75 जिलों से जुटे 60 लाख सुझाव — उत्तर प्रदेश के विकास का नया खाका तैयार करने में जुटी योगी सरकार
लखनऊ से विशेष रिपोर्ट। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को वर्ष 2047 तक “विकसित प्रदेश” बनाने की दिशा में एक नया और व्यापक कदम उठाया है। “समर्थ उत्तर प्रदेश–विकसित उत्तर प्रदेश @2047 : समृद्धि का शताब्दी पर्व महाअभियान” नामक यह कार्यक्रम अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। राज्य के 75 जिलों से अब तक 60 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं, जो प्रदेश के विकास के नए रोडमैप को आकार दे रहे हैं।
यह अभियान न सिर्फ सरकारी स्तर पर, बल्कि जनता की सक्रिय भागीदारी से संचालित हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी ने इस पहल को “लोकतांत्रिक विकास की नई परंपरा” बताते हुए कहा कि “जब जनता अपने विकास की दिशा तय करती है, तब योजनाएं केवल कागज पर नहीं, ज़मीन पर उतरती हैं।”
जनभागीदारी से आकार ले रहा ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ का सपना
राज्य के सभी 75 जिलों में नोडल अधिकारी, प्रशासनिक टीमें और विशेषज्ञ लगातार संवाद कर रहे हैं। इस दौरान छात्रों, शिक्षकों, किसानों, उद्यमियों, महिला समूहों और नागरिकों से सुझाव लिए जा रहे हैं। अब तक samarthuttarpradesh.up.gov.in पोर्टल पर 60 लाख फीडबैक प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें 75 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों से आए हैं। इन सुझावों का विश्लेषण कर सरकार एक “विजन डॉक्यूमेंट 2047” तैयार कर रही है, जो उत्तर प्रदेश की भावी विकास यात्रा का मार्गदर्शक बनेगा।
उद्योग और शिक्षा पर विशेष जोर
जनता के सुझावों में शिक्षा और उद्योग दो प्रमुख विषय बनकर उभरे हैं। बुलंदशहर के रिकेश कुमार ने सुझाव दिया कि गांवों में उद्योग और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने से पलायन की समस्या समाप्त हो सकती है। उन्होंने पीपीपी मॉडल के तहत ग्रामीण युवाओं को प्राथमिकता देने की बात कही। वहीं,अलीगढ़ के शकील खान ने कहा कि “राज्य को औद्योगिक शक्ति बनाने के लिए एमएसएमई सेक्टर को आसान ऋण और तकनीकी सहयोग मिलना चाहिए।” उनका मानना है कि प्रत्येक जिले में उद्योग पार्क स्थापित किए जाने चाहिए।
महिलाओं और उद्यमियों की नई सोच
महिला उद्यमियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। निगार फातिमा ने निवेश को बढ़ावा देने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम और महिला स्किल मिशन पर जोर दिया। सीमा कुमारी ने सुझाव दिया कि “कढ़ाई, सिलाई, अगरबत्ती निर्माण जैसे कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने से महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी।” जोगिंदर सिंह ने कहा कि “शिक्षा को व्यावहारिक और कौशल आधारित बनाना जरूरी है ताकि युवा रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें।”
पर्यटन और संस्कृति पर भी ध्यान
धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर भी कई सुझाव आए हैं। अंकित गुप्ता ने मां बेला देवी धाम और शनिदेव मंदिर जैसे स्थलों के विकास की मांग की। डॉक्टर सुनील शाह ने बेल्हा देवी मंदिर कॉरिडोर के निर्माण का सुझाव दिया।
रीता जायसवाल और रामेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि “पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता, दर्शन व्यवस्था और सांस्कृतिक आयोजनों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।” इससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान और अर्थव्यवस्था दोनों को बल मिलेगा।
खेल और शिक्षा में ग्रामीण भागीदारी
बलिया की गीता देवी ने कहा कि “खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रमों को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए।” वहीं, प्रदीप कुमार ने सुझाव दिया कि हर गांव में डिजिटल लाइब्रेरी और रोजगार सृजन केंद्र खोले जाएं, ताकि ग्रामीण युवा भी अवसरों से जुड़ सकें।
साफ-सुथरे प्रशासन और सुरक्षा पर सुझाव
प्रदेश के नागरिकों ने प्रशासनिक पारदर्शिता और महिला सुरक्षा पर भी जोर दिया है। बरेली के राजकुमार सिंह ने कहा कि “प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जाए।” उन्होंने फलदार वृक्षारोपण को अनिवार्य करने और पुरानी पेंशन योजना पर विचार करने की मांग भी रखी। बस्ती की शाइस्ता फिरोज़ ने महिला सुरक्षा और स्किल मिशन पर बल दिया, जबकि गाजियाबाद के राजेश अग्निहोत्री ने कहा कि “कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सुधार किसी भी विकास योजना की रीढ़ हैं।”
युवाओं की सबसे बड़ी भागीदारी
इस महाअभियान में सबसे अधिक भागीदारी युवाओं की रही है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, कुल 60 लाख में से 30 लाख सुझाव 31 वर्ष से कम उम्र के युवाओं ने दिए हैं। वहीं 26 लाख सुझाव 31 से 60 वर्ष आयु वर्ग से और 3 लाख वरिष्ठ नागरिकों से प्राप्त हुए हैं।
कृषि और शिक्षा बने प्रमुख विषय
प्राप्त फीडबैक में कृषि क्षेत्र से 16 लाख और शिक्षा क्षेत्र से 15 लाख सुझाव मिले हैं। इसके अलावा ग्रामीण विकास, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, पशुधन, आईटी और टेक सेक्टर से भी हजारों सुझाव प्राप्त हुए हैं। जौनपुर जिला पहले स्थान पर है, जबकि संभल, गाजीपुर, प्रतापगढ़ और बिजनौर क्रमशः दूसरे से पांचवें स्थान पर हैं।
जनसंवाद बैठकों से बढ़ा भरोसा
राज्यभर में 50,000 ग्राम पंचायतों, 18 नगर निगमों और 214 नगर पालिकाओं में जन-जागरूकता और संवाद बैठकों का आयोजन किया गया है। इन बैठकों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और नागरिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ है, जिससे शासन और जनता के बीच भरोसा और सहभागिता दोनों मजबूत हुई हैं। भविष्य की दिशा तय करता महाअभियान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि “विकास का खाका जनता के सुझावों से तैयार होगा। यही सच्चे अर्थों में लोकतंत्र और जनसहभागिता की पहचान है।” यह महाअभियान उत्तर प्रदेश को 2047 तक आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित राज्य बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इससे न केवल योजनाओं की प्राथमिकताएं तय होंगी, बल्कि जनता की अपेक्षाओं और सरकार की नीतियों के बीच सीधा सामंजस्य भी स्थापित होगा। “समर्थ उत्तर प्रदेश – विकसित उत्तर प्रदेश @2047” अब केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि 22 करोड़ जनता का साझा सपना बन चुका है — ऐसा सपना जो उत्तर प्रदेश को भारत के विकास इंजन के रूप में स्थापित करने की ओर बढ़ रहा है। ( प्रकाश कुमार पांडेय)





