दिल्ली ब्लास्ट का फरीदाबाद कनेक्शन: आतंकी डॉक्टर उमर की हड़बड़ी बनी 9 मौतों की वजह, जांच में 10 बड़े खुलासे
नई दिल्ली, 11 नवंबर — दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के बाहर हुए धमाके ने पूरे देश को हिला दिया है। अब तक 9 लोगों की मौत और 20 से ज्यादा घायल हो चुके हैं। जांच एजेंसियों ने पुष्टि की है कि यह धमाका एक आतंकी हमला था, जिसमें फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल का सीधा हाथ सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, आतंकी डॉक्टर उमर मोहम्मद इस हमले के पीछे का मास्टरमाइंड था, जो फरीदाबाद में विस्फोटक बरामदगी के बाद बुरी तरह पैनिक में आ गया था और पकड़े जाने के डर से हड़बड़ी में उसने ब्लास्ट को अंजाम दे डाला।
कैसे बना दिल्ली ब्लास्ट का प्लान
जम्मू-कश्मीर और हरियाणा पुलिस फरीदाबाद से बरामद 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट के मामले में डॉ. उमर की तलाश कर रही थी। पुलिस के लगातार छापों से वह घिरता जा रहा था। इस दबाव में उसने अपने दो साथियों के साथ दिल्ली में आत्मघाती हमले की योजना बनाई। सूत्रों के अनुसार, उमर ने खुद ही कार में डेटोनेटर लगाया और हुंडई I-20 कार में सवार होकर लाल किले की ओर निकल पड़ा। शाम करीब 6:55 बजे लाल किला मेट्रो स्टेशन के बाहर जबरदस्त विस्फोट हुआ।
जांच में सामने आए 10 बड़े खुलासे
अकेला था कार में उमर
जांच एजेंसियों के मुताबिक, धमाके के वक्त कार में केवल उमर सवार था। पहले यह आशंका जताई गई थी कि उसमें तीन लोग थे, लेकिन सीसीटीवी फुटेज में वह अकेला दिखाई दिया।
कार की रूट मैपिंग
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कार के रूट की सीसीटीवी मैपिंग की। कार सबसे पहले बदरपुर बॉर्डर पर देखी गई, फिर दिल्ली में प्रवेश किया। इसके बाद यह लाल किला मेट्रो स्टेशन गेट नंबर-1 के पास पहुंची।
तीन घंटे पार्किंग में रही कार
धमाके से पहले कार करीब तीन घंटे सुनहरी मस्जिद पार्किंग में खड़ी रही। दोपहर 3:19 बजे दाखिल हुई और 6:48 बजे बाहर निकली। सात मिनट बाद धमाका हुआ।
सीसीटीवी फुटेज से सुराग
फुटेज में कार को पार्किंग में जाते और बाहर निकलते देखा गया। अब पुलिस 100 से अधिक सीसीटीवी क्लिप्स और आसपास के टोल प्लाज़ा के वीडियो खंगाल रही है ताकि कार की पूरी मूवमेंट ट्रेस की जा सके।
कार का मालिकाना और कनेक्शन
धमाके में इस्तेमाल I-20 कार का रजिस्ट्रेशन हरियाणा के गुरुग्राम नॉर्थ आरटीओ में मोहम्मद सलमान के नाम पर था। उसने इसे नदीम को बेचा, फिर यह कार कई हाथों से होती हुई उमर मोहम्मद तक पहुंची।
हिरासत में तारिक और आमिर
पुलिस ने पुलवामा के संबूरा से तारिक को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि 2015 में इसी तारिक ने कार उमर को दी थी। इस डील में एक अन्य शख्स आमिर का नाम भी सामने आया है। दोनों से पूछताछ जारी है।
फरीदाबाद कनेक्शन पुख्ता
दिल्ली पुलिस की जांच में यह साबित हुआ है कि धमाके में इस्तेमाल विस्फोटक अमोनियम नाइट्रेट वही था जो फरीदाबाद से हाल ही में बरामद किया गया था। हालांकि अंतिम पुष्टि FSL रिपोर्ट से होगी।
कई संगठनों से लिंक
फरीदाबाद मॉड्यूल के आतंकी जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार गजवात-उल-हिंद (AGuH) जैसे संगठनों से जुड़े हुए थे। वे भारत में आतंकी नेटवर्क मजबूत करने के लिए सक्रिय थे।
गिरफ्तारियां और जब्ती
इस मॉड्यूल में अब तक सात लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनई, डॉ. आदिल अहमद राथर और डॉ. शाहीन शाहिद शामिल हैं। पुलिस ने 2,900 किलो विस्फोटक, हथियारों का जखीरा और कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए हैं।
आतंक विरोधी कानून के तहत केस
दिल्ली पुलिस ने इस ब्लास्ट में UAPA की धारा 16 और 18, विस्फोटक अधिनियम की धारा 3 और 4, और IPC की हत्या व हत्या के प्रयास की धाराएं लगाई हैं। स्पेशल सेल ने जम्मू-कश्मीर और हरियाणा पुलिस से पूरी जानकारी मांगी है।
लाल किला ब्लास्ट का फरीदाबाद लिंक
जांच में यह साफ हो गया है कि दिल्ली ब्लास्ट का धागा फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से जुड़ा हुआ है। हाल ही में इस मॉड्यूल का खुलासा जम्मू-कश्मीर पुलिस ने किया था। इसमें दो पुरुष और एक महिला डॉक्टर शामिल थे, जो आतंकी संगठनों के इशारे पर काम कर रहे थे। डॉ. उमर इस नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा था और फरीदाबाद में हथियारों की बरामदगी के बाद अंडरग्राउंड चला गया था। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, उमर ने ब्लास्ट से पहले अपने साथियों को मैसेज भेजा था— “अब बहुत देर हो चुकी है।”
क्या डॉ. उमर मारा गया?
धमाके के बाद कार के अंदर से एक झुलसा हुआ शव मिला है। दिल्ली पुलिस अब डीएनए टेस्ट के जरिए पुष्टि करेगी कि यह शव डॉ. उमर मोहम्मद का ही है या नहीं। कार के मलबे से मिले दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस फॉरेंसिक जांच में भेजे गए हैं।
एजेंसियों की बड़ी जांच
इस घटना के बाद दिल्ली, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त जांच टीम बनाई है। FSL रिपोर्ट आज आने की संभावना है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि ब्लास्ट में कौन-सा विस्फोटक इस्तेमाल हुआ। खुफिया एजेंसियां अब इस नेटवर्क के विदेशी फंडिंग और पाकिस्तानी लिंक की भी जांच कर रही हैं। फरीदाबाद से लेकर दिल्ली तक फैले इस आतंकी नेटवर्क ने दिखा दिया है कि डॉक्टर और शिक्षित तबका भी आतंक की राह पर भटक सकता है। डॉ.उमर मोहम्मद की हड़बड़ी में की गई कार्रवाई ने कई निर्दोष लोगों की जान ले ली। अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उमर की मौत हो चुकी है, या वह किसी नई साजिश की तैयारी में अब भी जिंदा है।





