लद्दाख में हाल ही में भड़की हिंसा के बाद पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर पुलिस ने बड़ा बयान दिया है। लद्दाख के डीजीपी एस.डी. सिंह जमवाल ने दावा किया कि 24 सितंबर की घटना के पीछे वांगचुक और उनके समर्थकों की बड़ी भूमिका रही। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत की प्रक्रिया को भटकाने और माहौल खराब करने का प्रयास जानबूझकर किया गया। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई और कई नागरिकों, पुलिस और सुरक्षाबलों के जवान घायल हुए।
बातचीत से पहले तनाव का माहौल
डीजीपी जमवाल ने बताया कि 6 अक्टूबर को केंद्र और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता होनी थी। इससे पहले 25 और 26 सितंबर को प्रारंभिक बैठकें भी तय थीं। लेकिन 10 सितंबर से भूख हड़ताल और भड़काऊ भाषणों ने माहौल बिगाड़ दिया। उन्होंने कहा कि इन हालात ने सरकार और स्थानीय लोगों के बीच संवाद को कमजोर कर दिया।
विदेशी कनेक्शन की जांच
जमवाल ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि सोनम वांगचुक के पाकिस्तान और बांग्लादेश के अधिकारियों से संपर्क की बात सामने आई है। उनके मुताबिक, वांगचुक की सीमा पार यात्राओं और विदेशी नेताओं से मुलाकात की जांच की जा रही है। उन्होंने साफ किया कि “योजना और समन्वय पहले से तय था, इसलिए गिरफ्तार करना जरूरी था।”
हिंसा और नुकसान
पुलिस प्रमुख ने कहा कि 24 सितंबर को करीब पांच से छह हजार लोगों ने सरकारी इमारतों और राजनीतिक दलों के दफ्तरों पर हमला किया। इस दौरान चार लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन को कर्फ्यू लागू करना पड़ा। अब दो चरणों में ढील देने की तैयारी है।
एनएसए के तहत गिरफ्तारी
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर सेंट्रल जेल भेजा गया है। अधिकारियों के अनुसार, लेह में प्रदर्शनों के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया और शुक्रवार रात को जोधपुर जेल शिफ्ट किया गया। पुलिस का कहना है कि यह कदम आगे तनाव रोकने के लिए जरूरी था।





