बिहार चुनाव 2025: जब-जब 5% से ज्यादा बढ़ी वोटिंग, तब-तब बदली सरकार… पहले चरण में 8% का इजाफा, किसके लिए बढ़ी टेंशन?
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में इस बार वोटिंग का रिकॉर्ड टूट गया है। 18 जिलों की 121 सीटों पर हुए मतदान में 64.69 फीसदी लोगों ने वोट डाले, जो पिछले चुनाव से करीब साढ़े आठ फीसदी अधिक है। आंकड़े बताते हैं कि बिहार में जब-जब मतदान 5% से ज्यादा बढ़ा है, तब-तब सत्ता परिवर्तन हुआ है। ऐसे में सियासी गलियारों में अब यह सवाल गूंज रहा है—क्या इस बार भी वोटिंग का इजाफा सत्ता पलट का संकेत है?
- बिहार में वोटिंग रिकॉर्ड टूटा
- आठ फीसदी बढ़ी मतदाता भागीदारी
- इतिहास में पहली बार इतना मतदान
- वोटिंग बढ़ी तो बदली सरकार
- पहले चरण ने बढ़ाई टेंशन
- महागठबंधन-एनडीए में कांटे की टक्कर
- मिथिलांचल-कोसी में भारी वोटिंग
- नीतीश सरकार पर बढ़ा दबाव
- मतदान पैटर्न ने दिए संकेत
- बदलाव का बिगुल बजा बिहार
इतिहास गवाह है: वोटिंग बढ़ी, सत्ता बदली
बिहार की चुनावी राजनीति के इतिहास पर नजर डालें तो वोटिंग में बढ़ोतरी हमेशा राजनीतिक हलचल लाती रही है। 1967 में वोटिंग 44.5% से बढ़कर 51.5% हुई और कांग्रेस की सरकार गिर गई। 1980 में मतदान 50.5% से बढ़कर 57.3% हुआ, और इस बार जनता पार्टी सत्ता से बाहर हुई, जबकि कांग्रेस ने वापसी की। 1990 में मतदान 56.3% से बढ़कर 62% पहुंचा और जनता दल ने सत्ता संभाली, जबकि कांग्रेस का बिहार से सफाया हो गया। इस बार पहले चरण में 8.5% ज्यादा वोटिंग हुई है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या 2025 का यह चुनाव भी इतिहास दोहराएगा?
पहले चरण का रिकॉर्ड तोड़ मतदान
पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर 1314 उम्मीदवारों की किस्मत EVM में कैद हो गई। इस बार 64.69% मतदान हुआ, जो अब तक बिहार के इतिहास का सबसे ऊंचा आंकड़ा है।
2020 में पहले चरण में 56.1% वोटिंग हुई थी, जबकि इस बार 8% से ज्यादा का इजाफा दर्ज किया गया। बिहार में इससे पहले सबसे ज्यादा वोटिंग 2000 के विधानसभा चुनाव में हुई थी—62.57%, और लोकसभा चुनाव 1998 में 64.60%। लेकिन इस बार पहले फेज की वोटिंग ने दोनों रिकॉर्ड तोड़ दिए।
कहां कितनी वोटिंग हुई?
मुजफ्फरपुर: 70.96%
समस्तीपुर: 70.63%
वैशाली: 67.37%
मधेपुरा: 67.21%
सहरसा: 66.84%
खगड़िया: 66.36%
लखीसराय: 65.05%
मुंगेर: 60.40%
सीवान: 60.31%
नालंदा: 58.91%
पटना: 57.93%
मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर ने रिकॉर्ड तोड़ा, जबकि पटना में वोटिंग अपेक्षाकृत कम रही। कुल मिलाकर बिहार के मतदाताओं ने इस बार “बदलाव या समर्थन” दोनों में से किसी एक की दिशा में जोरदार वोट डाले हैं।
2020 से अब तक वोटिंग पैटर्न
वर्ष मतदान प्रतिशत सत्ता में
2010 52.1% एनडीए (नीतीश कुमार)
2015 55.9% महागठबंधन
2020 56.1% एनडीए (नीतीश कुमार)
2025 (पहला चरण) 64.69% तय होना बाकी
पिछले तीन चुनावों में मतदान बढ़ने का फायदा नीतीश कुमार को मिला था। लेकिन अंतर केवल 2-3% तक ही सीमित था। अब जब 8% से अधिक का इजाफा हुआ है, तो यह बढ़ी हुई वोटिंग उनके लिए सियासी चुनौती भी बन सकती है।
क्यों माना जा रहा यह चुनाव निर्णायक?
