राजधानी भोपाल में बुधवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवाओं के भविष्य को नया मार्गदर्शन देने वाला बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के प्रत्येक विश्वविद्यालय में अब वेटरनरी कोर्स शुरू किए जाएंगे, जिससे पशुपालन क्षेत्र में विशेषज्ञों की जरूरत को पूरा किया जा सके। मुख्यमंत्री का यह फैसला न केवल राज्य के पशुधन संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करेगा, बल्कि युवाओं को रोजगार से जुड़ी शिक्षा प्रदान कर आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस कदम भी होगा।
रोजगार आधारित शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश का ऐतिहासिक कदम
MP के प्रत्येक विश्वविद्यालय में शुरू होगा वेटरनरी कोर्स, युवाओं को मिलेगा रोजगार आधारित शिक्षा का नया अवसर
कार्यशाला का आयोजन… ‘विकसित भारत @2047’ के तहत नई सोच का मंच
भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में ‘विकसित भारत @2047’ पहल के तहत “रोजगार आधारित शिक्षा—रुझान एवं नए अवसर” विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन तथा प्रदेश के 70 से अधिक विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, प्राचार्य, विषय-विशेषज्ञ और शैक्षणिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
दूध उत्पादन में शीर्ष पर जाने की तैयारी
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने संबोधन में बताया कि मध्यप्रदेश वर्तमान में दूध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है और अब यह लक्ष्य रखा गया है कि राज्य को इस क्षेत्र में पहले स्थान पर लाया जाए। उन्होंने बताया कि “हमारे पास छह करोड़ से अधिक पशुधन है, ऐसे में वेटरनरी विशेषज्ञों की भारी आवश्यकता है। सिर्फ एक वेटरनरी कॉलेज से यह आवश्यकता पूरी नहीं हो सकती। इसलिए, राज्य के प्रत्येक विश्वविद्यालय में वेटरनरी शिक्षा शुरू की जाएगी, ताकि हर क्षेत्र में पशुधन से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।”
कुलपति नहीं, अब ‘कुलगुरु’
डॉ. मोहन यादव ने यह भी साझा किया कि मध्यप्रदेश में शैक्षणिक परंपराओं को भारतीय संस्कृति के अनुरूप बनाया जा रहा है। इसके तहत राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में ‘वाइस चांसलर’ के पदनाम को बदलकर ‘कुलगुरु’ किया गया है। उन्होंने बताया कि “इस पहल को अब देशभर में सराहा जा रहा है और दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने भी इसका अनुसरण करते हुए यह बदलाव किया है। यह हमारे लिए गौरव की बात है।
रोजगार आधारित शिक्षा पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा, “शिक्षा अब केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं रही, बल्कि रोजगार और आत्मनिर्भरता की कुंजी बन गई है। इसलिए हमारी सरकार का फोकस शिक्षा को उद्योग, कृषि, पशुपालन और नवाचार जैसे क्षेत्रों से जोड़ने पर है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं को सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि उद्योग और बाजार की मांग के अनुरूप व्यावहारिक शिक्षा मिलनी चाहिए।
तकनीकी सत्रों में भविष्य के अवसरों पर चर्चा
कार्यशाला में प्रमुख वक्ता डॉ. एसी पांडे (निदेशक, इंटर यूनिवर्सिटी एक्सेलेरेटर सेंटर, नई दिल्ली) ने तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में उभरते रोजगार के अवसरों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तकनीकी बदलाव, नवाचार और इंटरडिसिप्लिनरी शिक्षा से जुड़े कौशल आने वाले वर्षों में युवाओं के लिए महत्वपूर्ण होंगे। इसके अलावा इंजीनियरिंग, जीवन विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कौशल विकास और ग्रामीण नवाचार से जुड़े तकनीकी सत्रों का आयोजन भी किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने रोजगार के भविष्य को लेकर गहन विमर्श किया।
शिक्षाविदों और प्रशासनिक अफसरों की सहभागिता
कार्यशाला में प्रदेश भर के विश्वविद्यालयों से आए कुलगुरु, प्राचार्य, शिक्षाविद, नीति-निर्माता और शिक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में यह भी चर्चा हुई कि किस प्रकार नई शिक्षा नीति 2020 के तहत रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों को विश्वविद्यालयों में लागू किया जा सकता है।
युवाओं के लिए नए द्वार खोलने की तैयारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह घोषणा कि हर विश्वविद्यालय में वेटरनरी शिक्षा शुरू की जाएगी, प्रदेश के युवाओं के लिए एक नया और ठोस अवसर प्रदान करती है। यह निर्णय न केवल कृषि और पशुपालन क्षेत्र को सशक्त करेगा, बल्कि शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। भोपाल में हुई यह कार्यशाला इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश सरकार विकसित भारत 2047 की दिशा में शिक्षा को नया रूप देने के लिए संकल्पित है।
प्रकाश कुमार पांडेय





