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ठंड में जन्नत से कम नहीं प्रयागराज का संगम तट, 14620 किमी का सफर तय कर पहुंचते हैं साइबेरियन मेहमान

DigitalDesk by DigitalDesk
November 8, 2025
in स्पेशल
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Siberian birds travel 14620 km to reach Sangam Prayagraj
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ठंड में जन्नत से कम नहीं प्रयागराज का संगम तट, 14620 किमी का सफर तय कर पहुंचते हैं साइबेरियन मेहमान

सर्दियों के मौसम की दस्तक के साथ ही उत्तर प्रदेश का धार्मिक और सांस्कृतिक नगर प्रयागराज जन्नत से कम नहीं लगता। वजह—सात समंदर पार से उड़कर आने वाले वो विदेशी मेहमान हैं, जो हजारों किलोमीटर की यात्रा तय करके संगम तट पर डेरा जमाते हैं। हर साल अक्टूबर से मार्च तक संगम का आसमान और जल, दोनों ही इन साइबेरियन पक्षियों के कलरव से गूंज उठते हैं।

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संगम पर विदेशी मेहमानों का मेला
जैसे ही गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम सर्द हवाओं से घिरता है, वैसे ही उसकी लहरों पर बर्फीले देश साइबेरिया से आने वाले हजारों पक्षी उड़ान भरते दिखते हैं। उनकी चहचहाहट और पंखों की फड़फड़ाहट संगम के शांत जल को जीवंत कर देती है। यहां का दृश्य इतना मोहक होता है कि पर्यटक और श्रद्धालु दोनों ही कैमरों में इस सुंदरता को कैद करने से खुद को नहीं रोक पाते। पानी की सतह मानो सफेद चादर से ढकी लगती है — यह चादर होती है सैकड़ों साइबेरियन गूल्स और लावरस के झुंडों की। नौका विहार करते श्रद्धालु इन पक्षियों को दाना डालते हैं, और पक्षियों का यह दृश्य संगम की आध्यात्मिकता को एक प्राकृतिक रंग दे देता है।

मुंबई से आई पर्यटक विनिता बोलीं—“दिल खुश हो गया!”

मुंबई से आई विनिता और अनिता ने मुस्कुराते हुए कहा, “हम कॉलेज ग्रुप के साथ आए हैं और हमें पता था कि इस मौसम में साइबेरियन बर्ड्स देखने को मिलेंगी। हमने बहुत सारी फोटो लीं, नजारा देखकर दिल खुश हो गया। सच में, ऐसा दृश्य मुंबई में नहीं देखने को मिलता।”

14620 किलोमीटर का अद्भुत सफर

पक्षी एवं पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, ये साइबेरियन मेहमान दो रास्तों से भारत पहुंचते हैं। एक रास्ता सीधा साइबेरिया से भारत तक लगभग 4800 किलोमीटर लंबा है, जबकि दूसरा, झुंड में घूमते हुए 14620 किलोमीटर का है।
इस यात्रा में ये पक्षी साइबेरिया से निकलकर यूरोप, अफगानिस्तान, मंगोलिया, चीन और तिब्बत के रास्ते भारत पहुंचते हैं। कुछ झुंड राजस्थान के भरतपुर पक्षी विहार में रुकते हैं, तो कुछ प्रयागराज के संगम तट पर पहुंचकर महीनों तक बसेरा करते हैं।

क्यों छोड़ते हैं अपना देश?

सर्दियों में साइबेरिया का तापमान माइनस 30 से 40 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। ऐसे में वहां भोजन और प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां नहीं रहतीं। इसलिए ये पक्षी गर्म और सुरक्षित जगहों की तलाश में हजारों किलोमीटर उड़ान भरकर भारत जैसे देशों की ओर रुख करते हैं। प्रयागराज का संगम तट इनके लिए आदर्श स्थल बन गया है — यहां पर्याप्त जल, भोजन और सुकून भरा वातावरण मिलता है।

किस रफ्तार से उड़ते हैं साइबेरियन बर्ड्स?

पर्यावरणविद् डॉ. मोहम्मद आरिफ बताते हैं कि ये प्रवासी पक्षी लगभग 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरते हैं। रास्ते में कई पड़ावों पर ठहरकर ये अपनी ऊर्जा पुनः प्राप्त करते हैं। इनकी दुनिया भर में करीब 650 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से साइबेरियन गूल, लावरस और सीगल्स प्रयागराज में सबसे आम हैं।

पर्यावरण को लेकर चिंता

डॉ.आरिफ कहते हैं कि बीते कुछ वर्षों में संगम क्षेत्र में बढ़ते जल, वायु और ध्वनि प्रदूषण के कारण इन प्रवासी पक्षियों की संख्या में कमी आई है। यह चिंताजनक संकेत है। श्रद्धालु और पर्यटक इन्हें दाना डालते हैं, परंतु इसमें मिलावट या रासायनिक तत्व इनके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। उन्होंने अपील की है कि लोग स्वच्छ दाना डालें और इन पक्षियों के प्राकृतिक आवास को दूषित न करें।

श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच बढ़ता आकर्षण

प्रयागराज हर साल लाखों श्रद्धालुओं का तीर्थ स्थल होता है, लेकिन सर्दियों में यह धार्मिक नगरी इको-टूरिज्म का भी केंद्र बन जाती है। संगम के जल पर उतरते और उड़ान भरते इन पक्षियों को देखने हजारों पर्यटक दूर-दूर से आते हैं। नौका विहार के दौरान जब नाविक पक्षियों के बीच नाव बढ़ाते हैं, तो लगता है जैसे मनुष्य और प्रकृति का संगम साकार हो गया हो।

संगम तट—जहां आस्था और प्रकृति साथ झूमते हैं

संगम पर सूर्यास्त का समय किसी जादुई पल से कम नहीं होता। जब ढलते सूरज की किरणें पानी पर सुनहरी परत बिछाती हैं और उसी में उड़ते साइबेरियन पक्षी लहरों के ऊपर मंडराते हैं, तो लगता है मानो प्रकृति ने खुद एक चित्र उकेरा हो।

हर साल का इंतजार

संगम तट पर इन विदेशी मेहमानों की मौजूदगी से न सिर्फ प्रयागराज का पर्यटन बढ़ता है, बल्कि स्थानीय लोगों में भी खुशी की लहर दौड़ जाती है। नाविकों, फोटोग्राफरों और दुकानदारों की रोज़ी-रोटी भी इससे जुड़ी होती है। लोग कहते हैं — “जब ये बर्ड्स आती हैं, तो लगता है ठंड की असली शुरुआत हो गई है। सर्दियों के मौसम में प्रयागराज का संगम तट किसी जीवित कविता की तरह होता है — जिसमें श्रद्धा की पंक्तियां हैं। ठंडी हवाओं की लय है और साइबेरियन पक्षियों की चहचहाहट उसका संगीत। हर साल हजारों किलोमीटर दूर से उड़कर आने वाले ये पक्षी सिर्फ प्रकृति की सुंदरता नहीं बढ़ाते, बल्कि हमें याद दिलाते हैं कि जब इंसान और पर्यावरण के बीच सामंजस्य होता है, तभी धरती पर स्वर्ग उतर आता है। प्रकाश कुमार पांडेय

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Tags: #Siberian birds#travel 14620 km to reach Sangam Prayagraj
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