क्या INDIA गठबंधन चुनावों का बहिष्कार करेगा?…RJD सांसद मनोज झा ने दिया ये स्पष्ट जवाब
बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर पक्षपात और वोट चोरी के आरोप लगा रहा है। इसी बीच यह बड़ा सवाल उठने लगा कि क्या INDIA गठबंधन आगामी चुनावों का बहिष्कार करेगा? इस पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि बहिष्कार जैसे किसी बड़े कदम पर फैसला विपक्ष अकेले नहीं करेगा, बल्कि जनता से राय लेकर ही किया जाएगा।
- राजद सांसद मनोज झा ने की स्थिति स्पष्ट
- बहिष्कार जैसे किसी बड़े कदम पर फैसला विपक्ष अकेले नहीं करेगा
- बल्कि जनता से राय लेकर ही किया जाएगा
- जनता से राय लिए बिना कोई कदम नहीं
मुख्य बिंदु
- चुनाव आयोग पर विपक्ष का आरोप – पक्षपात और वोट चोरी।
- मनोज झा का बयान – बहिष्कार का फैसला जनता की राय पर निर्भर।
- सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद – निष्पक्ष चुनाव की गारंटी।
- तेजस्वी यादव पहले ही जता चुके हैं बहिष्कार की संभावना।
- विपक्ष की रणनीति – आयोग पर दबाव या सचमुच मैदान छोड़ना?
चुनाव आयोग पर विपक्ष का हमला
पिछले कई महीनों से विपक्षी दल चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि आयोग सत्तारूढ़ दल के इशारों पर काम कर रहा है और वोटर लिस्ट से लेकर बूथ प्रबंधन तक में पक्षपात हो रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद विपक्ष ने फिर से वोट चोरी और गड़बड़ी के आरोपों को जोर-शोर से उठाया। इसी बहस के बीच, चुनाव बहिष्कार का मुद्दा एक बार फिर से चर्चा में आ गया।
मनोज झा का बयान – जनता से पूछकर होगा फैसला
राजद सांसद मनोज झा ने स्पष्ट कहा कि किसी भी तरह के बहिष्कार का निर्णय जनता की राय पर आधारित होगा। उन्होंने कहा “हम जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए जनता ही फैसला करेगी। अगर वास्तव में बहिष्कार करना पड़ा, तो यह निर्णय आम लोगों और विपक्षी पार्टियों से विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा। यह कोई मनमानी का कदम नहीं होगा।” झा ने यह भी कहा कि राजद और गठबंधन के अन्य दल चुनाव आयोग के पास पहले ही अपनी शिकायतें दर्ज करा चुके हैं, लेकिन आयोग का रवैया अब तक जिद्दी ही रहा है।
सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद
मनोज झा ने आगे कहा कि विपक्ष अभी भी सर्वोच्च न्यायालय से न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। उनका कहना था कि न्यायपालिका से उन्हें विश्वास है कि वह चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखेगी। उन्होंने कहा “हमें उम्मीद है कि चुनाव आयोग अपनी निष्पक्ष छवि को बचाएगा। यह कहने की जरूरत नहीं होनी चाहिए कि आयोग सबके लिए बराबर है। यह बात उसके आचरण में दिखनी चाहिए।
तेजस्वी यादव का पुराना बयान फिर चर्चा में
करीब तीन सप्ताह पहले बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव बहिष्कार का मुद्दा छेड़ा था। उन्होंने कहा था कि अगर चुनाव पहले से तय स्क्रिप्ट के मुताबिक कराए जाएंगे, जहां यह पहले से साफ हो कि कौन जीतेगा और कौन हारेगा, तो ऐसे चुनावों में हिस्सा लेने का कोई औचित्य नहीं है। तेजस्वी ने यह भी कहा था कि इस मसले पर वह जनता और गठबंधन के सहयोगियों से फीडबैक लेने के बाद ही अंतिम निर्णय करेंगे। इसी बयान के बाद से यह अटकलें तेज हो गई थीं कि INDIA गठबंधन वाकई में बहिष्कार कर सकता है।
विपक्ष की रणनीति – दबाव या सचमुच बहिष्कार?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बहिष्कार की धमकी विपक्ष की रणनीति भी हो सकती है। विपक्ष इससे चुनाव आयोग पर दबाव बनाना चाहता है ताकि वह पारदर्शिता सुनिश्चित करे। एक पक्ष का मानना है कि वास्तविक बहिष्कार की संभावना कम है, क्योंकि इससे सत्तारूढ़ दल को सीधा फायदा हो जाएगा। दूसरा पक्ष कहता है कि अगर जनता के बीच यह संदेश गया कि विपक्ष चुनाव आयोग की कथित मिलीभगत से नाराज है और लोकतंत्र की रक्षा के लिए मैदान छोड़ रहा है, तो यह नैतिक दबाव का बड़ा हथियार साबित हो सकता है।
बिहार की सियासत और INDIA गठबंधन की मुश्किलें
बिहार की राजनीति हमेशा से ही जातीय समीकरण और गठबंधनों पर आधारित रही है। इस बार चुनाव में INDIA गठबंधन बनाम NDA की सीधी लड़ाई मानी जा रही है। NDA में भाजपा, जदयू और अन्य सहयोगी दल शामिल हैं। INDIA गठबंधन में राजद, कांग्रेस और वामदलों के साथ कई छोटे दल भी जुड़े हैं। अगर विपक्ष वाकई बहिष्कार करता है तो चुनावी परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा। लेकिन विपक्ष के सामने यह भी चुनौती है कि क्या जनता इस कदम को सही मानेगी या इसे ‘भागने की राजनीति’ कहा जाएगा।
आगे की राह – संवाद और कानूनी लड़ाई
मनोज झा के बयान से साफ है कि विपक्ष तुरंत कोई कठोर फैसला नहीं लेने जा रहा। पहले वह जनता से संवाद करेगा, सहयोगी दलों से चर्चा करेगा और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेगा। बिहार की राजनीति फिलहाल अनिश्चितता और संशय के दौर से गुजर रही है। INDIA गठबंधन बहिष्कार करेगा या नहीं, यह अभी साफ नहीं है। लेकिन मनोज झा के बयान से इतना तो तय है कि विपक्ष जल्दबाज़ी में कोई निर्णय नहीं लेगा। वह जनता, सहयोगियों और न्यायपालिका से राय लेने के बाद ही अगला कदम उठाएगा। यानी फिलहाल बहिष्कार का सवाल संभावना के दायरे में है, न कि हकीकत के। लेकिन इतना तय है कि आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा बिहार की सियासत को और गर्माएगा और देशभर की नज़रें इस पर टिकी रहेंगी। प्रकाश कुमार पांडेय





