Weather News: 55 की रफ्तार से बंगाल की खाड़ी से आ रहा टेंशन, फिर शुरू होगा मौसम का तांडव!
Bay Of Bengal Weather Update: बंगाल की खाड़ी एक बार फिर से मौसम वैज्ञानिकों के लिए चिंता का सबब बन गई है। समुद्र के ऊपर नया लो प्रेशर (निम्न दबाव) क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है, जो अगले 24 घंटे में डिप्रेशन या चक्रवात का रूप ले सकता है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि यह सिस्टम अभी म्यांमार के दक्षिणी हिस्से और अंडमान सागर के पास सक्रिय है, और इसका रूख पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर है। हालांकि विभाग ने राहत देते हुए कहा है कि फिलहाल यह तूफान पिछले चक्रवात मोंथा जितना विकराल नहीं होगा, लेकिन मछुआरों और तटीय इलाकों के लोगों को सतर्क रहना जरूरी है।
- बंगाल की खाड़ी में नया तनाव
- लो प्रेशर सिस्टम हुआ सक्रिय
- 24 घंटे में डिप्रेशन संभव
- IMD ने जारी किया अलर्ट
- हवा की रफ्तार पहुंची पचपन
- मछुआरों को समुद्र में रोकने सलाह
- तमिलनाडु में फिलहाल सामान्य मौसम
- आंध्र तट पर हल्की बारिश संकेत
- अरब सागर सिस्टम हुआ कमजोर
- चक्रवात बनेगा या नहीं संशय
- नया लो प्रेशर सिस्टम बना तनाव का कारण
चेन्नई स्थित क्षेत्रीय मौसम केंद्र (RMC) ने रविवार को अपने बुलेटिन में कहा कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर नया निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। यह वही इलाका है जहां से पहले भी कई बड़े चक्रवात—फोनी, यास, और मोंथा—ने जन्म लिया था।
विभाग के अनुसार, “दक्षिणी म्यांमार और उससे सटे अंडमान सागर के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन मौजूद है, जो अगले 24 घंटों में मजबूत होकर निम्न दबाव के क्षेत्र में विकसित हो सकता है।” इसकी दिशा और तीव्रता पर मौसम वैज्ञानिकों की पैनी नजर है। अगर यह आगे और सक्रिय होता है, तो यह बंगाल की खाड़ी के मध्य भाग में डिप्रेशन बनकर उभरेगा और फिर चक्रवात में बदल सकता है।
तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश पर नजर
फिलहाल, मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि तमिलनाडु में अगले सात दिनों तक भारी बारिश की कोई संभावना नहीं है। हालांकि अगर सिस्टम तेज़ी से मजबूत हुआ, तो इसके असर से आंध्र प्रदेश और उत्तर तमिलनाडु के तटीय जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस सिस्टम की गतिविधि अगले 48 घंटे में यह तय करेगी कि यह साधारण डिप्रेशन रहेगा या चक्रवात में तब्दील होगा। अगर हवा की दिशा और समुद्र का तापमान अनुकूल रहा, तो यह उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए भारत के पूर्वी तट को प्रभावित कर सकता है।
अरब सागर में भी मौसम का खेल
इस बीच, अरब सागर में पहले से बना निम्न दबाव क्षेत्र अब कमजोर पड़ चुका है। यह सिस्टम 31 अक्टूबर से सक्रिय था और अब गुजरात के दक्षिणी तटीय इलाकों की ओर बढ़ते हुए विलुप्त होने की कगार पर है। हालांकि, IMD ने कहा है कि यह क्षेत्र दोबारा हल्के निम्न दबाव में बदल सकता है और दक्षिण गुजरात तट पर हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी। इस सिस्टम के प्रभाव से आने वाले 24 घंटों में सौराष्ट्र और कच्छ के कुछ हिस्सों में बौछारें देखने को मिल सकती हैं।
मछुआरों को जारी की गई चेतावनी
सबसे अहम चेतावनी मछुआरों के लिए जारी की गई है। मौसम विभाग ने कहा है कि दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और उससे सटे अंडमान सागर में हवाओं की रफ्तार 35 से 45 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जो कभी-कभी 55 किमी प्रति घंटा तक भी जा सकती है। ऐसे में समुद्र में मछली पकड़ने जाने वाले नौकाओं को अगले कुछ दिनों तक किनारे पर ही रुकने की सलाह दी गई है। यह चेतावनी अंडमान-निकोबार, ओडिशा, और आंध्र प्रदेश तटों के लिए भी लागू की गई है।
तमिलनाडु में सामान्य रहेगा मौसम
दक्षिण भारत में इस समय बारिश का बड़ा खतरा नहीं है। चेन्नई और आसपास के इलाकों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना जताई गई है। तापमान की बात करें तो अधिकतम तापमान 34-35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25-26 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बंगाल की खाड़ी का सिस्टम सक्रिय हुआ, तो अगले सप्ताह के मध्य से तमिलनाडु, पुदुचेरी और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में मौसम में हल्का बदलाव देखने को मिलेगा।
क्या बनेगा नया चक्रवात?
IMD के वैज्ञानिकों के मुताबिक, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह सिस्टम चक्रवात बनेगा या नहीं। इसके लिए समुद्र की सतह का तापमान (Sea Surface Temperature) और ऊपरी वायुमंडलीय परिस्थितियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। अगर परिस्थितियाँ अनुकूल रहती हैं, तो यह सिस्टम ‘डिप्रेशन’ से बढ़कर ‘डीप डिप्रेशन’ और फिर ‘साइक्लोन’ का रूप ले सकता है। इसकी दिशा उत्तर-पश्चिम की ओर मानी जा रही है, जिससे आंध्र प्रदेश, ओडिशा, और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों को सतर्क रहना पड़ सकता है।
पिछले चक्रवातों जैसी चुनौती नहीं
विभाग ने राहत की खबर भी दी है। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, यह सिस्टम पिछले चक्रवात “मोंथा” जैसी विकरालता नहीं दिखाएगा। मोंथा ने इस साल जून में पूर्वी तट पर तबाही मचाई थी, जिससे सैकड़ों गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई थी।
हालांकि, मौसम विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि नवंबर और दिसंबर बंगाल की खाड़ी के लिए ‘साइक्लोन सीजन’ माने जाते हैं, और ऐसे में समुद्री परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए रखना जरूरी है।
बंगाल की खाड़ी का यह नया सिस्टम मौसम वैज्ञानिकों के लिए फिलहाल “वॉच ज़ोन” में है। हवा की रफ्तार और दिशा में छोटे बदलाव भी इसके प्रभाव को बढ़ा या घटा सकते हैं। मौसम विभाग ने तटीय राज्यों की सरकारों को भी अलर्ट पर रहने को कहा है, ताकि किसी आपात स्थिति में तटीय इलाकों की जनता को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। यानी, बंगाल की खाड़ी में फिलहाल मौसम का “टेंशन” बढ़ रहा है, पर घबराने की नहीं। सतर्कता और तैयारी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। ( प्रकाश कुमार पांडेय)





