भारत का सख्त संदेश: पाकिस्तान की धमकियों का जवाब, अमेरिका से रणनीतिक रिश्तों पर जोर
भारत ने पाकिस्तान की उकसाने वाली बयानबाजी और सिंधु जल समझौते पर आए अंतरराष्ट्रीय फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि पड़ोसी देश को संयम बरतना चाहिए और किसी भी दुस्साहस का परिणाम गंभीर होगा। साथ ही, भारत ने अमेरिका के साथ बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित किया।
पाकिस्तान को चेतावनी, उकसावे पर कड़ा रुख
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि पाकिस्तान की युद्ध भड़काने वाली आदतें उसकी आंतरिक नाकामियों को छिपाने का जरिया हैं। उन्होंने सख्त लहजे में आगाह किया कि भारत की संप्रभुता से खिलवाड़ का नतीजा दर्दनाक होगा। सिंधु जल समझौते पर तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय के फैसले को भी भारत ने गैरकानूनी और निराधार बताया। जयसवाल ने दोहराया कि जून 2025 में भारत ने इस संधि को निलंबित करने का फैसला पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के जवाब में लिया था।
भारत-अमेरिका साझेदारी और रक्षा सहयोग पर फोकस
जयसवाल ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा हितों पर आधारित एक मज़बूत वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है। अगस्त के मध्य में अमेरिकी रक्षा नीति दल भारत आएगा, वहीं इस महीने अलास्का में दोनों देशों का संयुक्त सैन्याभ्यास भी होगा। इसके अलावा, 2+2 इंटरसेशनल मीटिंग का आयोजन भी तय है। मंत्रालय के अनुसार, रक्षा सहयोग हमारे द्विपक्षीय रिश्तों का अहम स्तंभ है जो लगातार मजबूत हो रहा है।
UNGA यात्रा और अन्य वैश्विक मुद्दों पर भारत का रुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) यात्रा पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। BRICS में भारत की सक्रिय भूमिका जारी है, लेकिन वैकल्पिक मुद्रा और डी-डॉलराइजेशन भारत के वित्तीय एजेंडे का हिस्सा नहीं हैं। भारत-चीन सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने के लिए तीन प्रमुख दर्रों — लिपुलेख, शिपकी ला और नाथु ला — के माध्यम से बातचीत चल रही है।





