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दीपावली पर देश की अर्थव्यवस्था को मिला बूस्टर…उत्सव, अर्थशास्त्र और आत्मनिर्भर भारत का संगम…

DigitalDesk by DigitalDesk
October 21, 2025
in दिल्ली, धर्म, बिजनेस, मुख्य समाचार, शहर और राज्य, संपादक की पसंद
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country economy got a booster on Diwali confluence of celebration economics and self reliant India
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दीपावली पर देश की अर्थव्यवस्था को बूस्टर…उत्सव, अर्थशास्त्र और आत्मनिर्भर भारत का संगम…

दीपावली सिर्फ रोशनी और उमंग का पर्व नहीं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था का वार्षिक इंजन बन चुकी है। त्योहारी सीजन की शुरुआत होते ही देशभर में न सिर्फ रोशनी बढ़ती है, बल्कि खरीददारी और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार भी कई गुना तेज हो जाती है। साफ है ​कि अब दीपावली “इकोनॉमिक फेस्टिवल ऑफ इंडिया” बन गई है।

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  • वोकल फॉर लोकल का असर
  • खरीददारी से बढ़ी लिक्विडिटी
  • जमकर हुई स्वदेशी उत्पादों की बिक्री
  • ऑनलाइन शॉपिंग में रिकॉर्ड उछाल
  • रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर में तेजी
  • सोना-चांदी के बाजार में चमक
  • जीएसटी राहत ने बढ़ाई खरीददारी
  • दीयों से रोशन अर्थव्यवस्था
  • कारीगरों को मिला रोजगार अवसर
  • दीपावली बनी इकोनॉमिक बूस्टर

धनतेरस से शुरू होने वाले पांच दिवसीय दीपोत्सव को जहां धार्मिक दृष्टि से समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, वहीं आर्थिक दृष्टि से यह देश की इकोनॉमिक ग्रोथ का बूस्टर सीजन बन चुका है। क्योंकि इन दिनों बाजारों की चकाचौंध, उपभोक्ताओं की बढ़ती खरीदारी और स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती मांग भारत की अर्थव्यवस्था को नई ताकत देती है।

धनतेरस से दीपावली तक का आर्थिक सफर

धनतेरस का दिन भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा के साथ धन और स्वास्थ्य की कामना का प्रतीक है। इस दिन से ही खरीददारी का सिलसिला शुरू होता है। चाहे गाड़ी हो या सोना, कपड़ा हो या किचन का बर्तन — हर वर्ग का व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार कुछ न कुछ जरूर खरीदता है। यही परंपरा आज भारत की फेस्टिव इकोनॉमी (Festive Economy) को जन्म दे चुकी है। जहां हर दीपावली, करोड़ों का व्यापार और अरबों का निवेश लेकर आती है।

बाजारों में रौनक और खरीदारों की भीड़

नवरात्रि के बाद से ही देशभर के बाजारों में त्योहारी चमक लौट आई है। इस साल सरकार द्वारा कई वस्तुओं पर जीएसटी में कटौती ने खरीददारी को और बढ़ावा दिया है। दिल्ली से लेकर जयपुर, भोपाल से लेकर चेन्नई तक — हर जगह “फेस्टिव डिस्काउंट और सेविंग सेल” का माहौल है। जिससे व्यापारी भी खुशी हैं। इस बार लोगों का मूड बहुत पॉज़िटिव है, जीएसटी कम होने से बिक्री पिछले साल के मुकाबले 30% बढ़ी है।

स्वदेशी उत्पादों की मांग में उछाल

कोविड के बाद प्रधानमंत्री मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का असर अब साफ दिख रहा है। इस बार लोग चीन से आए सस्ते उत्पादों के बजाय स्थानीय कारीगरों द्वारा बने मिट्टी के दीये, मूर्तियां, हैंडमेड डेकोरेशन, वॉल हैंगिंग, मिठाइयां और घरेलू बर्तन खरीद रहे हैं। इस बदलाव ने देश की मैन्युफैक्चरिंग और छोटे उद्योगों को नई जान दी है। जहां पहले बाजारों पर विदेशी उत्पादों का कब्जा था, वहीं अब देशी उत्पादों ने अपनी जगह बना ली है। उपभोक्ताओं का कहना है “हम हर साल सिर्फ लोकल चीजें खरीदते हैं। इससे देश का पैसा देश में रहता है।”

