पर्सनैलिटी राइट्स: सेलिब्रिटीज़ की पहचान की कानूनी ढाल….आशा भोसले पहुंचीं बॉम्बे हाईकोर्ट
अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय जैसे दिग्गज कलाकारों के बाद अब मशहूर गायिका आशा भोसले भी पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर अदालत का रुख किया है। हाल ही में उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, जिसमें यह मांग की गई थी कि उनके नाम, आवाज और पहचान का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना न किया जाए। कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि बिना अनुमति सेलिब्रिटी की आवाज, नाम या छवि का इस्तेमाल करना उनके पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन है।
पर्सनैलिटी राइट्स: सेलिब्रिटीज़ की पहचान की ढाल
- आशा भोसले पहुंचीं बॉम्बे हाईकोर्ट
- बिना अनुमति पहचान का इस्तेमाल रोक
- क्या होते हैं पर्सनैलिटी राइट्स?
- दो प्रमुख अधिकार शामिल होते
- भारत में कानून क्या कहता
- बिना अनुमति पहचान का इस्तेमाल रोकआशा भोसले की शिकायत में एआई कंपनी Mayk, ई-कॉमर्स साइट्स अमेज़न और फ्लिपकार्ट, सर्च इंजन गूगल और एक स्वतंत्र कलाकार का नाम शामिल था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्लेटफॉर्म्स पर उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि एआई टूल्स का इस्तेमाल कर किसी सेलिब्रिटी की आवाज या व्यक्तित्व की नकल करना गैरकानूनी है। यह न केवल उनके व्यक्तित्व पर आघात करता है, बल्कि उनकी पब्लिक और प्राइवेट आइडेंटिटी के लिए भी गंभीर खतरा है।
क्या होते हैं पर्सनैलिटी राइट्स?
पर्सनैलिटी राइट्स वास्तव में किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व की रक्षा करने का अधिकार है। इसमें नाम, तस्वीर, आवाज, हस्ताक्षर और पहचान जैसे तत्व शामिल होते हैं। आमतौर पर यह अधिकार उन लोगों के लिए अधिक अहम है जो पब्लिक फिगर हैं, क्योंकि उनकी पहचान का व्यावसायिक इस्तेमाल आसानी से किया जा सकता है। कंपनियां अक्सर अपने प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ाने के लिए सेलिब्रिटीज़ के नाम या तस्वीरों का इस्तेमाल करती हैं। यही कारण है कि मशहूर हस्तियां पर्सनैलिटी राइट्स की कानूनी सुरक्षा चाहती हैं।
दो प्रमुख अधिकार शामिल होते
पर्सनैलिटी राइट्स को दो भागों में बाँटा जाता है। पहला है प्रचार का अधिकार (Right of Publicity), यानी किसी भी व्यक्ति की तस्वीर, नाम या व्यक्तित्व का बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल रोकने का अधिकार। दूसरा है निजता का अधिकार (Right of Privacy), जिसमें व्यक्ति के निजी जीवन या व्यक्तित्व को उसकी मर्जी के बिना सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। यह ट्रेडमार्क अधिकार जैसा लगता है, लेकिन दोनों पूरी तरह समान नहीं हैं। ट्रेडमार्क किसी उत्पाद या ब्रांड की पहचान है, जबकि पर्सनैलिटी राइट्स सीधे व्यक्ति के व्यक्तित्व से जुड़े होते हैं।
भारत में कानून क्या कहता है
भारत में पर्सनैलिटी राइट्स के लिए अलग से कोई विशेष कानून नहीं है, लेकिन कई प्रावधान इसके अंतर्गत आते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में निजता और गोपनीयता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना गया है। इसके अलावा, कॉपीराइट अधिनियम 1957 कलाकारों और लेखकों को नैतिक अधिकार देता है। इसमें एक्टर, सिंगर, म्यूजिशियन और डांसर शामिल हैं। उन्हें अपने काम का श्रेय लेने और उसके दुरुपयोग को रोकने का अधिकार मिलता है। वहीं, ट्रेडमार्क अधिनियम 1999 की धारा-14 व्यक्तिगत नामों और अभ्यावेदन के दुरुपयोग पर रोक लगाती है।
जानें कैसे तय होता है हर्जाना?
जब किसी सेलिब्रिटी के पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन होता है तो अदालत इस बात पर गौर करती है कि उस नाम, तस्वीर या आवाज का इस्तेमाल किस हद तक हुआ है। यदि इसका उपयोग किसी ब्रांड प्रमोशन, विज्ञापन या व्यावसायिक लाभ के लिए किया गया है, तो हर्जाने की राशि अधिक तय की जाती है। अदालत यह भी देखती है कि सेलिब्रिटी की छवि को कितना नुकसान हुआ है और उस उत्पाद से कितना मुनाफा कमाया गया। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए क्षतिपूर्ति की रकम का निर्धारण किया जाता है।
अमिताभ बच्चन से लेकर आशा भोसले तक, बड़ी हस्तियों का पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर अदालत जाना यह दर्शाता है कि बदलते डिजिटल और एआई दौर में यह मुद्दा और भी गंभीर हो गया है। आवाज, नाम और तस्वीर अब सिर्फ स्वयं की पहचान नहीं रहे, बल्कि दूसरों के लिए भी बड़ी कमाई का जरिया बन गए हैं। ऐसे में मशहूर हस्तियों को अपनी पहचान की कानूनी सुरक्षा लेना बेहद जरूरी हो गया है। अदालतों के सख्त रुख ने यह साफ कर दिया है कि किसी भी व्यक्ति की पहचान का गलत या बिना अनुमति इस्तेमाल अब भारी नुकसान का कारण बन सकता है।





