भारत दौरे पर चीन के विदेश मंत्री : एनएसए अजीत डोभाल ने की वांग यी से मुलाकात…जानें क्यों हो रही मुलाकात पर चर्चा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के साथ भारत और चीन दोनों ही देशों के बीच संबंधों में चल रहे तनाव और संवाद के प्रयासों के बीच चीन के विदेश मंत्री वांग यी Wang Yi दो दिनी भारत दौरे पर पहुंचे हैं। एक दिन पहले सोमवार को उन्होंने नई दिल्ली स्थित हैदराबाद भवन में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) से मुलाकात की थी। इस बैठक में दोनों नेताओं ने कई अहम विषयों पर चर्चा की और आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। जयशंकर और वांग यी ने इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देशों को पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक संवेदनशीलता और पारस्परिक हित जैसे मूल्यों को ध्यान में रखते हुए कठिन दौर से आगे बढ़ना होगा।
हैदराबाद भवन में हुई अहम मीटिंग
शाम को पीएम मोदी से भी मिलेंगे वांग यी
डोभाल–वांग यी मुलाकात से बढ़ी उम्मीदें
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने आज मंगलवार, 19 अगस्त 2025 को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एनएसए अजीत डोभाल Ajit Doval से मुलाकात की। दोनों के बीच हुइ्र यह बैठक भी हैदराबाद भवन में संपन्न हुई। भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों से सीमा विवाद और रणनीतिक मुद्दों को लेकर जो तनाव बना हुआ है, उसके बीच यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है।
डोभाल और वांग यी की बातचीत में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, सुरक्षा मुद्दों और सीमा विवाद जैसे विषय प्रमुख रहे। हालांकि आधिकारिक तौर पर विस्तृत एजेंडा अब तक सामने नहीं आया है, लेकिन यह चर्चा है कि भारत और चीन के इन दो बड़े चेहरों ने सीमावर्ती इलाकों में शांति बनाए रखने और संवाद और चर्चा मेलमुलाकात के जरिए आगे बढ़ने पर जोर दिया।
लद्दाख विवाद की पृष्ठभूमि
भारत और चीन के बीच संबंधों में सबसे बड़ी चुनौती लद्दाख सीमा विवाद रहा है। 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई थी। कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। सीमा पर तनाव और सैनिकों की तैनाती को लेकर दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई गहरी है। इसी पृष्ठभूमि में वांग यी और अजीत डोभाल की मुलाकात को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कूटनीतिक हलकों का कहना है कि दोनों देशों के शीर्ष सुरक्षा और विदेश नीति सलाहकार जब मिलते हैं, तो संवाद को आगे बढ़ाने का संदेश जाता है।
आर्थिक रिश्ते भी एजेंडे में भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और निवेश से जुड़े मुद्दे भी अहम हैं। चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, लेकिन हाल के वर्षों में कई चीनी कंपनियों पर सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं। भारत ने कई चीनी मोबाइल एप्स पर प्रतिबंध लगाया है और 5G जैसी तकनीकी परियोजनाओं में चीनी कंपनियों को सीमित प्रवेश दिया है।
संकेत मिल रहे हैं कि वांग यी और डोभाल की बातचीत में व्यापार, निवेश और आपसी भरोसे जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत चाहता है कि आर्थिक सहयोग संतुलित और पारदर्शी हो, जबकि चीन भारत में अपने निवेश को बढ़ाने के पक्ष में है।
वैश्विक मंच पर भारत-चीन सहयोग
भारत और चीन दोनों ही एशिया की बड़ी शक्तियाँ हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अक्सर उनके हित टकराते भी हैं। चाहे बात ब्रिक्स (BRICS) की हो, एससीओ (SCO) की या संयुक्त राष्ट्र (UN) की, भारत और चीन कई बार साथ आते हैं तो कई बार अलग-अलग खेमों में खड़े दिखाई देते हैं। इस दौरे के दौरान यह संभावना जताई जा रही है कि डोभाल और वांग यी ने आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक आर्थिक संकट जैसे साझा मुद्दों पर भी चर्चा की होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और चीन अगर आपसी मतभेदों को पीछे छोड़कर सहयोग की राह पर चलें तो एशिया और वैश्विक राजनीति में नई दिशा मिल सकती है।
शाम को पीएम मोदी से मुलाकात
मंगलवार शाम करीब 5:30 बजे वांग यी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर मुलाकात करेंगे। यह बैठक इस दौरे का सबसे अहम हिस्सा मानी जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि इस दौरान पीएम मोदी और वांग यी दोनों देशों के संबंधों में नई शुरुआत करने पर चर्चा करेंगे।कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि मोदी और वांग यी की मुलाकात से आने वाले महीनों में भारत-चीन संवाद की दिशा तय होगी। अगर बैठक सकारात्मक रहती है तो दोनों देशों के बीच संवाद की प्रक्रिया तेज हो सकती है और सीमा पर तनाव कम करने के प्रयासों को नई गति मिल सकती है।
विशेषज्ञों की राय
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और चीन के बीच संवाद बनाए रखना ही सबसे बड़ा कदम है। प्रो. अजय गुप्ता, अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ, कहते हैं “गलवान झड़प के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में अविश्वास गहरा है। डोभाल और वांग यी की मुलाकात यह संदेश देती है कि संवाद की कोशिशें जारी हैं। यह जरूरी है क्योंकि भारत और चीन दोनों एशिया की स्थिरता और शांति के लिए अहम हैं।” वहीं कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ मुलाकातों से बात नहीं बनेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर भरोसे के कदम उठाने होंगे।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी का यह दौरा भारत-चीन संबंधों के लिहाज से बेहद अहम है। हैदराबाद भवन में विदेश मंत्री जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल से हुई मुलाकातों ने यह संकेत दिया है कि दोनों देश संवाद की राह पर आगे बढ़ना चाहते हैं। शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होने वाली बैठक इस दौरे का सबसे निर्णायक पल होगी। अब देखना यह है कि क्या इन बैठकों से सीमा विवाद सुलझाने और आर्थिक रिश्तों को संतुलित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं या फिर यह मुलाकात भी सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाती है। लेकिन इतना तय है कि इस मुलाकात ने भारत-चीन संबंधों को लेकर उम्मीदों का नया द्वार खोल दिया है। प्रकाश कुमार पांडेय





