बनारस में रायबरेली का बदला:अजय राय नजरबंद…दिनेश प्रताप के एक्शन का कांग्रेस का रिएक्शन
राहुल गांधी के खिलाफ रायबरेली में विरोध के बाद कांग्रेस ने वाराणसी में पीएम मोदी के दौरे का विरोध करने का ऐलान, पुलिस ने अजय राय सहित कई नेताओं को हाउस अरेस्ट किया
रायबरेली से वाराणसी तक राजनीति में तकरार
उत्तर प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को गरमाहट बढ़ गई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ रायबरेली में हुए बीजेपी के विरोध प्रदर्शन के बाद कांग्रेस ने पलटवार का ऐलान किया। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी दौरे के खिलाफ प्रदर्शन करने की बात कही। इसके चलते कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को वाराणसी में उनके घर पर नजरबंद कर दिया गया।
राहुल गांधी का रायबरेली दौरा और बीजेपी का विरोध
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के दो दिवसीय दौरे पर बुधवार को पहुंचे। जैसे ही उनका काफिला हाईवे से गुजरा, बीजेपी नेता और योगी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह अपने समर्थकों के साथ सड़क पर धरने पर बैठ गए।
बीजेपी कार्यकर्ता लगातार नारेबाजी कर रहे थे। करीब 15 मिनट तक राहुल का काफिला हाईवे पर रुका रहा। इस दौरान पुलिस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हुई।
सुरक्षा में सेंध और कांग्रेस की नाराजगी
रायबरेली में पहली बार ऐसा हुआ जब राहुल गांधी के काफिले को सीधे सड़क पर रोका गया। पहले भी विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं, लेकिन इस तरह उनकी सुरक्षा में खलल नहीं पड़ा था। कांग्रेस नेताओं ने इसे गंभीर चूक बताया। कांग्रेस नेता दीपक सिंह ने कहा— “दिनेश प्रताप सिंह कुछ चंद लोगों के साथ सड़क पर बैठकर काफिला रोकते हैं, यह शर्मनाक है। इससे उनकी सोच का पता चलता है।”
कांग्रेस का पलटवार… वाराणसी में विरोध का ऐलान
राहुल के खिलाफ प्रदर्शन से नाराज कांग्रेस ने जवाबी रणनीति अपनाई। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने एलान किया कि कांग्रेस पीएम मोदी के वाराणसी दौरे का विरोध करेगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा “बीजेपी पुलिस भेजकर हमें रोकना चाहती है, लेकिन यह लड़ाई रुकने वाली नहीं। वोट चोरों को बचाया नहीं जा सकेगा। कांग्रेस का हर कार्यकर्ता गली-गली आवाज देगा— मोदी, वोट चोरी बंद करो।
पुलिस अलर्ट पर, कांग्रेस नेताओं को हाउस अरेस्ट
अजय राय के ऐलान के बाद वाराणसी पुलिस अलर्ट पर आ गई। लखनऊ से वाराणसी के रास्ते टोल प्लाजा पर हाई अलर्ट जारी किया गया। पुलिस ने अजय राय को उनके घर में नजरबंद कर दिया। सिर्फ अजय राय ही नहीं, सोनभद्र के कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामराज गोंड़ समेत कई अन्य नेताओं को भी हाउस अरेस्ट किया गया। पुलिस का तर्क है कि इससे संभावित टकराव टाला जा सकेगा।
अजय राय का तीखा हमला
नजरबंद किए जाने के बाद अजय राय ने कहा “यह सरकार विरोध की आवाज को दबाने का हर हथकंडा अपना रही है। लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं। जनता के मुद्दों को उठाने के लिए हम सड़कों पर उतरेंगे।” उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस कार्यकर्ता हर गांव-गली से विरोध दर्ज कराएंगे।
रायबरेली का एक्शन, बनारस का रिएक्शन
यह पूरा घटनाक्रम रायबरेली से शुरू हुआ और बनारस तक पहुंचा। दिनेश प्रताप सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने राहुल गांधी का रास्ता रोका और नाराजगी जताई। इसके बाद कांग्रेस ने वाराणसी में पीएम मोदी के खिलाफ विरोध का ऐलान किया। कांग्रेस इसे “एक्शन का रिएक्शन” बता रही है।
राहुल गांधी के काफिले की घटना
राहुल गांधी बुधवार को लखनऊ से सड़क मार्ग से रायबरेली जा रहे थे। इस दौरान रायबरेली-प्रयागराज हाईवे पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनका रास्ता रोका। रायबरेली के एसपी डॉ. यशवीर सिंह ने कहा था कि राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह और कार्यकर्ताओं ने हाईवे पर धरना देकर काफिले को रोकने की कोशिश की थी। हालांकि समय रहते पुलिस ने स्थिति संभाल ली।
दिनेश प्रताप बनाम अजय राय
दिनेश प्रताप सिंह और अजय राय की राजनीति लंबे समय से आमने-सामने रही है। 2024 में दिनेश प्रताप सिंह ने रायबरेली से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा। 2019 में उन्होंने सोनिया गांधी के खिलाफ भी मैदान संभाला था। वहीं, अजय राय वाराणसी से लगातार तीन चुनाव पीएम मोदी के खिलाफ कांग्रेस के उम्मीदवार रहे। अब एक बार फिर दोनों नेताओं की राजनीतिक लड़ाई सड़कों पर उतर आई है— रायबरेली में दिनेश प्रताप का विरोध और वाराणसी में अजय राय का पलटवार।
कांग्रेस बनाम बीजेपी की बढ़ती तल्खी
यह विवाद सिर्फ दो नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कांग्रेस और बीजेपी के बीच बढ़ती तल्खी का संकेत भी है। राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में विरोध और पीएम मोदी के वाराणसी दौरे पर कांग्रेस का ऐलान, दोनों घटनाएं आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति को और गरमा सकती हैं। रायबरेली की घटना ने कांग्रेस को आक्रामक बनाया और अजय राय ने सीधे पीएम मोदी के काशी दौरे को निशाना बना दिया। हालांकि पुलिस ने समय रहते हालात काबू में कर लिए और बड़े टकराव की संभावना को टाल दिया। फिर भी, इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्रों में राजनीतिक जंग अब और तीखी होने वाली है। (प्रकाश कुमार पांडेय)





