संसद रत्न पुरस्कार 2025: सुप्रिया सुले, रवि किशन समेत 17 सांसदों और 2 स्थायी समितियों को मिला सम्मान
लोकसभा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सांसदों को उनके प्रभावशाली योगदान के लिए संसद रत्न पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया है। इस वर्ष कुल 17 सांसदों और दो प्रमुख संसदीय स्थायी समितियों को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया। इस पुरस्कार का उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उल्लेखनीय भागीदारी निभाने वाले सांसदों को प्रोत्साहित करना है।
प्रमुख सम्मानित सांसद
इस बार जिन सांसदों को संसद रत्न पुरस्कार से नवाजा गया है, उनमें विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं।
सुप्रिया सुले – एनसीपी (शरद पवार गुट), महाराष्ट्र
रवि किशन – बीजेपी, उत्तर प्रदेश
निशिकांत दुबे – बीजेपी, झारखंड
अरविंद सावंत – शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), महाराष्ट्र
स्मिता उदय वाघ – बीजेपी
नरेश म्हस्के – शिवसेना
वर्षा गायकवाड़ – कांग्रेस
मेधा कुलकर्णी, प्रवीण पटेल, विद्युत बरन महतो, दिलीप सैकिया – सभी बीजेपी सांसद
इन सांसदों को लोकसभा में उनकी उपस्थिति, बहस में भागीदारी, प्रश्न पूछने की संख्या और निजी विधेयकों के माध्यम से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में योगदान के लिए सम्मानित किया गया है।
चार विशेष जूरी पुरस्कार
चार सांसदों को उनके लगातार तीन कार्यकालों में उत्कृष्ट योगदान के लिए विशेष जूरी सम्मान से भी नवाजा गया। इनमें शामिल हैं।
भर्तृहरि महताब – बीजेपी, ओडिशा
एन के प्रेमचंद्रन – क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी, केरल
सुप्रिया सुले – एनसीपी (एसपी), महाराष्ट्र
श्रीरंग बार्ने – शिवसेना, महाराष्ट्र
इन सभी सांसदों ने 16वीं लोकसभा से लेकर अब तक निरंतर बेहतरीन प्रदर्शन किया है।
सम्मानित की गई दो प्रमुख समितियाँ
सिर्फ व्यक्तिगत सांसद ही नहीं, बल्कि संसदीय निगरानी और रिपोर्टिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली दो स्थायी समितियों को भी संसद रत्न सम्मान दिया गया:
वित्त संबंधी स्थायी समिति – अध्यक्ष: भर्तृहरि महताब
कृषि संबंधी स्थायी समिति – अध्यक्ष: डॉ. चरणजीत सिंह चन्नी (कांग्रेस)
इन समितियों को विधायी गुणवत्ता और नीतिगत निगरानी में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।
पुरस्कार की प्रकृति और चयन प्रक्रिया
संसद रत्न पुरस्कार की शुरुआत 2010 में प्राइम पॉइंट फाउंडेशन द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य भारत की संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली को मजबूत बनाना और जिम्मेदार सांसदों को प्रोत्साहित करना है।
2025 के लिए पुरस्कार विजेताओं का चयन एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जूरी समिति द्वारा किया गया, जिसकी अध्यक्षता इस बार हंसराज अहीर (पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री) ने की। चयन प्रक्रिया में सांसदों की उपस्थिति, संसद में सक्रियता, जनहित मुद्दों पर भागीदारी और समिति कार्य जैसे मापदंडों को ध्यान में रखा गया।
संसद रत्न पुरस्कार न केवल सांसदों के उत्कृष्ट कार्य को मान्यता देता है, बल्कि यह लोकतंत्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और जवाबदेही को भी रेखांकित करता है। सुप्रिया सुले, रवि किशन जैसे विविध राजनीतिक पृष्ठभूमि के सांसदों को एक साथ सम्मानित किया जाना भारतीय लोकतंत्र की बहुलता और जीवंतता का प्रतीक है। यह पुरस्कार उन सभी जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो जनता की आवाज को संसद तक पहुंचाने के अपने कर्तव्य का ईमानदारी से पालन कर रहे हैं। प्रकाश कुमार पांडेय





