं।
कांग्रेस और RJD के लिए करो-मरो का मुकाबला
कांग्रेस के लिए यह चरण करो या मरो वाला साबित हो सकता है, क्योंकि पहले चरण में उसका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। वहीं आरजेडी इस चरण में अधिक सीटों पर लड़ रही है, इसलिए तेजस्वी यादव के नेतृत्व का असली इम्तिहान अब होगा।
एनडीए के लिए चुनौती यह है कि बीजेपी और जेडीयू अपने पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट रख पाएं या नहीं।
तीसरा फैक्टर: ओवैसी और प्रशांत किशोर
इस चरण में दो नए ‘फैक्टर’ चुनावी गणित को बदल सकते हैं — पहला, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम, जिसने सीमांचल में पिछली बार पांच सीटें जीती थीं; और दूसरा, प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी, जो राज्य में सियासी विकल्प बनने की कोशिश में है। दोनों पार्टियां एनडीए और महागठबंधन दोनों के वोट बैंक में सेंध लगाने की स्थिति में दिख रही हैं।
किसके लिए निर्णायक साबित होगा दूसरा चरण?
बिहार के राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जो भी दल 122 सीटों में से 70 का आंकड़ा पार करेगा, वही सत्ता के सबसे करीब होगा। इसलिए यह चरण एनडीए और महागठबंधन — दोनों के लिए ‘आग का दरिया’ बन गया है। जरा सी चूक या मत प्रतिशत में गिरावट, किसी भी गठबंधन को सत्ता से दूर कर सकती है। नतीजों से पहले ही यह तय हो गया है कि बिहार की सियासत का भविष्य अब दूसरे चरण की वोटिंग से ही तय होगा। राजनीति के इस रण में जीत किसकी होगी, यह तो मतगणना के दिन पता चलेगा, लेकिन इतना तय है कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता नहीं, साख का भी युद्ध बन चुका है। (प्रकाश कुमार पांडेय)