दीपावली और देश की अर्थव्यवस्था

दीपावली के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था में लगभग 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन होता है। व्यापारियों के संगठन CAIT (Confederation of All India Traders) के मुताबिक, इस साल त्योहारी बिक्री 4.75 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर को पार कर चुकी है। CAIT के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल की माने तो इस बार दो प्रमुख कारण हैं — जीएसटी में राहत और लोकल प्रोडक्ट की बढ़ती मांग, जिसने दीपावली की बिक्री को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है।

त्योहारी सीजन से जुड़ी प्रमुख इंडस्ट्रीज

दीपावली सिर्फ सजावट और मिठाई तक सीमित नहीं है। बल्कि यह रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल, ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, और एफएमसीजी सेक्टर के लिए सबसे ज्यादा कमाई का समय होता है।

रियल एस्टेट: घर और प्रॉपर्टी की बिक्री में तेजी।
ऑटोमोबाइल सेक्टर: नई कारों और टू-व्हीलर की रिकॉर्ड डिलीवरी हुई। ज्वेलरी मार्केट: सोने-चांदी की बिक्री में 40% तक वृद्धि हुई। एफएमसीजी और फूड मार्केट: मिठाइयों, नमकीनों और गिफ्ट पैक्स की मांग बढ़ी है।

कैसे दीपावली बन गई ‘इकोनॉमिक बूस्टर’
उपभोक्ता खर्च में इजाफा। दीपावली के दौरान लोगों ने हर प्रकार की वस्तुओं पर खर्च किया।
लिक्विडिटी का बढ़ना
मार्केट में कैश फ्लो बढ़ने से व्यापारिक गतिविधियां तेज होती हैं।
रोजगार सृजन
कारीगर, शिल्पकार, मिठाई बनाने वाले, डेकोरेशन आइटम निर्माता — सभी को काम मिला।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
दीपावली से पहले किसानों की खरीफ फसल बिकती है। जिससे उनकी खरीद क्षमता बढ़ी है।

ऑनलाइन मार्केट का उभार

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे Amazon, Flipkart और Meesho पर दीपावली सीजन में 50-60% की ग्रोथ दर्ज की जाती है।

स्वदेशी की लहर से आत्मनिर्भर भारत

त्योहारों में लोकल उत्पादों की बढ़ती मांग ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न को मजबूती दी है। अब भारत में बनने वाले सजावटी सामान, दीये, खिलौने, और उपहार विदेशों तक एक्सपोर्ट हो रहे हैं। मिट्टी के दीये बनाने वाले छोटे कारीगरों से लेकर हस्तनिर्मित मिठाई बेचने वाले दुकानदार तक — सभी इस पर्व को अपनी आजीविका का सबसे बड़ा अवसर मानते हैं।

दीपावली का अर्थशास्त्र

क्षेत्र आर्थिक असर
खुदरा बाजार बिक्री में 25–30% की बढ़ोतरी
ई-कॉमर्स ₹1.25 लाख करोड़ से अधिक कारोबार
रियल एस्टेट घरों की बिक्री में 20% इजाफा
ज्वेलरी सोना-चांदी की खरीद में 35% वृद्धि
ऑटोमोबाइल 4 लाख से अधिक नई गाड़ियाँ बिकीं

दीपावली अब सिर्फ रोशनी का नहीं, बल्कि समृद्धि और स्वावलंबन का उत्सव बन चुकी है। हर दीया जो किसी के घर जलता है, वह किसी कारीगर की मेहनत का उजाला भी होता है।और जब देश के करोड़ों लोग एक साथ कुछ नया खरीदा। तो वह केवल खुशियां नहीं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने का माध्यम बन जाता है। दीपावली आज भारत की आर्थिक धड़कन बन चुकी है। यह सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की रोज़ी, उम्मीद और विकास का प्रतीक है। प्रकाश कुमार पांडेय

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Tags: #Boosting country economy#confluence of festival#Diwali or country economy#economy and self-reliant India
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