उद्धव ठाकरे से रिश्ते सुधारने के बाद अब महाविकास आघाड़ी में राज ठाकरे होंगे शामिल? सामने आया ये बड़ा अपडेट
महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। ठाकरे परिवार के दो ध्रुव—उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे—बीते वर्षों की तल्खियों को पीछे छोड़ते हुए अब करीब आते दिखाई दे रहे हैं। इसी के साथ एक नया सवाल सियासी गलियारों में गूंज रहा है—क्या महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अब महाविकास आघाड़ी (एमवीए) का हिस्सा बनेगी?
ठाकरे बंधुओं की नजदीकी और बदले समीकरण
पिछले कुछ महीनों तक राज और उद्धव ठाकरे के रिश्ते ठंडे थे। लेकिन हाल ही में दोनों नेताओं के बीच की दूरियां कम होने लगीं। सूत्र बताते हैं कि कुछ मौकों पर दोनों ने निजी तौर पर मुलाकात कर संवाद बढ़ाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदले समीकरण महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा असर डाल सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ठाकरे बंधुओं के बीच की नजदीकी अगर आगे भी बनी रही, तो मनसे को महाविकास आघाड़ी में शामिल करने का रास्ता भी खुल सकता है। इससे न केवल शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस-एनसीपी की ताकत बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा-शिंदे गुट को कड़ी चुनौती भी मिलेगी।
मातोश्री में अहम मुलाकात
सोमवार को कांग्रेस नेताओं विजय वडेट्टीवार, बालासाहेब थोराट और अमीन पटेल ने उद्धव ठाकरे से उनके निवास ‘मातोश्री’ पर मुलाकात की। इस मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेताओं और उद्धव ठाकरे के बीच मनसे को एमवीए में शामिल करने पर गहन चर्चा हुई। इसके अलावा, बैठक में विधान परिषद में विपक्ष के नेता (एलओपी) पद पर कांग्रेस की दावेदारी, साथ ही उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की रणनीति जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
कांग्रेस का ‘दिल्ली फैक्टर’
कांग्रेस ने साफ किया है कि मनसे को एमवीए में शामिल करने के सवाल पर अंतिम फैसला दिल्ली नेतृत्व ही करेगा। महाराष्ट्र कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि वे अपनी राय जरूर रखेंगे, लेकिन हाईकमान की मंजूरी के बाद ही किसी ठोस निर्णय की घोषणा होगी। यह स्थिति दर्शाती है कि मनसे की एंट्री केवल शिवसेना और एनसीपी की सहमति पर निर्भर नहीं है, बल्कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व भी इस पर बड़ा रोल निभाएगा।
मनसे की संभावित एंट्री पर समीकरण
एमवीए में इस समय उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-एसपी) शामिल हैं। यदि मनसे इसमें शामिल होती है, तो विपक्षी खेमे की ताकत और भी बढ़ सकती है। राज ठाकरे की पार्टी भले ही बड़ी संख्या में विधायकों या सांसदों के साथ मौजूद न हो, लेकिन उनकी जनसमर्थन क्षमता और मराठी अस्मिता की राजनीति एमवीए के लिए राजनीतिक मायने रखती है। विशेषकर मुंबई, ठाणे और आसपास के स्थानीय निकाय चुनावों में मनसे का सहयोग निर्णायक हो सकता है।
विधान परिषद में विपक्ष के नेता पर दावेदारी
बैठक में कांग्रेस ने विधान परिषद में विपक्ष के नेता पद पर दावा भी पेश किया। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस सतेज पाटिल का नाम इस पद के लिए आगे बढ़ा रही है। यह पद तब से खाली है जब शिवसेना (यूबीटी) नेता अंबादास दानवे का कार्यकाल समाप्त हुआ। वहीं विधानसभा में भी विपक्ष के नेता का पद खाली है, जिस पर अभी तक कोई औपचारिक नियुक्ति नहीं हुई है। कांग्रेस का कहना है कि वह विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री से इस मामले पर मुलाकात कर जल्द निर्णय चाहती है।
सियासी हलचल क्यों बढ़ी?
ठाकरे बंधुओं की नजदीकी – उद्धव और राज ठाकरे के बीच बढ़ती बातचीत ने राजनीतिक गठबंधन की अटकलों को हवा दी है। कांग्रेस की सक्रियता – कांग्रेस नेताओं की मातोश्री यात्रा ने यह साफ कर दिया है कि एमवीए आगामी निकाय चुनावों को लेकर गंभीर रणनीति बना रहा है। बीजेपी-शिंदे गुट की चुनौती – सत्ता में मौजूद गठबंधन को कड़ी टक्कर देने के लिए विपक्ष को अपने पत्ते मजबूत करने होंगे। मनसे की उपयोगिता – मनसे भले ही छोटी पार्टी हो, लेकिन मराठी वोट बैंक पर उसका प्रभाव एमवीए के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। महाविकास आघाड़ी में मनसे की एंट्री अभी तय नहीं है। कांग्रेस ने साफ किया है कि हाईकमान से हरी झंडी मिलने के बाद ही इस पर अंतिम फैसला होगा। वहीं शिवसेना (यूबीटी) की ओर से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। राज ठाकरे भी आने वाले समय में एमवीए नेताओं से सीधे बातचीत कर सकते हैं। अगर सबकुछ ठीक रहा, तो महाराष्ट्र की राजनीति में यह एक नया मोड़ साबित हो सकता है। (प्रकाश कुमार पांडेय )