पहले चरण की जिन 121 सीटों पर मतदान हुआ, उनमें 2020 में महागठबंधन और एनडीए का अंतर बेहद कम था।
महागठबंधन: 61 सीटें
एनडीए: 59 सीटें
इन सीटों में आरजेडी ने 42, बीजेपी ने 32, जेडीयू ने 23, कांग्रेस ने 8 और माले ने 7 सीटें जीती थीं। यानी ये सीटें पावर बैलेंस तय करती हैं। अगर इस बार बढ़े हुए मतदान ने एंटी-इंकम्बेंसी (सरकार विरोधी रुझान) दिखाया है, तो नीतीश सरकार के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है।
समीकरण पूरी तरह बदले
इस बार एनडीए और महागठबंधन दोनों के गठबंधन समीकरण अलग हैं।
एनडीए: जेडीयू (57 सीट), बीजेपी (48), एलजेपी (रामविलास) – 13, आरएलएम – 2, हम – 1 सीट।
महागठबंधन: आरजेडी (72), कांग्रेस (24), माले (14), सीपीआई व वीआईपी (6-6), सीपीएम (3), IIP (2 सीटें)।
कुछ सीटों पर फ्रेंडली फाइट भी देखी जा रही है।
वहीं, एआईएमआईएम 8 सीटों पर और जन सुराज पार्टी 114 सीटों पर मैदान में है, जिससे कई जगहों पर त्रिकोणीय मुकाबला बन रहा है।
किसके लिए बढ़ी टेंशन?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ी हुई वोटिंग का असर मुख्यतः सत्तारूढ़ दल पर पड़ता है। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पिछले 20 साल से सत्ता में है। बढ़ा हुआ मतदान यह संकेत हो सकता है कि जनता बदलाव चाह रही है। हालांकि, दूसरी ओर बीजेपी और जेडीयू के नेता इसे “जनता का भरोसा” बता रहे हैं। आरजेडी का दावा है कि इस बार की रिकॉर्ड वोटिंग महागठबंधन के पक्ष में लहर का संकेत है।
क्या कहता है विश्लेषण?
फर्जी वोटर हटने और नए युवा मतदाताओं के जुड़ने से मतदान प्रतिशत बढ़ा है। महिलाओं की भागीदारी भी अभूतपूर्व रही—करीब 66% महिला वोटर घर से निकलीं। ग्रामीण इलाकों में मतदान शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक रहा, जिससे ग्रामीण मुद्दों (रोजगार, बिजली, कृषि) की अहमियत बढ़ी है। इस बार का मतदान दर केवल राजनीतिक उत्साह नहीं, बल्कि जनता के मन में किसी बदलाव या मजबूती की भावना का भी संकेत देता है।
बिहार में दूसरे चरण की वोटिंग
बिहार में जब-जब 5% से ज्यादा वोटिंग बढ़ी, तब-तब सत्ता बदली—यह ऐतिहासिक सच है। अब जब पहले चरण में 8% का उछाल दर्ज हुआ है, तो राजनीतिक समीकरण हिलने लाजिमी हैं।
पहला चरण यह तय कर सकता है कि 2025 का बिहार चुनाव बदलाव का प्रतीक बनेगा या फिर स्थिरता का। सभी की निगाहें अब दूसरे चरण की वोटिंग और नतीजों पर टिकी हैं। प्रकाश कुमार पांडेय




