वो तो व्यापारियों ने आपका सम्मान किया, वरना… योगी आदित्यनाथ का सदन में बड़ा वार, नेता प्रतिपक्ष को सुनाई खरी-खरी
मानसून सत्र की धमाकेदार शुरुआत
उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार को जैसे ही शुरू हुआ, सदन में माहौल गरमा गया। प्रश्नकाल के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहक्षेत्र गोरखपुर में हुई एक घटना का मुद्दा उठाया, जिसमें उनके साथ कथित अभद्रता की गई थी। लेकिन इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जवाब न केवल तीखा था बल्कि सीधा सपा के अतीत पर हमला भी था।
विवाद की शुरुआत: गोरखपुर के विरासत गलियारे का मामला
माता प्रसाद पांडेय ने सदन में कहा कि वह गोरखपुर के विरासत गलियारे में व्यापारियों की समस्याएं सुनने गए थे। उनके मुताबिक, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को शिकायत मिली थी कि वहां दुकानों को गिराया जा रहा है और मुआवजा नहीं दिया जा रहा। इसी के बाद पांडेय को मौके पर जाने का निर्देश मिला।
उन्होंने आरोप लगाया कि वहां पहुंचने पर उन्हें रोकने की कोशिश हुई, उनकी गाड़ी को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। “अगर मुझे रोकना ही था, तो सर्किट हाउस में रोक देते। लेकिन मुठभेड़ जैसी स्थिति पैदा करने की क्या जरूरत थी?” — पांडेय ने सवाल किया।
योगी का पलटवार: “सपा और लोकतंत्र नदी के दो किनारे”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका जवाब बेहद सख्ती से दिया। उन्होंने कहा “समाजवादी पार्टी और लोकतंत्र नदी के दो अलग-अलग किनारे हैं। कब से इन लोगों का लोकतंत्र में विश्वास हो गया? संभल में जो नग्न तांडव आपने अपनी सरकार में किया, अब जब शुद्धिकरण का काम चल रहा है, तो हवन में आहुति डालना ठीक है, लेकिन हर जगह नकारात्मकता फैलाना और विकास में बाधा डालना आपकी आदत है। योगी ने पांडेय को नसीहत दी कि वह वरिष्ठ नेता होने के नाते अपने कंधे पर किसी का “मोहरा” न बनने दें, खासकर इस उम्र में।
“बिना बुलाए पहुंचे, व्यापारियों ने किया विरोध”
मुख्यमंत्री ने बताया कि वह खुद तीन दिन पहले विरासत गलियारे गए थे और एक-एक व्यापारी से बात कर चुके थे। यह इलाका गोरखपुर का सबसे पुराना बाजार है, जहां अतिक्रमण और भीड़ के कारण सड़क चौड़ीकरण की जरूरत पड़ी। “आप लोगों ने वहां कभी कुछ नहीं किया। एनसेफेलाइटिस से सालाना सैकड़ों बच्चे मरते थे, तब आप चुप रहते थे। सीएम योगी ने कहा अब जब हम राज्य का विकास करना चाहते हैं, तो आपको बुरा क्यों लग रहा है। सीएम योगी ने जोर देकर यह भी कहा है कि विरोध बीजेपी ने नहीं, बल्कि व्यापारियों ने किया है। सीएम ने कहा उन्हें डर था कि समाजवादी पार्टी फिर से “गुंडा टैक्स” और अव्यवस्था का माहौल लेकर आएगी।
“वरना सही हैंग से जवाब मिलता”
सीएम का सबसे तीखा हमला तब आया जब उन्होंने कहा “व्यापारियों ने तो आपका सम्मान किया, वरना अगर कोई और होता तो बहुत कायदे से सही हैंग से जवाब भी देते। समाजवादी पार्टी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे सुरक्षा और विकास की बात करेंगे।” योगी के इस बयान के बाद सदन में माहौल और गरमा गया, भाजपा विधायकों की तरफ से मेजें थपथपाई गईं, जबकि सपा के सदस्य नाराजगी जताते दिखे।
राजनीतिक सन्देश और सत्र की टोन
इस घटना से विधानसभा सत्र के पहले दिन ही साफ हो गया कि मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज रहने वाला है। गोरखपुर का यह मुद्दा महज स्थानीय विकास कार्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे-सीधे सपा के शासनकाल और मौजूदा राजनीतिक रणनीति तक जा पहुंचा। विश्लेषकों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ ने अपने जवाब में दो संदेश देने की कोशिश की — सपा के पुराने कार्यकाल की “गुंडाराज” वाली छवि को फिर से जनता के सामने लाना। विकास कार्यों को विपक्ष द्वारा रोके जाने की धारणा मजबूत करना।
विरासत गलियारा और चुनावी पिच
गोरखपुर का विरासत गलियारा प्रोजेक्ट स्थानीय व्यापारियों और पर्यटन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने जैसे कदम चुनावी साल में विपक्ष और सत्ता पक्ष के लिए राजनीतिक पिच तैयार कर सकते हैं। सत्र के पहले दिन का यह गरमागरम आदान-प्रदान इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में सदन में और भी तीखे हमले और पलटवार देखने को मिलेंगे। प्रकाश कुमार पांडेय





