बरेली में तौकीर की साजिश का खुलासा…मुस्लिमों को ताकत दिखाने लिए की थी पुलिसवालों की हत्या की बात
उत्तर प्रदेश के बरेली में जुमे की नमाज़ के बाद शहर का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। भीड़ ने पथराव, आगजनी और नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने हालात काबू करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हो गए और शहर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
- जुमे की नमाज़ के बाद भड़की हिंसा
- तौकीर रजा मुख्य आरोपी
- बरेली हिंसा में तौकीर रजा पर शिकंजा
- पुलिस की FIR से बड़े खुलासे
पुलिस की एफआईआर में इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा को मुख्य आरोपी बताया गया है। एफआईआर में साफ लिखा गया है कि तौकीर रजा की अपील पर ही भीड़ इकट्ठा हुई और उन्होंने कथित रूप से कहा कि “आज माहौल बिगाड़ना है, चाहे पुलिस वालों की हत्या करनी पड़े, मुस्लिमों को ताकत दिखानी है।” इसी कॉल पर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।
भड़काऊ नारे और हिंसा का रूप
हिंसक भीड़ “गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, सर तन से जुदा” और सरकार विरोधी नारे लगाती रही। एफआईआर में दर्ज है कि भीड़ ने पुलिस पर फायरिंग की, धारदार हथियारों से हमला किया और पेट्रोल बम तक फेंके। कई पुलिसकर्मी घायल हो गए, उनके डंडे और बैज तक छीने गए। बरेली पुलिस के अनुसार, हिंसा को अंजाम देने के लिए बाहरी जिलों से भी लोगों को बुलाया गया था।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां
पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए अब तक 49 लोगों को गिरफ्तार किया है। कुल 10 एफआईआर दर्ज की गई हैं जिनमें 180 नामजद और करीब 2500 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें 5 एफआईआर कोतवाली, 2 बरादरी, 1 प्रेमनगर और 1 कैंट थाने में दर्ज हुई है। तौकीर रजा समेत कई लोगों पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान और हिंसा भड़काने के गंभीर आरोप लगे हैं।
इंटरनेट सेवाएं बहाल, हालात काबू में
शहर में तनाव को देखते हुए मोबाइल इंटरनेट और मैसेजिंग सेवाएं बंद कर दी गई थीं। रविवार को प्रशासन ने आंशिक रूप से सेवाएं बहाल कीं। वाई-फाई और एसएमएस सेवा चालू हो चुकी है जबकि मोबाइल डेटा सेवा दोपहर बाद बहाल की जाएगी। फिलहाल बरेली में हालात काबू में बताए जा रहे हैं और पुलिस चौकसी बढ़ा दी गई है। कुल मिलाकर, बरेली की इस हिंसा ने एक बार फिर कट्टरपंथ और सियासत के खतरनाक मेल को उजागर कर दिया है। पुलिस की एफआईआर ने साफ कर दिया है कि हिंसा कोई अचानक भड़की घटना नहीं थी, बल्कि योजनाबद्ध साजिश का नतीजा थी। प्रशासन की कड़ी कार्रवाई और इंटरनेट सेवाओं की बहाली से फिलहाल हालात संभलते दिख रहे हैं, लेकिन असली परीक्षा न्यायिक प्रक्रिया और दोषियों की सजा पर टिकी है।





