Nepal Protest LIVE Updates: नेपाल की जेल में फायरिंग, 5 मौतें… सड़कों पर उतरी सेना, चितवन में चुनाव आयोग के दफ्तर में आगजनी
नेपाल इस समय भीषण राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों की आग ने पूरे देश को हिंसा की चपेट में ले लिया है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। सड़कों पर सेना उतार दी गई है और राजधानी काठमांडू से लेकर जिला स्तर तक तनाव पसरा हुआ है।
नेपाल में सड़कों पर सेना
भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ गुस्साए हजारों लोग राजधानी काठमांडू समेत विभिन्न शहरों की सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने कई सरकारी इमारतों में घुसकर आगजनी कर दी। जिला प्रशासन कार्यालय, अदालत, चुनाव आयोग का दफ्तर और यहां तक कि सुपरमार्केट भी भीड़ के निशाने पर आ गए। हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 19 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालात बिगड़ने पर नेपाल आर्मी की तैनाती करनी पड़ी है, जो जनता से शांति बनाए रखने की अपील कर रही है।
काठमांडू एयरपोर्ट शाम 6 बजे तक बंद
राजधानी काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को सुरक्षा कारणों से शाम 6 बजे तक बंद कर दिया गया है। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी और संभावित हमलों को देखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया। एयरपोर्ट बंद होने से यात्रियों को खासी दिक्कतें हो रही हैं।
ओली का इस्तीफा और राजनीतिक संकट
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने जनता के दबाव और लगातार बढ़ते प्रदर्शनों के बीच इस्तीफा दे दिया। ओली सरकार पर भ्रष्टाचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के आरोप लग रहे थे। सोशल मीडिया बैन के फैसले ने विरोध को और उग्र कर दिया। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल इस समय गहरे राजनीतिक और सामाजिक संकट से जूझ रहा है।
चितवन में चुनाव आयोग का दफ्तर जला
प्रदर्शनकारियों ने चितवन जिले में चुनाव आयोग के दफ्तर में आग लगा दी। पुलिस के रोकने पर प्रदर्शनकारी और सुरक्षाबल आमने-सामने आ गए। कई जगहों पर भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार मिटाने तक आंदोलन जारी रहेगा।
बांके जेल और सुधार गृह में गोलीबारी, 5 की मौत
नेपाल के बांके जिले की नौबस्ता जेल और किशोर सुधार गृह में भी हालात बिगड़ गए। झड़प के दौरान कैदी और बंदी प्रशासन के खिलाफ भड़क उठे। सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 5 लोगों की मौत हो गई जबकि 7 लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि जेल में रखे 585 कैदियों में से 149 और 176 किशोर बंदियों में से 76 भागने में सफल रहे। फरार कैदियों की तलाश के लिए सेना और सशस्त्र पुलिस बल को अलर्ट पर रखा गया है।
सीमा पर भारत का अलर्ट
नेपाल की हिंसा का असर भारत पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। उत्तर प्रदेश और बिहार से सटी भारत-नेपाल सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया है। सशस्त्र सीमा बल (SSB), यूपी पुलिस और बिहार पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि उपद्रवी तत्व सीमा पार आकर भारत में अशांति न फैला सकें।
Gen-Z आंदोलन ने बदली तस्वीर
This time in Nepal नेपाल में इस बार के the youth, especially the Gen-Z generation प्रदर्शनों की कमान युवाओं, खासकर Gen-Z पीढ़ी ने संभाली है। सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार विरोधी नारेबाजी Social media ban and anti-corruption slogans ने आंदोलन को ताकत दी। Thousands of youth took to the streets हजारों युवा Kathmandu काठमांडू और अन्य शहरों की सड़कों पर उतर आए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन नेपाल के लोकतंत्र के लिए नया मोड़ साबित हो सकता है।
राजधानी में पसरा सन्नाटा
प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे के बाद राजधानी काठमांडू में सन्नाटा पसरा हुआ है। कई इलाके अभी भी जलने के बाद धुएं से ढके हैं। प्रशासन लगातार शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है, लेकिन आम लोग डरे-सहमे हैं। बाजार और सरकारी दफ्तर बंद पड़े हैं। नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता का यह दौर न सिर्फ पड़ोसी देश के लिए, बल्कि भारत के लिए भी चिंता का विषय है। भारत-नेपाल सीमा से लगी संवेदनशील जिलों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। नेपाल के नए नेतृत्व और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती हालात को सामान्य करने और जनता का भरोसा वापस जीतने की होगी। कुल मिलाकर, नेपाल इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों से उपजा जनाक्रोश, प्रधानमंत्री का इस्तीफा, सेना की तैनाती और जेलों में हिंसा—ये सभी घटनाएं इस ओर इशारा करती हैं कि आने वाले हफ्तों में नेपाल का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल सकता है।





